प्रधानमंत्री को ये 7 ट्वीट तुरंत डिलीट कर देने चाहिए, हमने स्क्रीन शॉट्स भी नहीं लिए हैं!
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, प्लीज़ आइंदा ध्यान रखिएगा. इतिहास में सब दर्ज़ हो रहा है.

जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है!
प्रधानमंत्री के नाम खुला ख़त
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,नमस्कार!
आशा है आप कुशल होंगे. बहुत दिनों से आपको लिखने की सोच रहा था और हर बार लिखने की कोई न कोई ठोस वजह भी थी लेकिन हमेशा ये उलझन थी कि लेटर नरेंद्र मोदी को संबोधित करूं या भाजपा के सबसे बड़े नेता को या फिर देश के प्रधानमंत्री को. लेकिन आज कोई उलझन नहीं है. आज मैं ये लेटर केवल और केवल लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए देश के वर्तमान प्रधानमंत्री को लिख रहा हूं. आशा है आप इसे एक प्रधानमंत्री के रूप में ही पढ़ेंगे.
मोदी, मोदी, मोदी... (सांकेतिक तस्वीर: रॉयटर्स)बात अपने बचपन से प्रारंभ करता हूं. मेरे क्लास वन या टू में एक पाठ हुआ करता था जिसमें ड्राईवर, शेफ, लेखक, एक्टर, पायलट सबकी फोटो बनी रहती थी और उनके नीचे उनका प्रोफेशन लिखा रहता था.
चूंकि ये पाठ ‘एनिमल्स’ और ‘फ्रूट्स’ वाले पाठ के ठीक बाद में आता था, इसलिए मुझे लगता था कि ये ड्राईवर, शेफ वगैरह दरअसल कोई अलग चीज़, कोई अलग प्रजाति होती है, एप्पल और एलिफेंट की तरह. या तो वो इंसान नहीं होते, या हमारे सरीखे इंसान नहीं होते. शायद किसी फैक्ट्री में बनते हैं. तब मैं बहुत छोटा था.लेकिन फिर मेरी मम्मी ने बताया कि –
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिस को भी देखना हो कई बार देखना. (निदा फ़ाज़ली)मलतब ये कि ये सब भी मेरी-तुम्हारी तरह इंसान होते हैं. वही खाते हैं, वही पीते हैं लेकिन जब ये अपने प्रोफेशन में होते हैं तो फिर श्याम, मोहन, सीता, जावेद नहीं रहते – शेफ, ड्राईवर, एक्टर बन जाते हैं.
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी (तस्वीर: पीटीआई)थोड़ा और बड़ा हुआ तो जाना कि इसी के चलते आदमी की ज़िंदगी के दो पार्ट बताए गए हैं – पर्सनल और प्रोफेशनल. और इसलिए ही तो हर ऑफिस में ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ जैसी बातें की जाती है.
तो इतनी बड़ी भूमिका के बाद एक छोटी सी बात कहना चाहूंगा -आप नरेंद्र मोदी या भाजपा के नेता के रूप में बहुतों के लिए आदर्श होंगे, सबके लिए नहीं लेकिन इस तथ्य को कोई नहीं नकार सकता कि आप पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं. आपका पद पूरे देश के लिए सम्मानित है.
मैं पवित्र प्रयागराज में आपसे से एक और अहम विषय पर बात करना चाहता हूं।
प्रयागराज वो जगह हैं जिसे उत्तर प्रदेश में न्याय का मंदिर भी कहा जा सकता है।
कुछ समय से जिस तरह एक बार फिर न्यायपालिका पर दबाव का खेल शुरू हुआ है,
उस स्थिति में देश को को सतर्क किया जाना आवश्यक है: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 16, 2018
हो सकता है कि बाकियों की तरह कभी-कभी आपके लिए भी ये समझना मुश्किल हो जाता होगा कि कब आपको प्रोफेशनल तरीके से व्यवहार करना चाहिए और कब पर्सनल होना चाहिए.
हो सकता है कि पर्सनल और प्रोफेशन के बीच में एक इतनी पतली रेखा हो जिसे क्रॉस करते वक्त पता ही न चलता हो.लेकिन एक जगह है जहां पर हम भारतवासी आपसे अपेक्षा रखते हैं कि आप प्रधानमंत्री बने रहें, प्रधानमंत्री की तरह व्यवहार करें, प्रधानमंत्री की तरह दिखें. वो है आपका ऑफिस.
देश पर सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाली पार्टी ने हमेशा ही खुद को हर कानून,
न्याय-पालिका, संस्था और यहां तक कि देश से भी ऊपर माना है।
देश की हर उस संस्था को इस पार्टी ने बर्बाद कर दिया जो उसकी मर्जी से नहीं चली,
उसके इशारों पर काम करने, झुकने को तैयार नहीं हुई: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 16, 2018
नहीं प्रधानमंत्री जी, कृपया अन्यथा न लें. मैं ये अपने लिए नहीं कह रहा हूं. वो, आपके विपक्षी, आपके इस बर्ताव पर बायस्ड होने और फेवर करने का आरोप लगाएंगे. एक नेता पर ऐसा आरोप लगता है तो कोई बड़ी बात नहीं लेकिन यदि देश के प्रधानमंत्री पर ऐसे आरोप लगते हैं तो फिर इश्यू बनता है.
अब देखिए, आपके कुल तीन ट्विटर हैंडल हैं. तीनों वेरिफाइड -# एक आपका निजी (@narendramodi
),
# दूसरा पता नहीं कौन सा (@narendramodi_in
), चलिए इसको निजी और प्रोफेशनल के बीच का कुछ मान लेते हैं,
# और तीसरा है आपका एक प्रधानमंत्री के रूप में (@PMOIndia
).
इसी मनमानी की वजह से हमारे देश की न्याय प्रणाली को भी कमजोर करने का प्रयास किया गया।
इसका सिर्फ एक कारण था कि न्याय-पालिका उन संस्थाओँ में से एक रही है जो इस पार्टी के भ्रष्ट और निरंकुश तरीकों के खिलाफ खड़ी रहती है: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 16, 2018
अब इस प्रधानमंत्री वाले हैंडल से यदि निजी ट्वीट होते हैं आपकी तटस्थता पर शंका होती है.
अगर इस हैंडल से आप नरेंद्र मोदी और भाजपा के राजनितिक दुश्मनों पर निशाना साधते हैं तो आपकी योग्यता पर शंका होती है.अगर आप इस हैंडल से एक के बाद एक लगातार दस ट्वीट विपक्षी पार्टी पर हमला करने के वास्ते करते हो तो जिस पद पर आप बैठे हो उसकी गरिमा बने रहने पर शंका होती है.
इस बात को प्रयागराज और यूपी के लोगों से बेहतर कौन जान सकता है कि कांग्रेस को न्याय-पालिका क्यों पसंद नहीं है ?
यूपी के लोग वो दिन याद करें जब इस पार्टी की सर्वोच्च नेता द्वारा यहां जनमत को अपमानित करने काम किया गया था ?
क्या ये लोकतंत्र का अपमान नहीं था ?: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 16, 2018
देश के कई संस्थानों और पदों की गरिमा के इस ग्रहण-काल में बचे हुए इक्का-दुक्का पदों पर कार्पेट बोम्बिंग सरीखे लगते हैं आपके ये ट्वीट.
आप अपने एक ट्वीट में महाभियोग को डराने धमकाने की कोशिश कहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री जी! महाभियोग का विकल्प संविधान और लोकतंत्र में होना ही इस बात की ताकीद करता है कि आवश्यकता पड़ने पर इसका यूज़ किया जा सकता है और किया जाना चाहिए. और इस आवश्यकता को एक लोकतांत्रिक देश में किसी दल का नेता निर्धारित नहीं कर सकता.कांग्रेस के नेताओं की यह प्रवृत्ति रही है। इस प्रवृत्ति में देश की संवैधानिक संस्थाओँ को पार्टी के आगे हाथ बांधे खड़ा रहने पर मजबूर किया जाता है
जो झुकता नहीं उसे तोड़ने की कोशिश की जाती है। ये उनकी राजशाही सोच है जो उन्हें निष्पक्ष संस्थाओं को बर्बाद करने को उकसाती रहती है: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 16, 2018
इस सभी ट्वीटस की सार्थकता और तार्किकता कितनी है इसका अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता कि, यदि इश्वर न करे 2019 के चुनाव परिणाम आपकी आशा के विपरीत आ जाते हैं तो आपको पीएमओ वाला ट्विटर एकाउंट विपक्षी पार्टी को देना पड़ेगा.
बेशक तब आपके ट्वीटस आर्काइव हो जाएंगे, लेकिन फिर भी इस वाले हैंडल से, जो किसी व्यक्ति नहीं पद का है, सिर्फ वही ट्वीट होने चाहिए थे जो राजनैतिक रूप से ही नहीं बल्कि हर तरह से न्यूट्रल हों.और प्रधानमंत्री जी, ये आपको ट्विटर या सोशल मीडिया पर ही नहीं, हर जगह आचरण में लाना चाहिए. फिर चाहे वो आपके चुनावी भाषण हों या विभिन्न योजनाएं.
हाल में ही हमने देखा कि कैसे उन्होंने न्याय-पालिका के सर्वोच्च न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिश की।
जजो को ड़राने धमकाने की ये कोशिश उनकी पुरानी सोच का हिस्सा रही है: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 16, 2018
पत्र लंबा हो रहा है, यहीं समाप्त करता हूं. अपना ख्याल रखिएगा. हमारी दिल्ली में सर्दी बढ़ गई है, लुटियंस के क्या हाल हैं बताइएगा.
आपका,एक भारतवासी!
ये लोग हर संस्था को बर्बाद करने का प्रयास करने के बाद अब लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं।
लेकिन इनका बार-बार ये साबित कर रही हैं कि
ये खुद को,
देश,
लोकतंत्र,
न्याय-पालिका और
यहां तक कि लोगों के भी ऊपर समझते हैं।
अभी दो दिन पहले भी हम इसका एक और उदाहरण देख चुके हैं: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 16, 2018
वीडियो देखें:
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