प्रोफेसर का हाथ काटा, दूसरे धर्म के लोगों की हत्या की... PFI बैन का असली कारण सामने आया!
सरकार ने साफ-साफ बताया कि PFI पर बैन क्यों लगाया?

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर पांच साल का बैन लगा दिया गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार, 27 सितंबर को अधिसूचना जारी की थी. इसकी जानकारी बुधवार, 28 सितंबर की सुबह आई तो हंगामा मच गया. तब से एक ही सुर्खी की पट्टी न्यूज चैनलों की स्क्रीन पर तैर रही है- PFI के खिलाफ सरकार का सबसे बड़ा ऐक्शन.
केंद्र सरकार ने केवल PFI को बैन नहीं किया है, बल्कि इससे जुड़े कई संघटनों और संस्थाओं को भी ‘गैरकानूनी’ करार दिया है. इनके नाम हैं -
रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF)
कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI)
ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल (AIIC)
नेशनल कन्फिडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO)
नेशनल वीमन्स फ्रंट (NWF)
जूनियर फ्रंट (JF)
एम्पावर इंडिया फाउंडेशन (EIF)
रिहैब फाउंडेशन केरल (RF).
PFI पर क्या कहती है सरकार की अधिसूचना?अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने PFI और सहयोगी संगठनों के लिए ‘Unlawful Association’ (अवैध संघ या गठजोड़) शब्द का इस्तेमाल कर इनकी गतिविधियों और भूमिकाओं पर गंभीर टिप्पणियां की हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), CBI और राज्यों की पुलिस की हालिया छापेमारी और जांच के आधार पर नोटिफिकेशन जारी करते हुए सरकार ने कहा है,
“जांच में PFI और इसके सहयोगी संगठनों के बीच स्पष्ट संबंध साबित हुआ है. इसके नेता JF, AIIC, NCHRO और NWF की गतिविधियों की निगरानी/समन्वय करते हैं. PFI ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी पहुंच को बढ़ाने के लिए इन सहयोगी संगठनों या संबद्ध संस्थाओं की स्थापना की है. इसका उद्देश्य PFI की सदस्यता, प्रभाव और फंड जुटाने की क्षमता को बढ़ाना है.”
PFI और इसके सहयोगी संगठनों के संबंध को “हब और स्पोक” जैसा बताते हुए मंत्रालय ने लिखा है,
"PFI ‘हब’ की तरह काम करता है. वो सहयोगी संगठनों की जनता के बीच पहुंच और फंड जुटाने की क्षमता का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करता है. ये संगठन "जड़ और शिराओं" की तरह भी कार्य करते हैं. इनके माध्यम से PFI को पैसा और शक्ति मिलते हैं.
PFI और इसके सहयोगी संगठन या संबद्ध संस्थाएं सार्वजनिक तौर पर एक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य करते हैं. लेकिन ये गुप्त एजेंडा के तहत समाज के वर्ग विशेष को कट्टर बनाकर लोकतंत्र की अवधारणा को कमजोर करने की दिशा में कार्य करते हैं तथा देश के संवैधानिक प्राधिकार और ढांचे के प्रति घोर अनादर दिखाते हैं.
ये संगठन कानून विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जो देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ है और जिससे शांति तथा सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल खराब होने और देश में उग्रवाद को बढ़ावा मिलने की आशंका है."
अधिसूचना कहती है कि PFI के कुछ संस्थापक स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के नेता रहे हैं. जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) से भी PFI का संबंध है. ये दोनों प्रतिबंधित संगठन हैं. आगे लिखा है,
"PFI के ISIS के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क के कई उदाहरण हैं. वो और इसके सहयोगी संगठन चोरी-छिपे देश में असुरक्षा की भावना को बढ़ावा देकर एक समुदाय के कट्टरपंथ को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं. इसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि इसके कुछ सदस्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ चुके हैं."
इन वजहों के आधार पर सरकार ने लिखा है कि PFI के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत ऐक्शन लेना जरूरी है. इसके लिए सरकार ने कुछ तथ्य सामने रखे. जैसे,
"PFI कई आपराधिक और आतंकी मामलों में शामिल रहा है और ये देश के संवैधानिक प्राधिकार का अनादर करता है, और बाहरी स्रोतों से मिले धन और वैचारिक समर्थन के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है.
विभिन्न मामलों में जांच से साफ हुआ है कि PFI और इसके काडर बार-बार हिंसक और विध्वंसक कार्यों में संलिप्त रहे हैं. इनमें एक प्रोफेसर का हाथ काटना, दूसरे धर्मों का पालन करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों की निर्मम हत्या करना, प्रमुख जगहों और लोगों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक प्राप्त करना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आदि शामिल हैं."
- PFI काडर कई आतंकवादी गतिविधियों और हत्याओं में शामिल रहा है. जैसे,
संजीत (केरल, नवंबर 2021)
वी रामलिंगम (तमिलनाडु, 2019)
नंदू (केरल, 2021)
अभिमन्यु (केरल, 2018)
बिबिन (केरल, 2017)
शरत (कर्नाटक, 2017)
आर रुद्रेश (कर्नाटक, 2016).
ये हत्याएं और आपराधिक कृत्य सार्वजनिक शांति को भंग करने और लोगों के मन में आतंक का भय पैदा करने के एकमात्र उद्देश्य से की गई है.
- PFI के कुछ सदस्य ISIS में शामिल हुए हैं. उन्होंने ईराक, सीरिया और अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियों में भाग लिया है. इनमें से कुछ इन संघर्षों में मारे गए. कुछ को राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने गिरफ्तार किया. प्रतिबंधित आतंकी संगठन JMB से भी PFI का संपर्क रहा है.
- PFI के पदाधिकारी, काडर और इससे जुड़े अन्य लोग बैंकिंग चैनल, हवाला, डोनेशन आदि के जरिये सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र के तहत भारत के भीतर और बाहर से धन इकट्ठा कर रहे हैं. फिर उस धन को लीगल दिखाने के लिए कई खातों के माध्यम से उसका अंतरण, लेयरिंग और एकीकरण करते हैं. आखिर में ऐसे पैसा का इस्तेमाल भारत में विभिन्न आपराधिक, गैरकानूनी और आतंकी कार्यों के लिए करते हैं.
- PFI के कई बैंक खातों में जमा धन के स्रोत खाताधारकों की वित्तीय प्रोफाइलों से मेल नहीं खाते. संगठन के काम भी उसके घोषित उद्देश्यों के अनुसार नहीं पाए गए, इसलिए इनकम टैक्स ने आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मार्च 2021 में PFI का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था.
- (इन सब के अलावा) उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात जैसे राज्यों की सरकारों ने PFI को प्रतिबंधित करने की अनुशंसा की है.
इसके बाद सरकार ने कहा है कि अगर PFI पर तत्काल रोक या नियंत्रण नहीं लगाया गया तो ये संगठन और इसके सहयोगी इस मौके का इस्तेमाल,
- अपनी विध्वंसक गतिविधियों को जारी रखने में करेंगे, जिससे लोक व्यवस्था भंग होगी और राष्ट्र का संवैधानिक ढांचा कमजोर होगा.
- एक वर्ग विशेष के लोगों में देश के प्रति असंतोष पैदा करेंगे. इसके लिए उनमें राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को भड़काने और कट्टरवाद के लिए उकसाने का काम करेंगे.
- देश की अखंडता, सुरक्षा और संप्रुभता के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को और तेज करेंगे.
इन कारणों को ध्यान में रखते हुए सरकार का ये मत है
"PFI और उसके सहयोगी संगठनों को तत्काल प्रभाव से अवैध संघ या गठजोड़ घोषित करना ‘आवश्यक’ है. लिहाजा सरकार ये निर्देश देती है कि ये अधिसूचना, इसके राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए लागू होगी."
इसके साथ ही 27 सितंबर, 2027 तक के लिए PFI को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया गया.
PFI पर पांच साल का बैन लगा, सरकार ने कहा- ‘वर्ग विशेष का कट्टर बना रहा’ |

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