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राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठा रहे वकील को HC ने लताड़ा, कहा- "बहुत हो गया..."

Rahul Gandhi Citizenship: याचिका की सुनवाई जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने की. लेकिन याचिकाकर्ता के वकील की लगातार दलीलों पर आपत्ति जताने के बाद बेंच को उठना पड़ा.

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Rahul Gandhi citizenship row (Photo-PTI)
राहुल गांधी की नागरिकता का मामला. (फोटो-पीटीआई)
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निहारिका यादव
1 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 05:51 PM IST)
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कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने एडवोकेट अशोक पांडे के जरिए इलाहबाद हाई कोर्ट में 21 जून को एक PIL (जनहित याचिका) दायर की थी. इसमें कहा गया कि रायबरेली से कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द की जानी चाहिए, क्योंकि वो भारत के नागरिक नहीं, ब्रिटेन के नागरिक हैं. 1 जुलाई को हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. हालांकि इससे पहले याचिकाकर्ता के वकील और सुनवाई करने वाले जजों के बीच तीखी बहस देखने को मिली.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जनहित याचिका की सुनवाई जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने की. लेकिन याचिकाकर्ता के वकील की लगातार दलीलों पर आपत्ति जताने के बाद बेंच को उठना पड़ा. मामला तब और बढ़ गया जब वकील अशोक पांडे ने मामले पर बहस जारी रखने और दलीलें प्रस्तुत करने पर जोर दिया. इस पर पीठ ने मामले पर आगे की सुनवाई करने से इनकार करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया.

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रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता के वकील और याचिकाकर्ता को करीब 1:30 घंटे तक विस्तार से सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह मामले को आदेश के लिए सुरक्षित रख रही है. इस पर अशोक पांडे ने कहा कि उनके पास इस केस पर 'बहुत सारी दलीलें' हैं. जब खंडपीठ ने कहा कि उसने उन्हें और याचिकाकर्ता को अपनी दलीलें पेश करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया है तो एडवोकेट पांडे ने कहा, 

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इस पर पीठ ने जवाब देते हुए कहा कि उन मामलों की सुनवाई 20 दिनों तक होती है, जिनमें दी गई दलीलें योग्य होती हैं. और एडवोकेट पांडे द्वारा दी गई दलीलें अदालत द्वारा पहले ही सुनी और विचार की जा चुकी हैं. बेंच ने कहा, 

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हालांकि, न्यायालय की टिप्पणियों के जवाब में एडवोकेट पांडे ने पीठ से 'व्यक्तिगत न होने' का आग्रह किया.

कोर्ट की इस सुनवाई में नाटकीय घटनाक्रम तब आया जब पीठ ने टिप्पणी की,

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इसके बाद जब जज कोर्ट रूम से बाहर जा रहे थे, तभी एडवोकेट पांडे ने टिप्पणी की:

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रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई अधिवक्ता अशोक पांडे के यह कहने के साथ शुरू हुई कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं. उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि राहुल ने दूसरे देश (ब्रिटेन) की नागरिकता हासिल कर ली है, इसलिए वह भारत के नागरिक नहीं रहे और इस प्रकार, लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं. 

उन्होंने पीठ को यह भी बताया कि गृह मंत्रालय ने 2019 में राहुल गांधी को नोटिस जारी कर उनकी नागरिकता के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था. वकील के मुताबिक हालांकि, पांच साल बाद भी राहुल गांधी ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं की है. 

मामले में चुनाव आयोग के वकील भी पेश हुए थे. उन्होंने अशोक पांडे की इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा, 

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इस पर जब पीठ ने वकील अशोक पांडे से पूछा कि उन्हें वे दस्तावेज़ कहां से मिले जिनके आधार पर वह दावा कर रहे हैं कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने उन दस्तावेज़ों को ‘इंटरनेट’ से डाउनलोड किया है. हालांकि, वह उस साइट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे सके जहां से उन्होंने जनहित याचिका में लगाए दस्तावेज़ प्राप्त किए हैं.

बाद में याचिकाकर्ता विग्नेश ने वेबसाइट की जानकारी दी. उन्होंने कहा, 

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इस पर, पीठ ने उनसे संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने को कहा, जिनके पास किसी की नागरिकता निर्धारित करने की शक्ति है. 

हालांकि इसके बाद भी याचिकाकर्ता के वकील नहीं माने. उन्होंने यह कहकर अदालत को फिर से संबोधित करने का प्रयास किया कि उन्हें मामले पर और बोलने और बहस करने की अनुमति दी जानी चाहिए. लेकिन इस बार अदालत ने उन्हें फटकार लगाई और कहा कि उन्हें अदालत की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए. इसके बाद भी जब वकील पांडे बहस करते रहे तो बेंच ने उठने का फैसला किया.

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