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आदिवासियों के बीच PM मोदी बोले- "विरोधी कोई एक हफ्ता खोजकर बता दें, जब यहां विकास कार्य न हुए हों"

'हमने आपका ख्याल रखा, जिन्होंने लंबे समय तक सरकार चलाई, उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया'

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10 जून 2022 (अपडेटेड: 20 जून 2022, 08:45 PM IST)
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PM मोदी ने कहा कि बीते 8 वर्षों में सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए हमारी सरकार ने गरीबों की सेवा की | फोटो: आजतक
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गुजरात (Gujarat) का नवसारी (Navsari) जिला. एक आदिवासी बहुल इलाका. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार, 10 जून को यहां 3200 करोड़ रुपए की योजनाओं की शुरुआत की. पीएम मोदी ने एक जनसभा को भी संबोधित किया. जिसमें उन्होंने BJP सरकार द्वारा किए गए काम गिनाए. साथ ही कांग्रेस पार्टी को चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष कोई एक ऐसा हफ्ता खोजकर बता दे, जब यहां कोई विकास कार्य न हुआ हो.

पीएम नरेंद्र मोदी ने नवसारी के आदिवासियों से और क्या कहा-

#मंच पर आने से पहले मुझे विलंब हुआ क्योंकि मैं कुछ आदिवासी भाई बहनों से उनके सुख-दुख की बातें सुन रहा था. उनसे पूछताछ कर रहा था कि सरकार की योजना में जो लाभार्थी थे, उससे उनको क्या लाभ हुआ. जब जनता जनार्दन से इस तरह का संपर्क होता है तो विकास को नई दिशा मिलती है.

#8 साल पहले आपने मुझे राष्ट्र सेवा करने के लिए दिल्ली भेजा था. बीते 8 सालों में हमने विकास के सपने और आकांक्षाओं से करोड़ों नए लोगों, अनेकों नए क्षेत्रों को जोड़ने में सफलता प्राप्त की है.

#आज मुझे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन औए शिलान्यास करने का अवसर मिला. ये सारे प्रोजेक्ट सूरत, तापी, नवसारी और वलसाड सहित दक्षिण गुजरात के करोड़ों साथियों का जीवन आसान बनाएंगे.

#हमारा गरीब, हमारा दलित, वंचित, पिछड़ा वर्ग, आदिवासी महिलाएं, ये सभी अपना पूरा जीवन मूल जरूरतों को पूरा करने में ही बिता देते थे. आजादी के बाद जिन्होंने सबसे अधिक सरकार चलाई, उन्होंने विकास को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया. जिन क्षेत्र, जिन वर्गों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहां उन्होंने विकास किया ही नहीं, क्योंकि यह काम करने के लिए मेहनत ज्यादा पड़ती है.

#आज मुझे इस बात का गौरव हो रहा है कि गुजरात छोड़ने के बाद जिन-जिन लोगों ने गुजरात को संभालने का दायित्व निभाया और आज भूपेंद्र भाई और सीआर पाटिल की जोड़ी जिस उमंग और उत्साह के साथ नया विश्वास जगा रही है, उसी का परिणाम है कि आज मेरे सामने 5 लाख लोगों का विशाल जनसमूह मौजूद है. आज मुझे गर्व हो रहा है कि जो काम मैंने नहीं किया वो भूपेंद्र भाई और सीआर पाटिल कर रहे हैं.

#बीते 2 दशकों में हुआ तेज विकास ही गुजरात का गौरव है. सबका विकास ने यहां नई आकांक्षा पैदा की है. इसी गौरवशाली परंपरा को डबल इंजन की सरकार ईमानदारी से आगे बढ़ा रही है.

#हमारे आदिवासी क्षेत्र के जिन गरीब परिवारों को 8 साल में पक्का आवास मिला, बिजली मिली, शौचालय मिला और गैस कनेक्शन मिले, उनमें से अधिकतर मेरे आदिवासी और दलित भाई-बहन ही हैं.

#बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और हर प्रकार की कनेक्टिविटी के ये प्रोजेक्ट भी विशेष रूप से हमारे आदिवासी क्षेत्रों में हैं. इससे जाहिर है कि ये सुविधाएं रोजगार के अवसरों से जोड़ेंगी.

#बीते 8 वर्षों में सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए हमारी सरकार ने गरीब को मूलभूत सुविधाएं देने और गरीब के कल्याण पर सबसे ज्यादा जोर दिया है.

#2018 में जब इस इलाके को पानी देने की बात मैंने की थी, तब कई लोगों ने कहा था कि मोदी जी ने आकर सपने दिखाने की बात की है, क्योंकि 2019 का लोकसभा का चुनाव आ रहा था, लेकिन आज वह सपना भी पूरा हुआ.

#हम चुनाव जीतने के लिए नहीं, हम इस देश के लोगों का भला करने के लिए आए हैं, चुनाव तो लोग बाद में जितवा ही देते हैं.

#चुनाव का मतलब काम नहीं, चुनौती है. मैं विरोधियों से कहना चाहता हूं कि कोई एक ऐसा हफ्ता खोजकर बता दो, जब यहां कोई विकास कार्य न हुआ हो. हम चुनाव जीतने नहीं आए हैं, लोगों का भला करने आए हैं.

आदिवासी वोटों को लेकर तगड़ी खींचतान

नवसारी में प्रधानमंत्री की इस रैली के जरिए बीजेपी आदिवासी वोट बैंक को अपनी ओर खींचना चाहती है. आजतक से जुड़ीं गोपी घांघर के मुताबिक गुजरात में 15% आदिवासी वोटर हैं. इनका सीधा असर 27 विधानसभा सीटों पर नजर आता है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही इसे अपनी और खींचने के प्रयास में जुटी हैं. इस बार आम आदमी पार्टी भी आदिवासियों की पार्टी बीटीपी के साथ मिलकर कांग्रेस- बीजेपी का खेल बिगाड़ने में जुटी है.

आजतक के मुताबिक गुजरात में आदिवासी वोट बैंक को सालों से कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है. कांग्रेस ने इसी के चलते इस बार चुनाव के बाद आदिवासी नेता सुखराम राठवा को विपक्ष का नेता बनाया था. हाल ही में कांग्रेस में बीटीपी के युवा नेता राजेश वसावा भी शामिल हुए थे.

उधर, बीजेपी ने अपनी नई सरकार में 5 आदिवासी नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी है. साथ में केंद्र सरकार ने सांसद गीताबेन राठवा को BSNL का अध्यक्ष बनाया गया है. यानी सभी पार्टियों के बीच आदिवासियों के वोट पाने के लिए तगड़ी खींचतान चल रही है.

दी लल्लनटॉप शो: मोदी सरकार के 8 सालों में क्या-क्या हुआ? किन मोर्चों पर सफल,कहां फेल?

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