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RAU'S IAS कोचिंग में 3 स्टूडेंट्स की जान नहीं जाती, अगर इस छात्र की बात सुन ली गई होती

एक छात्र ने बताया है कि उसने RAU'S IAS कोचिंग सेंटर की कुछ रोज पहले ही शिकायत की थी. छात्र ने शिकायत में क्या-क्या बताया था? शिकायत पर उसे क्या जवाब मिला था?

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अभय शर्मा
| पंकज जैन
29 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 29 जुलाई 2024, 11:48 AM IST)
rau ias coaching Months before student complaint
सब बदल गया होता अगर एक्शन हो जाता! | फोटो: आजतक
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दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित RAU'S IAS कोचिंग सेंटर में 27 जुलाई की शाम एक दुखद हादसा हुआ, जिसमें दो छात्राओं और एक छात्र की जान चली गई. बाहर सड़क पर बारिश का पानी जमा था, जो कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बनी लाइब्रेरी भर गया. हादसे के वक्त लाइब्रेरी में उपस्थित 30 छात्रों में से 27 बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि तीन वहीं फंस गए. अब इस मामले में एक नई जानकारी सामने आई है. एक छात्र ने दावा किया है कि उसने RAU'S IAS कोचिंग सेंटर की कुछ रोज पहले ही शिकायत की थी, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया.

इंडिया टुडे से जुड़े पंकज जैन से मिली जानकारी के मुताबिक UPSC की तैयारी कर रहे छात्र किशोर सिंह कुशवाहा ने 26 जून, 2024 को केंद्र और दिल्ली सरकार को पब्लिक ग्रीवेंस पोर्टल के जरिए मामले की शिकायत भेजी थी. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि RAU'S IAS कोचिंग के बेसमेंट में बिना NOC के क्लास चलाई जा रही हैं. बेसमेंट में छात्रों को बिठाकर टेस्ट भी लिए जाते हैं. इस शिकायत में किशोर ने किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना भी जताई थी.

दिल्ली में ही UPSC की तैयारी कर रहे किशोर सिंह कुशवाहा ने बताया,

'मैंने 26 जून, 2024 को RAU'S IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट को लेकर शिकायत की थी. पब्लिक ग्रीवेंस पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार और राज्य सरकार को बताया था कि ओल्ड राजेंद्र नगर और साउथ पटेल नगर में लाइब्रेरी और कोचिंग बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं. मैंने राव कोचिंग सेंटर को लेकर बताया था कि इसके बेसमेंट में दुर्घटना होने की संभावना लग रही है. इस तरह की घटनाओं के लिए पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की है. सरकार को उचित कदम उठाना चाहिए और ऐसे संचालकों पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.'

किशोर के बताया कि उन्होंने सिर्फ शिकायत ही नहीं की, बल्कि 15 जुलाई 2024 और फिर 22 जुलाई 2024 को अपनी शिकायत का रिमाइंडर भी पोर्टल पर भेजा. इसमें उन्होंने बताया कि ये एक बहुत जरूरी मुद्दा है और इस पर तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है.

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किशोर कुशवाहा के मुताबिक अगर सरकार और प्रशासन ने उनकी शिकायत पर ध्यान दिया होता, तो ये घटना शायद घटित न होती और श्रेया यादव, तान्या सोनी और नेविन डाल्विन आज जीवित होते.

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