'वो खालिस्तान समर्थक नहीं', मां के इस बयान को गलत बताते हुए अमृतपाल ने परिवार को ही चेतावनी दे दी!
खडूर साहिब सीट से सांसद चुने गए अमृतपाल सिंह की मां ने कहा था कि उनका बेटा खालिस्तानी समर्थक नहीं है. अब अमृतपाल ने खत जारी कर कहा है कि अपनी मां के बयान से उनका मन बहुत दुखी हुआ.

खालिस्तान समर्थक और पंजाब की खडूर साहिब सीट से सांसद अमृतपाल सिंह ने 5 जुलाई को लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ ली. शपथ के बाद अमृतपाल की मां बलविंदर कौर का एक बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं के पक्ष में बात करने से अमृतपाल खालिस्तान समर्थक नहीं बन जाते. वो खालिस्तान को सपोर्ट नहीं करते हैं. अपनी मां के इस बयान के बाद अमृतपाल ने 6 जुलाई को X पर एक पोस्ट शेयर किया. उन्होंने एक किस्से का ज़िक्र करते हुए अपने परिवार को ही कड़ी चेतावनी दी है. ये तक कहा है कि अगर उन्हें पंथ और परिवार में से किसी एक को चुनना पड़े तो वो हमेशा पंथ को ही चुनेंगे.
अमृतपाल ने कहा- ‘मां ने अनजाने में बयान दिया होगा’अमृतपाल सिंह ने X पर जारी लेटर में लिखा,
"आज जब मुझे अपनी मां के कल वाले बयान के बारे में पता चला तो मेरा मन बहुत दुखी हुआ. मुझे विश्वास है कि ये बयान उन्होंने अनजाने में दिया होगा. लेकिन फिर भी मेरे परिवार या मेरा समर्थन करने वालों की तरफ से इस तरह का बयान नहीं आना चाहिए.
खालसा राज्य का सपना देखना कोई अपराध नहीं है. ये गर्व की बात है. जिस रास्ते के लिए लाखों सिखों ने अपनी जान कुर्बान की है, उससे पीछे हटने का हम सपने में भी नहीं सोच सकते. मैंने कई बार मंच से बोलते हुए कहा है, अगर मुझे पंथ और परिवार में से किसी एक को चुनना पड़े तो मैं हमेशा पंथ को ही चुनूंगा.
इस संबंध में इतिहास का वो हिस्सा बिल्कुल सही बैठता है. जब बंदा सिंह बहादुर के साथ सिखों को शहीद किया जा रहा था. तब एक 14 साल के लड़के की मां ने ये कहकर उसे बचाने की कोशिश की कि वो सिख नहीं है. तब लड़के ने कहा, अगर ये महिला दावा करती है कि मैं गुरु का शिष्य नहीं हूं. तो मैं ये घोषणा करता हूं कि वो मेरी मां नहीं है. ये उदाहरण इस घटना के लिए बहुत सख्त है. लेकिन सैद्धांतिक नजरिए से ये समझने योग्य है."
ये भी पढ़ें- अमृतपाल सिंह की रिहाई का मामला कमला हैरिस तक पहुंचा, अमेरिकी-सिख वकील ने किया संपर्क
इसके बाद अमृतपाल ने अपने परिवार को हिदायत देते हुए लिखा,
अमृतपाल सिंह की मां ने कहा क्या था?"मैं अपने परिवार को चेतावनी देता हूं कि वे कभी भी सिख राज्य से समझौता करने के बारे में ना सोचें. और उसके बारे में बोलना तो बहुत दूर की बात है. और सामूहिक दृष्टिकोण से कहें तो ऐसी गलती नहीं की जानी चाहिए. संगत को संबोधित करते समय ऐसी कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए."
अमृतपाल सिंह की मां बलविंदर कौर ने कहा था,
"कोई कुछ भी कहे, वो खालिस्तान समर्थक नहीं है. पंजाब के हक की बात करना, पंजाब के युवाओं को बचाने की बात करने से कोई खालिस्तान समर्थक बना जाता है? जिसने संविधान के दायरे में रहकर चुनाव लड़ा हो उसे खालिस्तान समर्थक नहीं कहा जाना चाहिए. उसने संविधान की शपथ ली है, संविधान के दायरे में रहकर चुनाव लड़ा है. तो फिर इस तरह की तो कोई बात करनी ही नहीं चाहिए."
उधर, तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भी अमृतपाल सिंह के समर्थन में बयान जारी किया है. तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत ने रविवार, 7 जुलाई को असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह के माता-पिता से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब संसद में 'हिंदू राष्ट्र जिंदाबाद' के नारे लगते हैं तो लोगों का सम्मान किया जाता है. लेकिन जब सिख युवा 'सिख राष्ट्र' की बात करते हैं तो उसे गलत कहा जाता है.
तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा,
"यही बदकिस्मती है कि विदेश में तो सिखों को मान-सम्मान मिल रहा है. विदेश की संसदों में सिख जीत रहे हैं, लेकिन भारत में अगर कोई सिख संसद में पहुंच भी जाता है और अगर वो अपनी अलग राय रखता है, तो उस पर NSA लगाकर जेल में बंद कर दिया जाता है. एक तरफ भारतीय संसद में तो 'हिंदू राष्ट्र जिंदाबाद' का नारा लगाया जाता है. ऐसे लोगों को सम्मानित भी किया जाता है. तो जब कोई सिख युवा 'सिख राष्ट्र' की बात करता है तो इसमें गलत क्या है?"
बता दें कि अमृतपाल सिंह को एक कट्टर खालिस्तान समर्थक माना जाता है और वो ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख भी हैं. फिलहाल वो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं. उन्होंने जेल से ही निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ा और पंजाब की खडूर साहिब सीट पर 1.97 लाख वोटों से जीत दर्ज की. अमृतपाल ने कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को हराया था.
वीडियो: एक साल के लिए और बढ़ी अमृतपाल सिंह की NSA हिरासत

