'इंडियन्स को टारगेट करने वाले नियम ला रहे', न्यूजीलैंड के मंत्री ने अपनी ही सरकार को घेर लिया
संसद में भारत-न्यूजीलैंड FTA बिल की पहली रीडिंग चल रही थी. इस दौरान, पीटर्स ने अपने आरोप दोहराए. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने भारत के रिएक्शन के डर से बदलावों की घोषणा सार्वजनिक रूप से न करने पर चर्चा की थी.

न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने देश की सत्ताधारी नेशनल पार्टी की सरकार पर बड़े आरोप लगाए हैं. उन्होंने सरकार पर 'गुपचुप' तरीके से इमिग्रेशन पॉलिसी में ऐसे बदलाव करने का आरोप लगाया है, जिससे भारत नाराज हो सकता है. हालांकि, न्यूजीलैंड की सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह ‘बेबुनियाद’ बताया है. विंस्टन पीटर्स ने पहले ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस मामले को उठाया था. फिर भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) विधेयक की पहली रीडिंग के दौरान भी पीटर्स ने इस मुद्दे को उठाया.
पीटर्स ने दावा किया कि सरकार ने अचानक अपना रुख बदल दिया है और इमिग्रेशन के लिए ऐसे नियम लागू किए हैं जो केवल भारतीयों को ही निशाना बनाते हैं. पीटर्स ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मंत्रियों को चेतावनी दी थी कि जिन बदलावों का वो प्रस्ताव रख रहे हैं, उससे न्यूजीलैंड और भारत के संबंधों को नुकसान हो सकता है. पीटर्स के मुताबिक न्यूजीलैंड को व्यापार के लिए एक मुफीद देश बनाने की कवायद जारी हैं. लेकिन सरकार जो कर रही है, वो न्यूजीलैंड की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकता हैं.
पीटर्स ने कहा कि ऐसा करने पर कानूनी चुनौती से लेकर भारत की नाराजगी या बदला या दोनों सामने आ सकती है.
अधिकारियों ने दी थी चेतावनीविंस्टन पीटर्स का आरोप है कि अधिकारियों ने इस मुद्दे पर मंत्रियों को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि प्रस्तावित बदलावों से भारत के साथ न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा कारोबार के लिए देश की साख खराब हो सकती है और सरकार को कानूनी चुनौतियों या नई दिल्ली की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा,
हमने ऐसे सबूत भी देखे हैं जिनमें अधिकारी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारतीय प्रतिक्रिया के डर से इन बदलावों की सार्वजनिक रूप से घोषणा नहीं की जानी चाहिए.
पीटर्स के अनुसार, जो प्रस्ताव दिए गए हैं, उनमें भारतीय नागरिकों के लिए लेबर मार्केट और आर्थिक जरूरतों का टेस्ट लागू करना शामिल है. गौर करने वाली बात यह है कि ये चीज FTA पार्टनर देशों के नागरिकों पर लागू नहीं होता. इसके तहत भारतीयों को न्यूजीलैंड के भीतर से अस्थायी वर्किंग एंट्री वीजा के लिए आवेदन करने से रोकना, पार्टनर और बच्चों के मामले में भारतीय नागरिकों के साथ अलग व्यवहार करना और उन्हें अस्थायी वर्किंग वीजा के दौरान मिले वर्क एक्सपीरिएंस को रेजिडेंसी की जरूरतों में शामिल करने से रोकना शामिल है.
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सरकार ने आरोपों को नकारासंसद में भारत-न्यूजीलैंड FTA बिल की पहली रीडिंग चल रही थी. इस दौरान, पीटर्स ने अपने आरोप दोहराए. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने भारत की प्रतिक्रिया के डर से बदलावों की घोषणा सार्वजनिक रूप से न करने पर चर्चा की थी. हालांकि यह बिल नेशनल, लेबर और ACT पार्टियों के समर्थन से 29 के मुकाबले 93 वोटों से पहली रीडिंग में पास हो गया, जबकि अन्य पार्टियों ने इसका विरोध किया.
ट्रेड मिनिस्टर टॉड मैक्ले ने पीटर्स के दावों को खारिज करते हुए कहा कि 'न्यूजीलैंड फर्स्ट' पार्टी का समझौते के बारे में सोचना गलत था. इससे पहले संसद में मैक्ले ने इस समझौते को "पीढ़ी में एक बार होने वाला" सौदा बताया था. इससे भारत को होने वाले मौजूदा एक्सपोर्ट के 95 प्रतिशत हिस्से पर टैरिफ कम हो जाएगा, और 57 प्रतिशत हिस्सा पहले दिन से ही ड्यूटी-फ्री हो जाएगा.
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