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'वो घर से बाहर निकली तो वही होगा, जो उस रात हुआ था'

यह राधिका आप्टे का मौसम है. उनकी नई फिल्म 'फोबिया' का ट्रेलर आ गया है.

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मियां मिहिर
26 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 26 अप्रैल 2016, 03:44 PM IST)
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कुल जमा 30 साल उमर. 10 साल का फिल्मी करियर. अौर 7 भाषाअों की फिल्मों में काम करने का अनुभव. 

उस पर नियमित रंगमंच अलग से. वो भी कई भाषाअों में.

यह राधिका आप्टे का मौसम है.

पिछले साल 'बदलापुर' में उनका छोटा लेकिन धारदार रोल अब भी ताज़ा है. 'हंटर' जैसी मुश्किल फिल्म को भी उन्होंने तन्मयता के साथ निभाया. अौर उनकी शॉर्ट फ़िल्म 'अहल्या' ने चौतरफा वाहवाही बटोरी. आखिर भारतीय सिनेमा के दिग्गज सौमित्र चटर्जी के साथ फ्रेम शेयर करना बच्चों का खेल नहीं.

अौर इसी हफ्ते उन्होंने ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में इंटरनेशनल नैरेटिव फीचर कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता है. यह कुछ अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निर्देशकों द्वारा बनाई शॉर्ट फिल्मों को मिलाकर बनी बड़ी खास फीचर फिल्म है 'मैडले'. इसके अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित हिस्से 'क्लीन शेवन' के लिए राधिका को यह पुरस्कार मिला. यही वो फिल्म थी जिसका न्यूड शॉट वाला कथित हिस्सा पिछले साल इंटरनेट पर लीक हो गया था. राधिका ने इस पुरस्कार के लिए अपनी प्रतिद्वंद्वी फिल्मों की नायिकाअों को तो हराया ही, अपनी ही फ़िल्म की अन्य लीडिंग लेडीज़ को भी दौड़ में पीछे छोड़ा.

फिर पिछले हफ्ते 'अनब्लश्ड' वीडियो आया. खूब वायरल हुआ. 'ब्लश' का वीडियो, जिसमें राधिका खूबसूरती के पुराने मानदंडों को बदल देने का मैसेज दे रही हैं अपनी युवा दोस्तों को −

लड़कियों, अपनी जिंदगी के छोटे-बड़े हिस्से किराए पर मत देना

अब उनकी नई फिल्म 'फोबिया' का ट्रेलर आया है. साइकोलॉजिकल थ्रिलर है. राधिका यहां यंग आर्टिस्ट महक की भूमिका में हैं. महक यहां अपने ही घर में कैद हैं. वजह, अतीत में घटी यौन हिंसा की एक घटना जिसने उनके मन में पब्लिक प्लेसेस को लेकर आतंक भर दिया है. इस बीमारी का नाम बताया गया है Agoraphobia, जिसमें सार्वजनिक स्थानों अौर खुली जगहों से इंसान बिना वजह घबराने लगता है.

वैसे भारत में जैसा माहौल हमने बनाया है बीते सालों में, तार्किक तो यही है कि देश की हर लड़की पब्लिक प्लेस पर अकेले जाते घबराए. वे नहीं घबरातीं, ये उनकी हिम्मत अौर हौसला है.

लेकिन फिर घर में भी चैन कहां. फ्रिज में रखी बर्फ की ट्रे में से कटी हुई उंगली निकलती है. दीवार से कान लगाअो तो ड्रिल मशीन निकल आती है. सब्जी अौर सलाद काटने के चाकुअों से खून-खराबा हो रहा है. 'रागिनी एमएमएस' के निर्देशक पवन कृपलानी ने यहां भी डोमेस्टिक माहौल में भय की स्थापना कर उसे हमारे शहरी जीवन से खतरे की हद तक करीब ला दिया है. निर्देशक इसे न्यू-एज हॉरर कह रहे हैं.

फिल्म 27 मई को रिलीज़ के लिए तैयार है.

फिल्म का ट्रेलर यहां देखें.

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