दिल्ली-कामाख्या एक्सप्रेस हादसे की 'वजह' पता लगी, जांच में किसे जिम्मेदार बताया गया?
दिल्ली-कामाख्या नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के साथ बिहार में हुए हादसे की शुरूआती जांच में काफी बातें सामने आई हैं. 15 पेज की जांच रिपोर्ट से क्या-क्या पता चला? किस पर उठे सवाल?

बिहार के बक्सर में दिल्ली-कामाख्या नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के साथ हुए भीषण हादसे की असली वजह एक विस्तृत जांच के बाद ही पता चलेगी. लेकिन रेलवे की सात सदस्यीय टीम द्वारा की गई शुरुआती जांच में भी काफी कुछ सामने आया है, जो हादसे के कारणों की ओर संकेत करता है. जांच रिपोर्ट में लिखा है, "ऐसा लगता है कि रेलवे ट्रैक में खराबी के कारण ट्रेन पटरी से उतर गई." शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक हादसे के लिए रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग जिम्मेदार है.
जांच में और क्या-क्या पता चला?15 पेज की शुरूआती जांच रिपोर्ट से पता चला है कि ट्रेन ने रघुनाथपुर स्टेशन का होम सिग्नल ग्रीन था और गाड़ी ने इसे 128 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पार किया. लेकिन रघुनाथपुर स्टेशन से ठीक पहले पड़ने वाली एक रेलवे क्रासिंग पर लोको-पायलट को भारी कंपन महसूस हुआ. कुछ सेकेंड्स में ही ब्रेक पाइप में प्रशर खत्म हो गया. लोकोपायलट के बयान के मुताबिक, जब तक वो कुछ समझ पाते, गाड़ी पटरी से उतर गई. तब रात के 9 बजकर 52 मिनिट हो रहे थे.
रिपोर्ट के मुताबिक लोकोपायलट को मामूली चोटें लगी थीं. लेकिन असिस्टेंट लोकोपायलट गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिन्हें अस्पताल भेजा गया.
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ट्रेन के लोको-पायलट ने क्या बताया था?दिल्ली-कामाख्या नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के लोको-पायलट विपिन कुमार सिन्हा ने दुर्घटना के बाद एक लिखित बयान दिया था. उन्होंने बताया था,
"रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन से पहले जैसे ही हमने रेलवे क्रॉसिंग को पार किया, हमें लोको-इंजन में बहुत ज्यादा कंपन महसूस हुआ. हमें एक जोरदार झटका महसूस हुआ और इंजन के ब्रेक पाइप का दबाव अचानक कम हो गया. इससे पहले कि मैं और मेरे सहायक लोको-पायलट राजेश कुमार कुछ समझ पाते, ट्रेन पटरी से उतर गई."
11 अक्टूबर (बुधवार) को देर रात दिल्ली से चली नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस बिहार के बक्सर-आरा के बीच दुर्घटना का शिकार हुई थी. बिहार के रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए थे. कुछ बोगियां पलट भी गईं. इस हादसे में चार यात्रियों की मौत हो गई और 60 से ज्यादा घायल हो गए. दुर्घटना में दो मेन और दो लूप लाइन को मिलाकर सभी चार रेल ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गए. इस हादसे में रेलवे को 52 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है.
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