राजस्थान: कांग्रेस विधायक ने दिया इस्तीफा, प्रशासन पर आवाज दबाने का आरोप लगाया
गणेश घोगरा पिछले साल मार्च में विधानसभा के भीतर एक बयान देने के कारण चर्चा में आए थे. उन्होंने कहा था कि हम आदिवासी खुद को हिंदू नहीं मानते हैं.

राजस्थान के डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोगरा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. घोगरा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपना इस्तीफा भेजते हुए कई आरोप लगाए. ये आरोप स्थानीय प्रशासन पर हैं. उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं की आवाज उठाने पर उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है. गणेश घोगरा राजस्थान यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं. यहां ये साफ कर दें कि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है.
घोगरा को सीएम गहलोत का करीबी भी माना जाता है. उन्होंने बुधवार, 18 मई को विधायक पद से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया,
"खेद के साथ बता रहा हूं कि विधायक और यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष होने के बावजूद मेरी बातों को अनदेखा किया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन में तैनात अधिकारी भी मेरी बात सुनने को तैयार नहीं हैं. मेरे विधानसभा क्षेत्र की जनता की समस्याओं की आवाज उठाने पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है. इसलिए मैं डूंगरपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना इस्तीफा भेज रहा हूं."
गणेश घोगरा ने अपने इस्तीफे की कॉपी सीएम अशोक गहलोत के साथ-साथ कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को भी भेजी है. घोगरा ने ये कदम अपने खिलाफ दर्ज हुई एक FIR के बाद उठाया है. ये घटना भूमि आवंटन को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ विवाद का है.
एसडीएम को बंधक बनाने का आरोप!राजस्थान पत्रिका की खबर के मुताबिक, 17 मई को सुरपुर पंचायत में प्रशासन ने एक शिविर का आयोजन किया था. स्थानीय लोगों ने आवेदन देने के बावजूद भूमि आवंटन पट्टा नहीं मिलने पर प्रशासन के खिलाफ हंगामा किया. बात इतनी बढ़ गई कि नाराज लोगों ने एसडीएम मणिलाल तिरगर और अन्य अधिकारियों को पंचायत भवन में बंद कर ताला लगा दिया. करीब दो-ढाई घंटे बाद पुलिस ने अधिकारियों को वहां से बाहर निकाला.
जहां ये पूरी घटना हुई, वहां विधायक गणेश घोगरा भी मौजूद थे. उन पर लोगों को उकसाने का आरोप लगा. इसके बाद तहसीलदार और अन्य अधिकारियों ने सदर थाने पहुंचे. और विधायक सहित कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज करा दिया.
बयान के कारण चर्चा में आए थे घोगराघोगरा के खिलाफ एफआईआर पर प्रतापगढ़ से कांग्रेस विधायक रामलाल मीणा ने सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि किसी के इशारे पर उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है. मीणा ने ट्विटर पर लिखा,
"डूंगरपुर विधायक गणेश जी घोगरा वागड़ के एक तेज तर्रार नेता हैं. उनकी आवाज को दबाना जनता की आवाज को दबाना है! विधायक हमेशा ये चाहता है कि जनता का काम समय पर हो! लापरवाही पर क्रोध तो आता है!"
गणेश घोगरा पिछले साल मार्च में विधानसभा के भीतर एक बयान देने के कारण चर्चा में आए थे. उन्होंने कहा था कि हम आदिवासी खुद को हिंदू नहीं मानते हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि आदिवासियों की संस्कृति अलग है लेकिन उन पर हिंदू धर्म को थोपा जा रहा है. उन्होंने यहां तक कहा था कि सरकार के भीतर आज भी हर विभाग गुरु द्रोणाचार्य बैठे हैं जो एकलव्य को आगे नहीं बढ़ना देना चाहते हैं.
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