इस शख्स ने दबाया फाइनल बटन और ढह गया सुपरटेक ट्विन टावर
नोएडा CEO रितु महेश्वरी ने कहा कि आसपास की हाउसिंग सोसायटी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

Noida के सुपरटेक ट्विन टावर (Supertech Twin Tower) को अंतत: गिरा दिया गया. नोएडा सेक्टर 93(A) में इस इमारत को अवैध रूप से बनाया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे गिराने का आदेश दिया था. पहले ये टावर्स 21 अगस्त तक गिराए जाने थे, लेकिन अदालत ने नोएडा प्राधिकरण के अनुरोध को स्वीकार कर तारीख 28 अगस्त तक बढ़ा दी थी. टावर्स गिराए जाने के बाद नोएडा CEO रितु महेश्वरी ने कहा कि आसपास की हाउसिंग सोसायटी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.
किसने दबाया ब्लास्ट का बटन?नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर्स को गिराने के लिए इसमें विस्फोटक लगाए गए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय ब्लास्टर चेतन दत्ता ने एक बटन दबाया जिसके बाद महज 9 सेकंड में ट्विन टावर्स गिर गए. चेतन दत्ता को ब्लास्टिंग फील्ड में 20 सालों का अनुभव है. उन्हें 2012 में डायरेक्टोरेट जनरल माइनिंग सेफ्टी से ब्लास्टर का सर्टिफिकेट मिल चुका है.
इमारत को गिराने की प्रोसेस के बारे में बात करते हुए हाल में चेतन दत्ता ने आजतक से कहा था,
‘यह एक सरल प्रक्रिया होगी. हम डायनमो से करंट उत्पन्न करते हैं और फिर बटन दबाते हैं, जो सभी शॉक ट्यूबों में डेटोनेटर को एक्टिवेट करेगा. 9 सेकंड में सभी डेटोनेटर एक्टिवेट हो जाएंगे और पूरी इमारत गिर जाएगी.’
उन्होंने बताया था,
'हम इमारत से लगभग 50-70 मीटर दूर होंगे. इसमें कोई खतरा नहीं होगा और हमें पूरा यकीन है कि इमारत सही तरीके से ढह जाएगी. ब्लास्टिंग वाला क्षेत्र लोहे की जाली की 4 परतों और कंबल की 2 परतों से ढका हुआ होगा. इमारत का मलबा तो नहीं उड़ेगा लेकिन धूल उड़ सकती है.'
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विस्फोट के समय कंपन को कम करने के लिए इम्पैक्ट कुशन डिजाइन किए गए.
Supertech Twin Towers की वीडियोग्राफी पर बैनसुपरटेक ट्विन टावर्स के गिरने पर बगल वाले एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज सोसाइटी के करीब 5 हजार लोगों को घर खाली करना पड़ा. उन्हें पास के रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट किया गया था. अधिकारियों से मंजूरी के बाद शाम साढ़े 6 बजे के बाद वे वापस अपनी सोसायटी में वापस लौटेंगे.
इसके अलावा आसपास की अन्य सोसाइटी के सभी लोगों को मास्क, चश्मा पहनने और डिमालिशन के दौरान बाहर जाने से बचने के लिए कहा गया है. सख्त निर्देश हैं कि इन सोसाइटी से कोई भी बाहर निकलकर फोटो और वीडियोग्राफी नहीं करेगा. आपात स्थिति में पड़ोस के फेलिक्स अस्पताल में करीब 50 बेड रिजर्व किए गए थे.
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