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ट्विन टावर ढह गया, लेकिन उससे निकले 80 हजार टन मलबे का क्या होगा?

इस मलबे को हटाने में कम से कम 3 महीने का वक्त लगेगा.

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28 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 28 अगस्त 2022, 04:44 PM IST)
Noida: Supertech twin towers demolition
नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर्स (फोटो: Inhouse/ANI)
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नोएडा (Noida) का सुपरटेक ट्विन टावर (Supertech Twin Tower) 28 अगस्त की दोपहर 2:30 बजे गिरा दिए गए. इन टावर्स को गिराने में भले ही सिर्फ चंद सेकंड का वक्त लगा हो, लेकिन इसके ढहने के बाद निकला मलबा कई हजार टन का है. बताया जा रहा है कि इस मलबे को निपटाने में कम से कम 3 महीना लगेगा.

कब तक चलेगा मलबा हटाने का काम?

आजतक के अभिषेक आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा के ट्विन टावर्स के गिरने के बाद लगभग 80 हजार टन तक मलबा निकला है. 

रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा अथॉरिटी की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) रितु माहेश्वरी ने बताया कि 50 हजार टन मलबा ब्लास्ट साइट पर ही छोड़ दिया जाएगा. वहीं 30 हजार टन मलबे को सेक्टर 80 के कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन मैनेजमेंट प्लांट ले जाया जाएगा, जहां इसका साइंटिफिक तरीके से निपटान होगा.

ये भी पढ़ें- कुछ सेकंड में ढह जाएगा सुपरटेक ट्विन टावर, ये आदमी दबाएगा फाइनल बटन

ट्विन टावर्स के मलबे का क्या किया जाएगा?

 नोएडा अथॉरिटी की CEO रितु माहेश्वरी ने बताया कि,

ज्यादातर मलबे का इस्तेमाल इमारत के बेसमेंट को भरने में किया जाएगा. बाकी मलबा ट्रक के जरिए कंस्ट्रक्शन एंड डिमॉलिशन मैनेजमेंट प्लांट भेजा जाएगा. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि मलबा हटाने का काम समय पर और तेजी से हो.

कुल मलबे में लगभग 4 हजार टन लोहा होगा, जिसका इस्तेमाल बिल्डिंग को बनाने में किया गया था. इस मलबे से लोहा छांट कर डिमोलिशन मैनेजमेंट कंपनी बेच देगी.

बताया जा रहा है कि पहले ये योजना बनाई गई थी कि मलबे को सीधे सेक्टर 80 के लैंडफिल साइट पर भेजा जाएगा, लेकिन अब अथॉरिटी ने फैसला किया है कि मलबा कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन मैनेजमेंट प्लांट भेजा जाए. 

डिमोलिशन के बाद वायु प्रदूषण की चुनौती

इतना ही नहीं, धमाका होने के बाद हवा में कंक्रीट की धूल का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया, जो आसपास के इलाकों पर बुरा असर डाल सकता है. इससे निपटने के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से तैयारियों के दावे किए गए. ताकि धूल ज्यादा देर तक हवा में न रह सके. 

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए पानी के 100 टैंकर, 15 एंटी स्मॉग गन, 6 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन, लगभग 200 सफाई कर्मी और 20 ट्रैक्टर ट्रॉली की व्यवस्था की गई. धूल से एमरॉल्ड टावर और एटीएस विलेज को बचाने के लिए जियो फाइबर क्लॉथ का इस्तेमाल किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि आसपास के क्षेत्रों में मौजूद पेड़-पौधों पर भी जमने वाली धूल को हटाया जा रहा है. प्राधिकरण कई दिनों तक आसपास के इलाके में पानी का छिड़काव करेगा.

ट्विन टावर को गिराए जाने के बाद आसपास के इलाके में होने वाले एयर पॉल्यूशन को लेकर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 6 जगहों पर मैनुअल एम्बियंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए हैं. इन जरिए एयर क्वालिटी पर निगरानी रखी जाएगी. इसके साथ ही आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों को मास्क पहनने की हिदायत दी गई है.

वीडियो- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोएडा का सुपरटेक टावर इस तरह गिराया जाएगा?

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