क्या अडानी LIC और SBI को डुबा देंगे?
गौतम अडानी अपनी कंपनी पर लगे आरोपों के नतीजे में नुकसान उठा रहे हैं.

हिंडनबर्ग रीसर्च की रिपोर्ट से अडानी समूह के बाद अगर किसी को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है, तो वो है भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC. रिपोर्ट सामने आने के बाद से LIC के शेयर सवा 13 फीसदी टूट चुके हैं. गौतम अडानी अपनी कंपनी पर लगे आरोपों के नतीजे में नुकसान उठा रहे हैं. यही हाल उन निवेशकों का है, जिन्होंने उनकी कंपनियों में पैसा लगाया था. कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सवालों को एक तरफ रख दें, तो ये एक निजी कंपनी और शेयरधारकों के बीच का मामला है, जो जानते थे कि इस खेल में नफा और नुकसान दोनों हो सकते हैं.
लेकिन ये बात भारतीय जीवन बीमा निगम LIC पर लागू नहीं होती. लाखों आम लोगों ने अपनी खून पसीने की कमाई लगाकर LIC का बीमा लिया है, या उसके स्टॉक्स में निवेश किया है. वो तनख्वाह से कटने वाली किस्तें भरते हैं, क्योंकि LIC पर भरोसा करते हैं. कि कयामत के दिन भी उनका पैसा सुरक्षित रहेगा, क्योंकि LIC भारत सरकार का उपक्रम है. उसके फैसलों में भारत सरकार की प्रत्यक्ष और परोक्ष भूमिका रहती है.
ऐसे में कुछ सवालों का वज़न बढ़ जाता है -
> LIC किसी कंपनी में निवेश का फैसला कैसे लेती है?
> अडानी समूह ने निवेश का फैसला LIC ने कैसे लिया था?
> हिंडनबर्ग रीसर्च की रिपोर्ट आने के बाद भी LIC ने अडानी एंटरप्राइज़ेस का FPO क्यों खरीदा?
> और सबसे बड़ा सवाल, क्या अडानी समूह के चलते LIC को भी खतरा हो सकता है?
यही सवाल उन सरकारी बैंकों पर भी लागू होते हैं, जिन्होंने अडानी समूह को कर्ज़ दिया, मिसाल के लिए भारतीय स्टेट बैंक. हम LIC के निवेश और उसके तरीके पर बात करने जा रहे हैं, इसीलिए पहले उस कंपनी का हाल ले लेते हैं, जहां LIC के निवेश की सबसे ज़्यादा चर्चा है - अहमदाबाद का अडानी समूह. 3 फरवरी का दिन भी अडानी समूह के लिए अच्छा नहीं रहा. समूह के शेयर, जैसे अडानी पावर, अडानी टोटल गैस और अडानी ग्रीन एनर्जी का लेनदेन आज फिर कई बार रुका, क्योंकि लोअर सर्किट लग जा रहा था. आप पूछेंगे लोअर सर्किट क्या. तो बात ऐसी है कि मुनाफाखोरी रोकने के लिए स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हर शेयर को एक सीमा में बांधा जाता है. कि एक सेशन के कारोबार में वो अधिकतम कितना बढ़ या गिर सकता है. इस सीमा पर पहुंचते ही लेनदेन रोक दिया जाता है, ताकि अत्यधिक नुकसान को रोका जा सके.
तो अडानी के जिन शेयर्स के नाम हमने अभी अभी लिये थे, वो लोअर सर्किट छू रहे थे क्योंकि अचानक 5 या 10 फीसदी की सीमा तक गिर जा रहे थे. अडानी समूह का मुख्य शेयर - अडानी एंटरप्राइज़ेस आज 1 हज़ार 50 रुपये के करीब पहुंच गया था. इसमें कुछ सुधार भी हुआ, लेकिन 2 फरवरी की तुलना में आज ये शेयर 2 फीसदी से ज़्यादा टूटकर ही बंद हुआ.
इसका नतीजा - अडानी अरबपतियों की सूची में लगातार फिसलते जा रहे हैं. फिलहाल फोर्ब्स के रीयल टाइम बिलेनियर इंडेक्स में 17 वें नंबर पर हैं. उनके समूह का मार्केट कैप आधा हो गया है. लेकिन उनके जीवन में इससे बड़ी समस्याएं हैं. क्योंकि अब उनके कारोबार की साख कम होती जा रही है और निगरानी धीरे धीरे बढ़ रही है. और ये हमारी राय नहीं है. ये कहने के ठोस आधार है. लगातार गिरते शेयर मूल्य साख पर ही टिप्पणी करते हैं. और निगरानी बढ़ने वाली बात के लिए आप कुछ बिंदुओं पर गौर कर सकते हैं -
> मुंबई स्थिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज NSE ने 3 फरवरी के कारोबार के लिए समूह के दो स्टॉक - अडानी पोर्ट्स और अंबुजा सीमेंट्स को F and O बैन लिस्ट में डाल दिया था. जब भी किसी स्टॉक में अत्यधिक उतार चढ़ाव का कयास पहले ही लग जाता है, तब स्टॉक एक्सचेंज उसे फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स बैन लिस्ट में डालता है. और तब शेयर का लेनदेन संबंधित स्टॉक एक्सचेंज पर नहीं किया जा सकता. दर्शकों की जानकारी के लिए बता दें, मई 2022 से अबुंजा सीमेंट्स का साढ़े 61 फीसदी मालिकाना हक अडानी समूह के पास है.
> 3 फरवरी से ही NSE ने अडानी के मुख्य शेयर - अडानी एंटरप्राइज़ेस समेत अडानी पोर्ट्स, अडानी SEZ और अंबुजा सीमेंट्स को अपने additional surveillance measure' framework में डाल दिया है. ये भी निवेशकों के हितों में लिया गया फैसला होता है. निवेशक इस फ्रेमवर्क में डाले गए शेयर्स को खरीदते-बेचते वक्त अतिरिक्त सतर्कता का पालन करते हैं और इनपर अतिरिक्त नियम भी लागू होते हैं.
> अडानी समूह में हलचल पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों की भी नज़र है. S&P Dow Jones Indices ने 2 फरवरी को ही ऐलान कर दिया था कि वो अडानी एंटरप्राइज़ेस को 7 फरवरी से अपने सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स से बाहर कर रहा है. अमेरिका के न्यू-यॉर्क स्थित S&P अंतर्राष्ट्रीय शेयर बाज़ार में एक बहुत बड़ा नाम है. ये अपने आप में कोई स्टॉक एक्चेंज नहीं है. ये लिस्टेड कंपनियों को प्रदर्शन के आधार पर कैटेगरी में बांटता है और कई इंडेक्स बनाता है. ये इंडेक्स बताता है कि चुनी हुई कंपनियां सामूहिक रूप से कैसा प्रदर्शन कर रही हैं. निवेशक इन इंडेक्स को बड़े ध्यान से देखते हैं. सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स से बाहर होने का मतलब ये हुआ, कि जो निवेशक पर्यावरण और सतत विकास और कॉर्पोरेट गवर्नेंस जैसे विषयों में दिलचस्पी रखते हैं, वो संबंधित स्टॉक को खरीदने से पहले थोड़ा और सोचेंगे.
इन्हीं सारी बातों के आलोक में उस कंपनी को नुकसान हो रहा है, जिसकी बात आज हमें करनी है. भारतीय जीवन बीमा निगम, LIC. कंपनी बीमा के खरीदारों से वादा करती है, कि वो जिंदगी के साथ भी है, और जिंदगी के बाद भी। टैगलाइन है - योगक्षेमं वहाम्यहम्. संस्कृत के इन दो शब्दों का मतलब - आपका कल्याण हमारी जिम्मेदारी। एलआईसी की वेबसाइट कहती है कि उससे 22 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं. माने लोग उसकी टैगलाइन पर भरोसा करते हैं. हम अपने पिछले एपिसोड्स में LIC के नुकसान की थोड़ी चर्चा कर चुके हैं. अब आगे की कहानी पढिए.
LIC के शेयर 25 जनवरी, माने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से ही टूट रहे थे, लेकिन असली नुकसान की शुरुआत हुई आम बजट वाले दिन से. तो क्या LIC ने अडानी समूह में निवेश करके आम लोगों का पैसा डुबा दिया? इस सवाल पर चलने से पहले जानना होगा कि कंपनी ने अडानी ग्रुप में कितना पैसा लगा रखा है ?
LIC ने 30 जनवरी को ट्वीट करके बताया कि 31 दिसंबर 2022 तक अडानी ग्रुप के बॉन्ड और इक्विटी में उनके 35 हजार 917 करोड़ रुपए लगे थे. LIC की कुल मार्केट वैल्यू 41 लाख 66 हजार करोड़ रुपये है. मतलब ये कि अडानी समूह में किया गया निवेश उसकी कुल कीमत का करीब 1 फीसदी ही है. LIC ने अपने स्टेटमेंट में आगे लिखा- अडानी समूह की सभी कंपनियों में पिछले कई वर्षों में खरीदी गई इक्विटी का कुल क्रय मूल्य 30 हजार 127 करोड़ रुपये है. जिसका बाजार मूल्य 27 जनवरी को शेयर मार्केट बंद होने के वक्त 56 हजार 142 करोड़ रुपये था. मतलब LIC का कहना है कि अडानी के शेयर खरीद कर वो करीब 26 हजार करोड़ रुपये फायदे में है. ये आकंड़े 27 जनवरी तक के थे. इसके आगे शुरू होता है नुकसान का दौर. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अडानी समूह में LIC का निवेश मूल्य 24 जनवरी को 81 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा था, जो 2 फरवरी यानी गुरुवार को 43 हजार करोड़ रुपये ही रह गया. यानी ये बात सत्य है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद LIC को जबरदस्त नुकसान हुआ है. लेकिन ये दावा तो बिलकुल निराधार है कि अडानी में पैसे लगाकर LIC डूबने की कगार पर है. क्योंकि हमने आपको पहले ही बताया कि LIC की वैल्यू 41 लाख करोड़ से ज्यादा है जो अडानी की कुल संपत्ति करीब 5 गुना ज्यादा है.
हिंडनबर्ग की रिपोर्टे के बाद जब अडानी समूह गोते खाने लगा, उस नुकसान के बीच भी LIC ने समूह के FPO खरीदने में 300 रुपये रुपये खर्च किए. हालांकि बाद में अडानी ने अपने FPO वापस लेकर पैसे लौटाने की बात कही. LIC के बाद अब हम बैंकों की बात कर लेते हैं. जैसा कि हमने आपको 2 फरवरी के शो में भी बताया था कि RBI ने देश के तमाम बैकों से अडानी को दिए कर्ज का जानकारी मांग लगी है. न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि RBI ने देश की सभी बैंकों को निर्देश जारी कर कहा है कि अडानी ग्रुप को कब और कितना कर्ज दिया गया इसकी लेखा-जोखा दिया जाए। इन्वेस्टमेंट फर्म CLSA की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी ग्रुप की पांच टॉप कंपनीज़ - अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर, अडानी ग्रीन और अडानी ट्रांसमिशन पर 2 लाख 1 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है. दावा किया जा रहा है कि इस कर्ज का कुल 38% यानी 80 हज़ार करोड़ रुपए भारतीय बैंक्स ने दिए हैं.
इस पर PNB ने बताया कि उन्होंने अडानी को 7 हजार करोड़ रुपए का कर्ज दिया है और उनकी अडानी ग्रुप की ऐक्टिविटीज़ पर पैनी नजर है. हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब नैशनल बैंक के एमडी अतुल कुमार गोयल ने कहा कि हमने जो भी कर्ज दिया है वो नकदी में है. कुल कर्ज में 42 करोड़ का इनवेस्टमेंट है और बाकी लोन है। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI ने भी कहा है कि वो अडानी समूह को दिए लोन को लेकर फिलहाल चिंतिंत नहीं है. क्योंकि उसने सिर्फ 27 हज़ार करोड़ का कर्ज़ दिया है. सिर्फ से चिंतित मत होइए, SBI के लिए ये रकम बहुत बड़ी नहीं है. टाइम्स इंटरनेट की की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेट बैंक के कॉर्पोरेट बैंकिंग के MD स्वामीनाथन जे ने कहा कि फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं हैं जिसकी वजह से अडानी समूह को दिए कर्ज को लेकर हमें चिंता करनी पड़े. उन्हें जो कर्ज दिया गया है, वो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सीमा के अंदर ही है. उस कर्ज को सुरक्षित रखने के लिए सभी जरूरी नियमों का पालन किया गया है. अब SBI के चेयरमैन दिनेश खरा ने भी कह दिया है कि अडानी समूह ने अब तक किस्तें तय मियाद में चुकाई हैं. माने रिकॉर्ड अच्छा है.
बिजनेस सेक्टर से चलते हैं देश के पॉलिटिकल सेक्टर की ओर. अडानी ग्रुप के खिलाफ लगे धोखाधड़ी के आरोपों पर विपक्ष लगातार हमलावर है. दर्शक जानते ही हैं कि बजट सत्र चल रहा है. आज चौथा दिन था. विपक्षी दलों ने आज भी हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों की जांच और सदन में चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया. नतीजा क्या हुआ. वही जो कल हुआ था. संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही 06 फरवरी तक स्थगित कर दी गई. सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले 16 पार्टियों के सांसदों की बैठक भी हुई थी.
फिलहाल अडानी ग्रुप पर लग रहे आरोपों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है. नया आरोप लगाया है टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने. उन्होंने अडानी के परिवार से SEBI यानी प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के अधिकारी के बीच रिश्ते का आरोप लगाया है. 03 फरवरी की सुबह महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर कहा,
कुल जमा बात यही है कि हिंडनबर्ग से शुरू हुई कहानी का सार साख और भरोसे से जुड़े सवालों में है. साख सिर्फ अडानी की ही नहीं, LIC जैसी सरकारी कंपनियों की भी. और भारत सरकार की, जिसके पास इन कंपनियों का स्वामित्व है. हम वही बात दोहराएंगे, जो हमने 2 फरवरी को कही थी. नियामक संस्थाएं जितनी जल्दी स्थिति को साफ करें, उतना बेहतर.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: क्या मोदी सरकार अडानी पर JPC जांच बैठाकर सच्चाई जनता के सामने लाएगी?

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