राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठा रहे वकील को HC ने लताड़ा, कहा- "बहुत हो गया..."
Rahul Gandhi Citizenship: याचिका की सुनवाई जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने की. लेकिन याचिकाकर्ता के वकील की लगातार दलीलों पर आपत्ति जताने के बाद बेंच को उठना पड़ा.

कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने एडवोकेट अशोक पांडे के जरिए इलाहबाद हाई कोर्ट में 21 जून को एक PIL (जनहित याचिका) दायर की थी. इसमें कहा गया कि रायबरेली से कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द की जानी चाहिए, क्योंकि वो भारत के नागरिक नहीं, ब्रिटेन के नागरिक हैं. 1 जुलाई को हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. हालांकि इससे पहले याचिकाकर्ता के वकील और सुनवाई करने वाले जजों के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जनहित याचिका की सुनवाई जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने की. लेकिन याचिकाकर्ता के वकील की लगातार दलीलों पर आपत्ति जताने के बाद बेंच को उठना पड़ा. मामला तब और बढ़ गया जब वकील अशोक पांडे ने मामले पर बहस जारी रखने और दलीलें प्रस्तुत करने पर जोर दिया. इस पर पीठ ने मामले पर आगे की सुनवाई करने से इनकार करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया.
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रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता के वकील और याचिकाकर्ता को करीब 1:30 घंटे तक विस्तार से सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह मामले को आदेश के लिए सुरक्षित रख रही है. इस पर अशोक पांडे ने कहा कि उनके पास इस केस पर 'बहुत सारी दलीलें' हैं. जब खंडपीठ ने कहा कि उसने उन्हें और याचिकाकर्ता को अपनी दलीलें पेश करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया है तो एडवोकेट पांडे ने कहा,
इस पर पीठ ने जवाब देते हुए कहा कि उन मामलों की सुनवाई 20 दिनों तक होती है, जिनमें दी गई दलीलें योग्य होती हैं. और एडवोकेट पांडे द्वारा दी गई दलीलें अदालत द्वारा पहले ही सुनी और विचार की जा चुकी हैं. बेंच ने कहा,
हालांकि, न्यायालय की टिप्पणियों के जवाब में एडवोकेट पांडे ने पीठ से 'व्यक्तिगत न होने' का आग्रह किया.
कोर्ट की इस सुनवाई में नाटकीय घटनाक्रम तब आया जब पीठ ने टिप्पणी की,

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