The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • nepal government falls PM pushp kamal dahal prachanda lost the trust vote

नेपाल में सरकार गिर गई! विश्वास मत हारे PM प्रचंड ने दिया इस्तीफा, कौन बनेगा नया PM?

ज्यों ही वो विश्वास मत हारे, सांसदों ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को बधाई देनी शुरू कर दी. ओली और नेपाली कांग्रेस के प्रमुख शेर बहादुर देउबा के पास कुल 167 सांसद हैं.

Advertisement
nepal pm prachand
नेपाल PM पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' दिसंबर 2022 में प्रधानमंत्री बने थे. (फ़ोटो - सोशल)
pic
सोम शेखर
12 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 12 जुलाई 2024, 06:13 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' संसद में विश्वास मत हार गए हैं. 19 महीने पहले सत्ता संभालने वाले प्रचंड को अब कुर्सी छोड़नी पड़ेगी. कहा ये भी जा रहा है कि उन्होंने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. प्रचंड के तीसरे कार्यकाल में पर्याप्त उठापटक रही. गठबंधन टूटे-बने. पिछले चार विश्वास मतों में तो वो बच गए थे, लेकिन इस बार नहीं. 275 सीटों वाले नेपाल की संसद में केवल 63 सदस्यों ने ही प्रचंड का समर्थन किया. 194 उनके विरोध में थे.

ज्यों ही वो विश्वास मत हारे, सांसदों ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूनिफ़ाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को बधाई देना शुरू कर दिया. ओली और नेपाली कांग्रेस के प्रमुख शेर बहादुर देउबा के पास कुल 167 सांसद हैं. दोनों अपने-अपने सांसदों के दस्तख़त के साथ राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल से मिलकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे. 

कुछ दिन पहले ही ख़बर आई थी कि नेपाल में दो सबसे बड़े राजनीतिक दल - नेपाली कांग्रेस (NC) और CPN(UML) - गठबंधन का समझौता कर चुके हैं. CPN (UML) की ओर से प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल से अपना पद छोड़ने की अपील भी की गई थी. लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) यानी CPN (MC) के पुष्प कमल दहल प्रचंड ने प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया था.

नेपाल में 2022 के चुनाव में क्या हुआ था?

टॉप तीन पार्टियां थीं:

  • शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस (NC). उनके खाते में 89 सीटें आई थीं.
  • केपी शर्मा ओली की CPN-UML. उनके पास 78 सीटें थीं.
  • और, पुष्प कमल दहल प्रचंड की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओइस्ट सेंटर). प्रचंड के खाते में 32 सीटें आईं थी.

नेपाल की संसद में बहुमत का मैजिकल नंबर है, 138. माने कोई पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी. वैसे तो शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल प्रचंड ने चुनाव साथ लड़ा था, मगर पावर-शेयरिंग पर बात नहीं बनी और गठबंधन टूट गया था. फिर प्रचंड ने केपी शर्मा ओली से हाथ मिला लिया. दूसरी छोटी पार्टियों के साथ बहुमत जुटा कर प्रचंड प्रधानमंत्री बन गए.

ये भी पढ़ें - नेपाल में लोकतंत्र हटाने की मांग, 'हिंदू राष्ट्र' मांगने वालों पर लाठियां क्यों चल रही हैं?

मगर मार्च 2023 में - नेपाल राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले - प्रचंड ने नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार राम चंद्र पौडेल को समर्थन दिया. इससे केपी शर्मा ओली नाराज़ हो गए. इसके तुरंत बाद प्रचंड ने शेर बहादुर देउबा के समर्थन से सरकार बना ली. उनके बीच समझौता हुआ था कि रोटेशनल बेसिस पर प्रधानमंत्री की कुर्सी का बंटवारा होगा. मगर ये आसान नहीं था. आख़िरकार, मार्च 2024 में प्रचंड फिर से केपी शर्मा ओली के साथ चले गए. इस तरह देउबा की नेपाली कांग्रेस को विपक्ष में जाना पड़ा.

वीडियो: नेपाल से कैसे बच निकला दाऊद इब्राहीम? शाही परिवार के नरसंहार की भी कहानी जान लीजिए

Advertisement

Advertisement

()