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राजीव गांधी के हत्यारे फिर जाएंगे जेल? रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस

मोदी सरकार पहले ही रिहाई के खिलाफ SC में याचिका दायर कर चुकी है

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Rajiv Gandhi assasination
पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन (बाएं) (फोटो- पीटीआई)
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साकेत आनंद
21 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 21 नवंबर 2022, 08:44 PM IST)
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) हत्याकांड के 6 दोषियों को रिहा करने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस (Congress) पार्टी सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी. 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी 6 दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था. सभी दोषी उम्रकैद की सजा काट रहे थे. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी इसी हफ्ते पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी.

सरकार ने भी दाखिल की याचिका

इससे पहले 17 नवंबर को केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी. सरकार की तरफ से कहा गया कि इस मामले में उसे अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया. ये भी कहा कि इस मामले की सुनवाई प्रक्रिया में चूक हुई है, जिसकी वजह से इसमें सरकार की भागीदारी ना के बराबर रही. केंद्र सरकार ने कहा है कि किसी दूसरे देश के आतंकवादियों की सजा माफ करने का अंतरराष्ट्रीय असर होगा.

गांधी परिवार ने भी कई बार राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को माफ करने की बात कही. लेकिन, कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वो रिहाई के इस फैसले को पूरी तरह सही नहीं मानती.

सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर को अपने आदेश में कहा था कि अगर इन दोषियों पर कोई और केस नहीं है तो उन्हें रिहा कर दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोषियों ने 30 साल से ज्यादा का वक्त जेल में काटा है और सजा के दौरान उनका बर्ताव ठीक था. आदेश के बाद नलिनी श्रीहरन, रविचंद्रन, मुरुगन, संथन, जयकुमार, और रॉबर्ट पॉयस भी जेल से बाहर आ गए. इससे पहले इस साल मई में पेरारिवलन बाहर आए थे.

राजीव गांधी हत्याकांड

21 मई 1991 को एक चुनावी रैली के दौरान तमिलनाडु में एक आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. उन्हें एक महिला ने माला पहनाई थी, इसके बाद धमाका हो गया. हमले में 18 लोगों की मौत हुई थी. इस मामले में कुल 41 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इनमें से 12 लोगों की मौत हो गई और तीन फरार हो गए. बाकी 26 पकड़े गए. इनमें श्रीलंकाई और भारतीय नागरिक थे. आरोपियों पर टाडा कानून के तहत कार्रवाई की गई. सात साल तक चली कानूनी कार्यवाही के बाद 28 जनवरी 1998 को टाडा कोर्ट ने हजार पन्नों का फैसला सुनाया. इसमें सभी 26 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई थी.

एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने इस पूरे फैसले को ही पलट दिया. कोर्ट ने 26 में से 19 दोषियों को रिहा कर दिया. सिर्फ 7 दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा गया. बाद में इनकी सजा को भी बदलकर उम्रकैद कर दिया गया.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को किन तथ्यों के आधार पर छोड़ा गया?

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