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उत्तर कोरिया घूमने को उतावले थे, अब लौटे तो बोले- वहां गार्ड से बिना पूछे पेशाब भी नहीं जाने दिया

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के कुछ लोगों को सालों के मान-मनौव्वल के बाद North Korea में घूमने की इजाजत मिली. अब लौटकर आए हैं तो बता रहे हैं कि लोकल गाइड और सिक्योरिटी वालों से पूछे बिना वहां कुछ नहीं कर सकते थे. अब बताया कि उत्तर कोरिया में क्या-क्या हुआ था उनके साथ?

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North Korea Images
नॉर्थ कोरिया ने कुछ पर्यटकों को वहां जाने की अनुमति दी थी. (तस्वीर: रॉयटर्स/सोशल मीडिया)
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रवि सुमन
2 मार्च 2025 (Updated: 2 मार्च 2025, 11:20 PM IST)
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करीब पांच साल के बाद पर्यटकों के एक समूह को नॉर्थ कोरिया (Tourist in North Korea) में यात्रा करने की अनुमति मिली. 20 फरवरी को इन लोगों को दुनिया के सबसे ज्यादा रहस्यों वाले इस देश में प्रवेश मिला. जब ये लोग नॉर्थ कोरिया के बॉर्डर में घुसने वाले थे, उससे ठीक पहले टूर गाइड्स ने उनको कुछ नियम पढ़ के बताए. नियम कुछ इस प्रकार थे- ‘नेताओं का मजाक नहीं बनाना है. ऑइडोलॉजी की बेइज्जती नहीं करनी है. और किसी तरह का जजमेंट पास नहीं करना है.’

इसके बाद उनको कुछ और जानकारियां दी गईं. कहा गया कि जिस जगह पर इनको ले जाया जाएगा, वहां फोन में सिग्नल नहीं आएंगे, इंटरनेट नहीं चलेगा और कैश निकालने के लिए कोई मशीन नहीं होगी.

कोरोना का दौर शुरू होने के साथ ही इस देश ने अपने बॉर्डर सील कर लिए थे. डिप्लोमैट्स हों, राहत कार्य से जुड़े लोग हों या कोई ट्रैवलर… किसी के लिए भी ये जानना असंभव हो गया था कि आखिर इस देश में चल क्या रहा है. पहले भी बॉर्डर सीमित रूप से ही खुले थे. BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस देश ने खुद को दुनिया से अलग कर लिया है, पहले से भी ज्यादा. नॉर्थ कोरिया पूरी तरह से रूस और चीन के समर्थन पर निर्भर हो गया है. ऐसे में इन पांच सालों के अंतराल में कई लोगों ने आशंका जताई कि शायद अब किसी पश्चिमी देश का कोई व्यक्ति उत्तर कोरिया में जा ही नहीं पाएगा.

सालों तक मान-मनौव्वल चला

यंग पायनियर टूर्स नाम की कंपनी चलाने वाले ‘रोवन बियर्ड’ जैसे कई लोग नॉर्थ कोरिया को मनाने में लगे रहे. सालों तक मान-मनौव्वल चला, लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी. पिछले महीने दो पश्चिमी कंपनियों को वहां जाने की अनुमति मिली. एक कंपनी पायनियर टूर्स थी और दूसरी कंपनी कोरियो टूर्स थी जिसे ‘ग्रेग वैक्जी’ चलाते हैं.

आखिरकार जब उनको हरी झंडी मिली तो उन्होंने कोई देरी नहीं की. सिर्फ पांच घंटे के समय में उन्होंने फटाफट अपने जैसे यात्रियों का एक ग्रुप बनाया. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के लोगों का एक समूह यात्रा के लिए निकला. उन्हें चीनी बॉर्डर से होते हुए उत्तर कोरिया के उत्तरपूर्वी हिस्से के रासोन क्षेत्र में ले जाया गया. 

बाथरूम जाने से पहले भी मंजूरी लेनी पड़ी

इस समूह में 28 साल के एक ब्रिटिश यूट्यूबर माइक केनेडी भी थे. उन्होंने अपने ब्लॉग में बताया कि उनके ऊपर पूरी तरह से कंट्रोल बनाकर रखा गया. उन्होंने बताया,

लोकल गाइड से पूछे बिना कुछ नहीं कर सकते थे. बिना पूछे होटल से बाहर भी नहीं निकल सकते थे. कई बार तो मुझे गाइड को बताना पड़ा कि मुझे बाथरूम जाना है, जाने दो… मुझे दुनिया के किसी हिस्से में कभी भी ऐसा अनुभव नहीं हुआ था.

उन्होंने बताया कि उनको कब और कहां लेकर जाना है, ये सब पहले से तय था. उनको एक बीयर फैक्ट्री, एक स्कूल और एक फार्मेसी में ले जाया गया. फार्मेसी नई थी और उसका स्टॉक अभी-अभी ही फुल किया गया था. इस दौरान कौन क्या देख रहा है, क्या रिकॉर्ड कर रहा है… इन बातों का बहुत सावधानी से ध्यान रखा गया.

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राजधानी से दूर क्यों रखा गया?

कोरोना की बंदिश से पहले की यात्राओं में कुछ लोग नॉर्थ कोरिया की राजधानी प्योंगयांग भी गए थे. वहां उन्होंने बड़ी-बड़ी इमारतें देखी थीं. लेकिन तब भी यात्रियों को पूरी तरह से कंट्रोल में रखा गया था. इस बार पर्यटकों को राजधानी से दूर रखा गया. ग्रेग वैक्जी कहते हैं कि उत्तर कोरिया के अधिकारियों ने रासोन को टेस्टिंग के तौर पर इस्तेमाल किया है. वो देखना चाहते थे कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं होगी. वैक्जी ने कहा कि वो हमें रासोन इसलिए लेकर गए क्योंकि वो इलाका देश के बाकी हिस्सों की तुलना में छोटा है. ऐसे में इसे कंट्रोल करना आसान है. 

जो स्मिथ उत्तर कोरिया की यात्रा पर तीसरी बार गए थे. उन्होंने बताया कि आप जितनी बार उस देश में जाएंगे आपको उतना ही कम पता चलेगा. यानी कि कोरिया ने पर्यटकों के लिए अपना दरवाजा तो खोला है लेकिन पहले से भी ज्यादा सीमित कर दिया है. उन्होंने कहा कि आपको नॉर्थ कोरिया की बस थोड़ी-सी झलक मिलती है और आपके मन में कई सवाल उठते हैं. 

इस यात्रा के दौरान स्मिथ को एक अलग अनुभव का एहसास हुआ. उन्होंने कहा कि उनको वहां एक अलग एजेंडे पर आधारित दौरा कराया गया. लोग जींस में थे और परफ्यूम के साथ घूम रहे थे. कुछ लोग लुई वुइटन के नकली हैंडबैग और जापानी वॉशिंग मशीन बेच रहे थे. देखकर लग रहा था कि ये सब चीन से आयात किए गए हैं. 

पर्यटकों को वहां तस्वीरें लेने की अनुमति नहीं थी. लेकिन क्यों? स्मिथ को संदेह है कि शायद देश के बाकी हिस्से के लोगों से इस बात को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है कि देश के एक हिस्से में ऐसा माहौल भी है.

"साउथ कोरिया बैलून में वायरस भरकर भेजता है…"

पांच सालों तक उत्तर कोरिया ने अपने बॉर्डर को सील करके क्यों रखा? माइक केनेडी के ब्लॉग में एक लोकल गाइड ने बताया कि ऐसा कोरोना के कारण था. इस पर केनेडी ने गाइड से पूछा कि क्या इस देश में पांच सालों तक कोरोना का आतंक रहा. इस पर गाइड ने कहा कि वो कैमरा बंद होने के बाद जवाब देंगे. 

ऑफ कैमरा गाइड ने सरकार के बयान को दोहराया. उसने कहा कि उनके देश में कोरोना इसलिए आया क्योंकि साउथ कोरिया ने गुब्बारे में भरकर वायरस भेजा था. लेकिन नॉर्थ कोरिया ने 90 दिनों के भीतर इसे खत्म कर दिया.

यंग पायनियर टूर्स के मालिक रोवन बियर्ड 100 से ज्यादा बार उत्तर कोरिया जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि रासन में कोविड के सख्त नियमों का असर अब भी दिखा. उत्तर कोरिया में चलने वाले बहुत सारे चीनी व्यवसाय बंद हो गए हैं और उनके कर्मचारी वापस चले गए हैं.

कोरियो टूर्स के मालिक ग्रेग वैक्जी ने बताया कि देश में घुसने से पहले उनके सामानों को सेनेटाइज किया गया. उनका टेंपरेचर लिया गया. इलाके में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोग अब भी मास्क पहने हुए थे. उन्होंने इस बात पर संदेह जताया कि यहां के लोगों में कोरोना का ये डर असल में है या ये सरकार का लोगों को कंट्रोल करने का एक बहाना है.

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अमेरिका को कमजोर दिखाने की कोशिश

माइक केनेडी को कई पोस्टर्स मिले. इनमें से अधिकतर में उत्तर कोरियो को दुनिया के सबसे बहादुर देश के तौर पर पेश किया गया था. और अमेरिका को कमजोर और खराब देश की तरह दिखाया गया था. एक पोस्टकार्ड में चाकूओं के नीचे अमेरिका को रखा गया तो दूसरे में अमेरिका को लाशों के ढेर ऊपर खड़ा एक देश बताया गया. उन्होंने बताया कि वहां बहुत सारे 'एंटी अमेरिकन प्रोपेगेंडा' वाले पोस्टकार्ड्स मिल रहे थे.

कैसे हैं उत्तर कोरिया के लोग?

रोवन बियर्ड अपने लंबे अनुभव के आधार पर एक जरूरी बात बताते हैं. वो कहते हैं कि नॉर्थ कोरिया के लोग रोबोट नहीं हैं. उनके पास अपना ओपिनियन है, जीवन में कुछ करने का लक्ष्य है, उनमें 'सेंस ऑफ ह्यूमर' भी है. इसलिए जब भी किसी को उस देश में जाने का मौका मिलता है, बियर्ड उनको राय देते हैं कि वो उत्तर कोरिया के लोगों की बातें ध्यान से सुनें और उन्हें समझने की कोशिश करें.

वीडियो: तारीख: कहानी नॉर्थ कोरिया की, वहां से भागने वाला पहला इंसान कौन था?

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