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फ्री ब्लड टेस्ट के बहाने आतंकवादी लगा रहे एड्स की सुई? जानिए सच

क्या फेसबुक-व्हाट्सऐप पर ऐसा मैसेज आपको भी आया है?

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6 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 6 जुलाई 2017, 12:06 PM IST)
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फोटो - thelallantop
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'भार्त माता को नमन', '101 शिवलिंग के दर्शन', माता-पिता का आशीर्वाद' और 'सब्ज़ी में नमक ज़्यादा पड़ने पर क्या करें' जैसे पोस्ट अब फेसबुक पर कुछ कम हुए हैं. पब्लिक अब सीरियस हुई है. तो अब ज़रूरी सूचनाएं जारी करने का चलन ज़ोर पकड़ रहा है. लेटेस्ट 'ज़रूरी' सूचना है एक आतंकी संगठन के बारे में, जिसके बारे में मैसेज वायरल हो रहा है कि वो फ्री ब्लड टेस्ट के बहाने लोगों को एड्स से संक्रमित कर रहा है:
क्या कहा गया है ऐसे मैसेज में:  अगर आपके घर कुछ लड़के-लड़कियां आते हैं और कहते हैं कि वो मेडिकल के स्टूडेंट हैं और आपका शूगर या बीपी या कोई ब्लड टेस्ट फ्री में करने के लिए बोलते हैं तो आप तुरंत पुलिस को फोन करें क्योंकि वो आतंकवादी संगठन के लोग हैं और उनके इंन्जेक्शन में एड्स का वायरस है जो वो ब्लड लेने के बहाने आपके शरीर में डाल देंगे. किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने घर में न घुसने दें.  - उ.प्र पुलिस
ये 'सूचना' पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है. देखने में सीरियस लगती है. पुलिस का हवाला भी है. बस एक झोल है. ये सेम टू सेम सूचना कई और राज्यों के पुलिस विभागों के हवाले से भी जारी की जा रही है. यूपी पुलिस के नाम के साथ: up police 2   गुजरात पुलिस के नाम के साथ     गोआ पुलिस के नाम के साथ:   goa police   मध्यप्रदेश पुलिस के हवाले से:   mp police   राजस्थान पुलिस भी क्यों छूटे:   rajasthan police   आपने चार दिन भी फेसबुक चलाया हो, तो आप जान गए होंगे कि ये 'ज़रूरी सूचना' भी कई और ज़रूरी सूचना की तरह अफवाह है. लेकिन अब भी यदि आपका कोई डाउट बचा है, तो एक पोस्ट और देख लीजिएः   bharat sarkar

लेकिन भइये भारत सरकार की क्राइम ब्रांच होती ही नहीं !!! 

इस मैसेज में भारत सरकार की क्राइम ब्रांच का हवाला दिया गया है. ये जानें कि क्राइम ब्रांच अलग-अलग राज्यों की पुलिस में होती है. पूरे देश की क्राइम ब्रांच जैसा कुछ नहीं होता. काहे कि देश में पुलिस राज्य सूची में आती है. तो केंद्र सरकार चाहे तो भी पूरे देश की क्राइम ब्रांच नहीं बना सकती. और इसी तरह इस तरह का कोई मैसेज भी जारी नहीं कर सकती. तो सामान्य ज्ञान के आधार पर ही इस अफवाह को खारिज किया जा सकता है. लेकिन हम जानते हैं, सामान्य ज्ञान इतना भी सामान्य नहीं है. कुछ लोग बिना 'सबूत' के नहीं मानेंगे. तो ऐसे जड़मति महानुभाव फेसबुकियों के लिए हमने उस राज्य की पुलिस से संपर्क किया जिसका हवाला इस तरह की पोस्ट्स में सबसे ज़्यादा दिया जा रहा था - उत्तर प्रदेश पुलिस. हमने यूपी पुलिस के आधिकारिक हैंडल को टैग कर के इन पोस्ट्स के बारे में जानकारी मंगाईः     इसके कुछ देर बाद, यूपी पुलिस का जवाब आ गयाः इसके अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस के DGP हेडक्वार्टर में लोक सूचना अधिकारी (PRO)एडिशनल एसपी राहुल श्रीवास्तव ने भी स्थिती साफ कीः   अच्छे से देख लीजिए. ट्वीट पर नीला टीका लगा है. माने यहां लिखी बात यूपी पुलिस की आधिकारिक लाइन है. तो अब आप जान गए हैं कि घर आकर ब्लड टेस्ट के बहाने कोई आतंकी आपको एड्स का मर्ज़ देकर नहीं जाएगा. हम ये नहीं कह रहे कि किसी अंजान व्यक्ति को घर में आने देते वक्त सतर्कता न बरतें. खासतौर पर अगर ब्लड सैंपल देने की बारी आए तो सुई के स्टेराइल होने का ध्यान ज़रूर रखें (इसका आसान तरीका यही है कि सुई की पैकिंग अपने सामने खुलते हुए देखें, कभी पुरानी सुई इस्तेमाल न होने दें). लेकिन इस तरह किसी 'आतंकी हमले' के खौफ में यदि हैं, तो मुक्त हो जाइए और यदि ये खौफ बांट रहे हैं तो ऐसा करने से बाज़ आ जाएं. काहे कि अफवाह फैलाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है और अपराधी कहां जाते हैं, वो तो आप जानते ही हैं. बात निकली है, तो बताते चलें कि सुई चुभा कर एड्स फैलाने वाली अफवाह पहली बार नहीं फैली है. कुछ 'जागरूक' लोगों ने कुछ समय पहले ये अफवाह उड़ा दी थी कि सिनेमा हॉल की सीट पर एड्स की सुई छोड़ी जा रही है, जिस से सीट पर बैठने वालों में एड्स का वायरस चला जाता था. पूरा किस्सा यहां क्लिक कर के पढ़ें. हम आपको ये बताना चाह रहे हैं कि अफवाह पकड़ने का एक तरीका ये भी है कि वो सुई से एड्स फैलाने की अफवाह हो. कुल जमा बात ये कि सतर्क रहें लेकिन खौफ में नहीं.
इस अफवाह के फैलने के जानकारी हमें हमारे एक पाठक दीपक सिनसिनिबार ने दी थी. उनके कहने पर ही हमने ये पड़ताल की. यदि आप भी इस तरह की किसी अफवाह को लेकर संशय में हैं, तो हमें फेसबुक पर मैसेज करें या lallantopmail@gmail.com पर लिख भेजें.
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