नेपाल में सियासी बवाल, NC-CPN ने 'दोस्ती' कर ली, लेकिन प्रचंड ने PM पद छोड़ने से इनकार किया
नेपाल के पूर्व PM केपी शर्मा ओली की पार्टी ने चार महीने पहले ही नेपाल के मौजूदा प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की पार्टी को अपना समर्थन दिया था. लेकिन अब केपी शर्मा ओली ने शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस से गठबंधन किया है. नेपाल की संसद में इन दोनों दलों की कुल सीटें बहुमत के लिए काफी हैं.

नेपाल में दो सबसे बड़े राजनीतिक दल नेपाली कांग्रेस (NC) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) यानी CPN (UML) गठबंधन का समझौता कर चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक CPN (UML) की ओर से नेपाल के मौजूदा प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल से अपना पद छोड़ने की अपील भी की जा चुकी है. लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) यानी CPN (MC) के पुष्प कमल दहल प्रचंड ने प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया है. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री प्रचंड ने पद पर बने रहने और सदन में विश्वास मत हासिल करने की बात कही है.
इससे पहले केपी शर्मा ओली की CPN (UML) प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की CPN (MC) के साथ गठबंधन में थी. लेकिन अब नया गठबंधन बन गया है, जो सत्ता में आ सकता है. अगर ऐसा होता है, तो नेपाल में नवंबर, 2022 में हुए आम चुनाव के बाद चौथी बार सरकार बदलेगी.
नेपाल में 2022 के चुनाव में क्या हुआ था?साल 2022 के चुनाव में नेपाल की टॉप तीन पार्टियां थीं:
- शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस (NC). उनके खाते में 89 सीटें आई थीं.
- केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट). उनके पास 78 सीटें थीं.
- और, पुष्प कमल दहल प्रचंड की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर). प्रचंड के खाते में 32 सीटें आईं थी.
275 सीटों वाले नेपाल के प्रतिनिधि सदन में बहुमत के लिए 138 सीटों की जरूरत थी. इस तरह कोई पार्टी अकेले दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी. यूं तो शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल प्रचंड ने साथ में चुनाव लड़ा था, मगर पावर-शेयरिंग पर बात नहीं बनी तो गठबंधन टूट गया था. फिर प्रचंड ने केपी शर्मा ओली से हाथ मिला लिया. दूसरी छोटी पार्टियों के साथ बहुमत जुटा कर प्रचंड प्रधानमंत्री बन गए.
फिर आया मार्च 2023. नेपाल में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले थे. इसमें प्रचंड ने नेपाली कांग्रेस के कैंडिडेट राम चंद्र पौडेल को समर्थन दिया. इससे केपी शर्मा ओली नाराज हो गए. इसके तुरंत बाद प्रचंड ने शेर बहादुर देउबा के समर्थन से सरकार बना ली. उनके बीच समझौता हुआ था कि रोटेशनल बेसिस पर प्रधानमंत्री की कुर्सी का बंटवारा होगा. मगर ये आसान नहीं था. आखिरकार, मार्च 2024 में प्रचंड फिर से केपी शर्मा ओली के साथ चले गए. इस तरह देउबा की नेपाली कांग्रेस को विपक्ष में जाना पड़ा.
अब पुष्प कमल दहल को सत्ता से हटाने की तैयारीअब चौथी बार एक और गठबंधन बना है, लेकिन इस बार इसमें पुष्प कमल दहल प्रचंड की CPN (MC) नहीं है. अब तक प्रचंड जिन दो पार्टियों NC और CPN (UML) से बारी-बारी गठबंधन कर सरकार बनाते आए थे, अब उन्हीं दो पार्टियों ने आपस में गठबंधन कर लिया है.
नेपाली कांग्रेस की 89 सीटें और CPN-UML की 78 सीटें मिलाकर कुल 167 सीटें हुईं, जो 275 सदस्यों वाले सदन में बहुमत के 138 सीटों के आंकड़े के लिए काफी है. खबर है कि समझौते के तहत केपी शर्मा ओली डेढ़ साल तक नयी, ‘राष्ट्रीय सर्वसम्मति वाली सरकार’ का नेतृत्व करेंगे. बाकी के कार्यकाल के लिए देउबा प्रधानमंत्री रहेंगे.
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