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पैगंबर विवाद के बाद इस संगठन ने कतर पर किया हमला, कहा - "भारतीय मजदूर गुलाम जैसे"

"2014 के बाद से कतर में 1611 भारतीय प्रवासियों की मौत हो चुकी है."

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15 जून 2022 (अपडेटेड: 15 जून 2022, 02:04 PM IST)
Qatar Migrant workers
सांकेतिक तस्वीर और मजदूर संघ का पत्र (फोटो- पीटीआई/@BMSkendra)
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RSS से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने कतर में भारतीय मजदूरों के मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर चिंता जताई है. BMS ने कहा है कि कई मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट में कतर में प्रवासी मजदूरों की हालत "गुलामों जैसी" बताई गई है. कतर को लेकर भारतीय मजदूर संघ का ये बयान तब आया है जब हाल में पैगंबर मोहम्मद पर बीजेपी नेताओं की टिप्पणी को लेकर खाड़ी देश ने आपत्ति जताई थी. कतर के विदेश मंत्रालय ने भारतीय राजदूत दीपक मित्तल को तलब करके इस बयानबाज़ी की निंदा भी की थी.

कतर में 1611 प्रवासियों की मौत - BMS

भारतीय मजदूर संघ ने मंगलवार 14 जून को एक बयान जारी किया. संगठन ने कहा कि 2014 से कतर में 1611 भारतीय प्रवासियों की मौत हो चुकी है और भारत में उनके परिवारों को डेड बॉडी लेने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. संघ ने कहा कि उसने हाल में जेनेवा में हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान भी कतर सरकार और वहां के ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के सामने इस मुद्दे को उठाया था.

बयान में कहा गया है, 

"कतर को FIFA विश्व कप की मेजबानी मिलने के बाद से कई मानवाधिकार संस्थाओं ने वहां काम करने की स्थिति को गुलाम जैसी बताई है. कतर का कफाला सिस्टम भारत सहित दूसरे दक्षिण एशियाई देशों के मजदूरों के लिए गंभीर सदमे की तरह है. पासपोर्ट की जब्ती, ओवरटाइम काम, रहने की जगह थोड़ी देर भी छोड़ने ना देना, यौन उत्पीड़न, जबरन काम लेना मजदूरों के लिए गंभीर मानसिक चोट पहुंचाने जैसा है."

भारतीय मजदूर संघ का पत्र
मानवाधिकार संगठनों ने भी उठाई आवाज

पिछले महीने ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा था कि FIFA वर्ल्ड कप के इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे कामों में लगे सैकड़ों प्रवासी मजूदरों के गंभीर शोषण के बावजूद उन्हें मुआवजा या कोई दूसरी सुविधाएं नहीं दी गई. FIFA वर्ल्ड नवंबर 2022 में कतर में आयोजित होगा. ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई मानवाधिकार संगठनों ने FIFA और कतर सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है.

ज्यादातर खाड़ी देशों में कफाला सिस्टम के जरिए ही प्रवासी मजदूरों को काम पर रखा जाता है. इसके तहत उस देश में कोई व्यक्ति या कंपनी उस मजदूर के पासपोर्ट-वीजा से लेकर हर चीज तय करता है. जैसे काम के घंटे, सैलरी और रहने के प्रबंध तक. इससे मजदूर की जिंदगी की हर फैसला उसे काम देने वाले से जुड़ जाता है. कई बार वे मजदूरों के सभी कागजातों को भी रख लेते हैं.

बीएमएस ने भारत और कतर सरकार से की मांग

बीएमएस ने कहा है कि उसने भारत में कतर के राजदूत, केंद्रीय श्रम मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के सामने भी इस मुद्दे को उठाया. संगठन ने मांग की है कि सभी कतर में सभी भारतीय मजदूरों को बेहतर स्थिति में काम करवाया जाए और उनके मानवाधिकारों का सम्मान हो. साथ ही किसी के निधन होने पर शव को तुरंत भारत लाया जाए और इसका खर्च कतर सरकार या काम देने वाली एजेंसी उठाए.

संगठन ने कहा कि अगर कतर सरकार इस मुद्दे पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो बीएमएस जल्द ही इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा.

कतर में भारतीयों की आबादी 7 लाख से भी ज्यादा है. दूसरे खाड़ी देशों की तरह कतर के साथ भी भारत के व्यापारिक संबंध काफी अच्छे हैं. 2021-22 में कतर के साथ भारत का कुल व्यापार 15 अरब डॉलर था. यह भारत के कुल व्यापार का 1.4 फीसदी है. कतर की प्राकृतिक गैस का भारत सबसे बड़ा खरीदार है. भारत की करीब 40 फीसदी प्राकृतिक गैस कतर से ही आती है.

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