'पाकिस्तानी लड़के ब्रिटिश लड़कियों को फंसाकर रेप कर रहे', गृहमंत्री क्या करने जा रहीं?
प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी बड़ा ऐलान कर दिया.
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ब्रिटेन में इन दिनों पाकिस्तानी मूल के लोग सरकार के निशाने पर हैं. वहां की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन खुलेआम उन पर आरोप लगा रही हैं. सुएला ने हाल में एक बयान दिया था कि ‘पाकिस्तान पुरुषों का गैंग’ श्वेत लड़कियों को निशाना बना रहा है. सुएला ने आरोप लगाया कि ब्रिटिश-पाकिस्तानी पुरुष लड़कियों को ड्रग्स देते हैं, उनका रेप करते हैं और उनका फायदा उठाते हैं. ब्रिटेन की कंजर्वेटिव सरकार ने ऐसे आरोपियों को 'ग्रूमिंग गैंग' का नाम दिया है.
सुएला के बयान के एक दिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी बयान दिया कि ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके लिए सरकार ने एक टास्कफोर्स का भी गठन कर दिया. यौन अपराध के लिए पाकिस्तान मूल के लोगों को सीधे-सीधे आरोपी ठहराने पर कई लोग सुनक सरकार की आलोचना भी कर रहे हैं.
सुएला ब्रेवरमैन और ऋषि सुनक ने क्या कहा?गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन भारतीय मूल की हैं. 2 अप्रैल को बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में सुएला ने कहा था कि श्वेत ब्रिटिश लड़कियां चुनौतीपूर्ण परिस्थियों में रहती हैं, उन्हें रेपिस्टों के गैंग ड्रग्स देते हैं, उनका रेप करते हैं और फायदा उठाते हैं. सुएला ने दावा किया कि इनमें से ज्यादातर आरोपी ब्रिटिश-पाकिस्तानी पुरुष हैं. गृह मंत्री ने यह भी कहा था कि अधिकारी ऐसे मामलों में आंखें बंद कर लेते हैं क्योंकि उन्हें 'नस्लभेदी कहलाने' का डर होता है.
इसके बाद प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि 'ग्रूमिंग गैंग' को खत्म करने के लिए जो भी संभव होगा, वो सरकार करेगी. सुनक के मुताबिक, ग्रूमिंग गैंग के पीड़ितों को "पॉलिटिकल करेक्टनेस" होने के कारण नजरअंदाज किया जाता है. इसके साथ ही उन्होंने एक नए ग्रूमिंग गैंग टास्कफोर्स बनाने की घोषणा कर दी. इसके तहत विशेष पुलिस अधिकारियों को बच्चियों से जुड़े यौन अपराधों की जांच में पुलिस की मदद के लिए भेजा जाएगा.
ब्रिटिश सरकार की प्रेस रिलीज के मुताबिक, इन गैंग के सदस्यों के लिए कठोर सजा का प्रावधान किया जाएगा. सुनक ने कहा कि संदिग्धों के नस्लीय डेटा (बैकग्राउंड) को रिकॉर्ड किया जाएगा. ब्रिटिश सरकार ये कार्रवाई तब कर रही है, जब हाल में नए इमिग्रेशन बिल को लेकर भी सरकार की खूब आलोचना हुई थी. ये बिल "अवैध शरणार्थियों" को रोकने के लिए लाया जा रहा है.
सरकार पर नस्लीय भेदभाव का आरोपऋषि सुनक ने गृह मंत्री की तरह बयान नहीं दिया. लेकिन अब सुएला के बयान पर बवाल छिड़ा हुआ है. लेबर पार्टी सहित कई संगठन और एकेडेमिक्स ब्रिटिश सरकार की आलोचना कर रहे है. बच्चों के खिलाफ अपराध की रोकथाम के लिए नेशनल सोसायटी (NSPCC) ने अपराधियों को एक खास रंग से जोड़े जाने को गलत बताया है.
बच्चों के यौन अपराध की स्वतंत्र जांच के लिए एक कमिटी बनाई गई थी. इसे IICSA कहा जाता है. IICSA की नस्लीय अल्पसंख्यक राजदूत सबाह कैसर ने कहा कि चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज को 'एक रंग का मुद्दा' बना देना 'बहुत खतरनाक' है. BBC रेडियो 4 के कार्यक्रम में कैसर ने कहा,
यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के चांसलर नाजिर अफजल ने ट्विटर पर लिखा,
चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज के आंकड़ेब्रिटिश सरकार का ही आंकड़ा है कि देश में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के लिए ज्यादातर श्वेत पुरुष जिम्मेदार है. खुद ब्रिटिश सरकार के गृह मंत्रालय ने ये रिपोर्ट जारी किया था. दो साल पहले दिसंबर 2020 में 'द गार्डियन' अखबार में एक रिपोर्ट छपी थी. इसमें गृह मंत्रालय के हवाले से कहा गया था कि ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिले कि बच्चों के यौन उत्पीड़न के लिए एशियाई मूल के लोग जिम्मेदार हैं. रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ हाई प्रोफाइल मामलों में पाकिस्तानी मूल के लोगों के आरोपी होने के कारण इसने नैरेटिव को हवा दी.
इससे पहले 2015 की भी एक रिसर्च बताती है कि बच्चियों के गैंग आधारित यौन अपराधों में 42 फीसदी श्वेत थे. इसमें 1231 दोषियों को शामिल किया गया था. रिसर्च के मुताबिक इनमें से 14 फीसदी को एशियाई ब्रिटिश और 17 फीसदी को अश्वेत के रूप में परिभाषित किया गया था.
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