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लड़की ने कहा, ऑक्सफोर्ड 'हिंदू प्रेसिडेंट' के लिए तैयार नहीं था, लोगों ने कहा, दीदी झूठ बोल रही हैं

ऑक्सफोर्ड में छात्र संघ अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं रश्मि सामंत, लेकिन ऐसा क्या हुआ था कि एक ही हफ्ते के अंदर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था. किताब आई है तो फिर से चर्चा हो रही है.

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16 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 16 अगस्त 2023, 05:13 PM IST)
 Rashmi Samant book A Hindu in Oxford
2023 में रश्मि सामंत की किताब आई है, जो कि ऑक्सफोर्ड में उनके अनुभवों पर आधारित है. (फाइल फोटो: आजतक)
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मार्च 2020 में, भारत के पश्चिमी तट पर उडुपी में रहने वाली एक लड़की खुशी से झूम उठती है कि उसका एक सपना पूरा होने जा रहा है- उसे मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का मेल आता है कि उसे मास्टर ऑफ साइंस इन एनर्जी सिस्टम में दाखिला मिल गया है.

आंखों में चमक लिए वो COVID-19 के अनिश्चित समय में ऑक्सफोर्ड जाती है और अपना कोर्स शुरू करती है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए खड़ी होती है और चुनाव जीत जाती है. ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट्स यूनियन की ‘पहली हिंदू अध्यक्ष’ बनती है. लेकिन उस पर नस्लवाद, यहूदी-विरोध और ट्रांसफ़ोबिया के आरोप लगते हैं. उसे लगातार नफरत भरे मेल और धमकी मिलती है.

इन परिस्थितियों में भी वो लड़की कैसे आगे बढ़ती है?

इस लड़की की कहानी A Hindu in Oxford नाम की किताब में बताई गई है. इस किताब को रश्मि सामंत ने लिखा है और 'वो लड़की' भी रश्मि सामंत खुद हैं. रश्मि सामंत ने अपनी किताब में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुभव बताए हैं. किताब में रश्मि सामंत ने आरोप लगाया है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वो नस्लभेद का शिकार हुईं. उनके मुताबिक, ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन तब ‘एक हिंदू प्रेसिडेंट के लिए तैयार नहीं’ था. 

लेकिन रश्मि सामंत की इस किताब पर कई लोग आपत्ति भी जता रहे हैं. उनका कहना है कि रश्मि के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ था, बल्कि सोशल मीडिया पर नस्लवादी पोस्ट के कारण रश्मि को तब इस्तीफा देना पड़ा था. और इस दावे के पक्ष में सबसे दमदार तर्क यही है कि रश्मि सामंत के बाद एक भारतीय हिंदू लड़की ही अध्यक्ष बनी थी - अन्वी भूटानी. 

रश्मि की कहानी झूठी - छात्रसंघ की हिंदू अध्यक्ष

रश्मि के दावों पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया अन्वी भूटानी की ओर से आई है. अन्वी एक पत्रकार हैं. जब रश्मि सामंत ने इस्तीफा दिया था, तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र संघ का चुनाव दोबारा हुआ, जो अन्वी ने जीता. जब रश्मि ने अपनी किताब के प्रचार के लिए एक ट्वीट किया, तो अन्वी ने उसे कोट रीट्वीट करते हुए लिखा,

"जब रश्मि ने इस्तीफा दिया, तो मैंने चुनाव लड़ा, जीता और एक भारतीय हिंदू होते हुए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की छात्र संघ अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा किया.

ऑक्सफोर्ड में नस्लभेद होता है, लेकिन रश्मि को उनकी जाति, धर्म या राष्ट्रीयता के कारण परेशान नहीं किया गया. उनका उपन्यास एक झूठी कहानी का प्रचार करता है."

सोशल मीडिया पर कई लोग सामंत पर जानबूझकर गलत सूचना फैलाने और विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगा रहे हैं. वहीं कई यूजर्स रश्मि सामंत के समर्थन में भी ट्वीट कर रहे हैं. 

ऑक्सफोर्ड में रश्मि सामंत पर क्या विवाद हुआ था?

रश्मि सामंत का नाम साल 2021 में खबरों में आया था. फरवरी 2021 में वो ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष चुनी गई थीं. सुर्खियां बनीं क्योंकि ये पद हासिल करने वाली रश्मि पहली भारतीय महिला थीं. लेकिन एक ही हफ्ते के अंदर रश्मि सामंत को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था. सामंत के कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट सामने आए थे, जिन्हें "नस्लभेदी" और "असंवेदनशील" करार दिया गया था.

जैसे, साल 2017 के एक पोस्ट में रश्मि ने मलेशिया के एक बौद्ध मंदिर के बाहर खड़े होकर तस्वीर खिंचवाई, लेकिन कैप्शन में ‘चिंग चांग’ लिखा था. यूनिवर्सिटी के चीनी और दूसरे ईस्ट-एशियाई छात्रों ने 'चिंग चांग' कैप्शन पर आपत्ति जताई थी. 'चिंग चांग' चीनी भाषा, चीनी लोग और दूसरे पूर्वी एशियाई लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए एक जातीय गाली की तरह है. रश्मि सामंत के और भी कई पोस्ट पर आपत्ति जताई गई थी. हालांकि, वो सभी आपत्तिजनक पोस्ट इलेक्शन के पहले के थे.

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद रश्मि ने एक ओपन लेटर लिखा था कि अगर किसी को भी उनके पोस्ट से तकलीफ पहुंची है, तो वो माफी मांगती हैं. उन्होंने कहा था कि वो हर किसी का सम्मान करती हैं. हालांकि, उन्हें अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा था. रश्मि सामंत का इस्तीफा स्वीकार किए जाने की जानकारी देते हुए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन की ओर से कहा गया था कि नस्लभेद से जुड़े मसले पर वह जीरो टॉलरेंस नीति को अपनाते हैं.

जिस तरह रश्मि का ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन का अध्यक्ष बनना खबरों में छाया था. उसी तरह उनका इस्तीफा देना भी सुर्खियां बना. इस तरह की बातें हुईं कि ‘हिंदू के नाते रश्मि को इस्तीफा देने के लिए मजबूर’ किया गया. मार्च 2021 में राज्यसभा में BJP के अश्विनी वैष्णव ने भी रश्मि सामंत के इस्तीफे का मुद्दा उठाया था. तब इस पर विदेश मंत्री जयशंकर ने जवाब भी दिया था. उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन में नस्लभेद की कथित घटनाओं को जरूरत पड़ने पर भारत ब्रिटेन के समक्ष उठाएगा.

ऑक्सफोर्ड इंडिया सोसाइटी ने क्या कहा था?

इन सबके बीच ऑक्सफोर्ड इंडिया सोसाइटी, ऑक्सफोर्ड हिंदू सोसाइटी और ऑक्सफोर्ड साउथ एशियन सोसाइटी ने एक बयान जारी किया था. इसमें कहा गया था कि रश्मि सामंत के इस्तीफे का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि वह भारतीय हैं या हिंदू हैं. बयान में कहा गया था,

"हम सभी तरह के भेदभाव की निंदा करते हैं. चाहे वो नस्ल, धर्म, राष्ट्रीय मूल, जाति, लिंग, सेक्शुअल ओरिएंटेशन और जेंडर के आधार पर हो या किसी भी दूसरी बात पर आधारित हो. हम मानते हैं कि यूनिवर्सिटी में संस्थागत नस्लवाद की संस्कृति प्रचलित है और कई लोग इसका सामना करते हैं. इसलिए, काफी सावधानी के साथ, हम ये साफ करना चाहते हैं कि रश्मि सामंत को इस कारण से इस्तीफा नहीं देना पड़ा, और इससे हमारा मतलब ये है कि न तो उनकी राष्ट्रीयता और न ही उनके धर्म के कारण उनके इस्तीफे की मांग हुई."

ये सब साल 2021 में हुआ था. 2023 में रश्मि सामंत की किताब आई है, जो कि ऑक्सफोर्ड में उनके अनुभवों पर आधारित है. इसलिए एक बार फिर से इस पूरी घटना पर चर्चा हो रही है.

ये भी पढ़ें- क्या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट रश्मि सामंत को हटाने की साजिश रची गई?

वीडियो: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष रश्मि सामंत ने किए चौंकाने वाले खुलासे!

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