तो दीपावली आते ही मैं हीनभावना से ग्रस्त हो जाता हूं कि क्रीम कलर की शेरवानीपहनकर छुरछुरी काहे न छुडा रहा हूं. होली आते ही उदास होता हूं कि पीला वाला गुलालहमको कोई काहे नहीं लगाता. वो भी पीछे से. रक्षाबंधन पर बहनों को चॉकलेट का डिब्बाभी नहीं दिया था. उनने राखी भी बांध दी थी, पर जाने दिल से भाई मानती हैं या नहीं?ऐसे ही ईद पर होता है, किसी पड़ोसी का रोज़ा खुलाने का काम नहीं करता. कोई पड़ोसीगंगा-जमनी तहजीब टाइप्स इमोशनल होकर मेरी आंखों में नहीं देखता. क्रिसमस में कोईसंता हो हो हो कर मेरी ज़िंदगी में खुशियां नहीं घोलता. और ऐसा मेरे साथ क्यों होताहै? क्योंकि मैं उस टाइम वायरल हो रखे वीडियो बहुत देखता हूं. ये वीडियो अमूमन ऐडहोते हैं. स्लो मोशन में दिखा दी गई हर चीज इमोशनल होती है. इसी पंक्ति को आधार बनात्यौहारों के समय ढेरों वीडियो बनते हैं. इमोशनल चीजें दबाकर शेयर की जाती हैं औरजाहिर है बाजार गुणे के भाव में फैलता है. हर इमोशनल वीडियो एक आइडिया होता है औरसेंटी हुआ पड़ा आदमी एक कस्टमर. इसी इमोशन में लपेटकर मोबाइल भी बेच दिए जाते हैंजैसे देशभक्ति में डुबाकर मोटरसाइकिलें बेची जा रही हैं. बाजार अपना काम बहुत सलीकेसे करता है. बातें बुरी लगें तो ठीक इसी वक़्त के ट्विटर ट्रेंड चेक कीजिए. तो इसीसब की खिल्ली उड़ाता एक विज्ञापन आया है. जो तमाम ऐसे त्यौहारछाप घिसे-पिटेअतिइमोशनल विज्ञापनों की खिल्ली उड़ाता है. ये वीडियो दिखाता है कैसे दिवाली पर सारापरिवार स्लो मोशन में पास आता है (Crie!!!) देवदूत सरीखे बच्चे दिखाए जाते हैं. जोआपका दिल पिघलाकर बहा दें और हो सकता है घर का कमरा जला दें. पकी मूछों वालेरितायर्ड आईएएस टाइप बाबा जी होते हैं. जिनको देख आपका करेजा श्रद्धा में झुक जाएऔर गोड़ ले परने का जी करे. फिर वो पति भी जो बीवी को सरप्राइज दे. और आप आश्चर्यमें बूड़ जाइए क्योंकि आपको पता है उसमें सोने का कुछ होगा. सन 95 के बीमा विज्ञापनजैसा पियानो बजेगा और आप अति सेंटी हो पड़ेंगे. इतने में दाढ़ी वाला आदमी आकर आपकीबेइज्जती कर देगा. दर्शक-पाठक इस दाढ़ी वाले को जानते हैं. शेष हम न कहेंगे वीडियोदेखें. https://twitter.com/NetflixIndia/status/791209683700678656 कैसा लगावीडियो. याद रखिए अच्छा लगा हो तो इनका भी विज्ञापन ही हुआ है. ये काउंटर वालाइमोशन है. बाजार अपना काम बहुत सलीके से करता है.