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फोन टैपिंग केस: NSE के पूर्व CEO रवि नारायण को ED ने क्यों गिरफ्तार किया?

इस मामले में NSE की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण और पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

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पूर्व NSE चीफ रवि नारायण गिरफ्तार.
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ज्योति जोशी
7 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 7 सितंबर 2022, 01:58 PM IST)
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NSE कर्मचारियों के फोन टैपिंग मामले (Phone Tapping Case) में ED ने मंगलवार, 6 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के पूर्व CEO रवि नारायण (Ravi Narain) को गिरफ्तार किया है. इस मामले में पहले दो गिरफ्तारी हो चुकी हैं. NSE की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण (Chitra Ramakrishna) और पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे (Sanjay Pandey). ED का आरोप है कि उसने रवि नारायण को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया. जांच एजेंसी के मुताबिक रवि से कई सवाल पूछे गए थे, लेकिन एक बार भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला.

1994 से 2017 तक NSE से जुड़े रहे

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ईडी के पास रवि नारायण के खिलाफ सबूत मिले हैं. इसी आधार पर उन्हें मंगलवार की शाम को गिरफ्तार किया गया. रवि नारायण साल 1994 से 2013 के बीच अलग अलग पदों पर NSE से जुड़े रहे. अप्रैल 1994 से लेकर मार्च 2013 के बीच वो NSE के एमडी और सीईओ रहे थे. फिर अप्रैल 2013 में उन्हें गैर-कार्यकारी उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया. जून 2017 में रवि नारायण ने एक्सचेंज छोड़ दिया.

क्या है पूरा मामला? 

CBI ने आरोप लगाया गया था कि 2009 से 2017 के बीच NSE के कर्मचारियों के फोन अवैध रूप से टैप किए गए थे. एजेंसी के मुताबिक इस पूरी टैपिंग में उस समय NSE की एमडी रहीं चित्रा रामकृष्ण ने सक्रिय भूमिका निभाई थी. वहीं संजय पांडे पर आरोप है कि उनकी कंपनी iSec Services की मदद से ही NSE कर्मचारियों के फोन टैप किए गए थे. इस पूरे काम के लिए संजय को कथित रूप से 4.45 करोड़ रुपये भी मिले थे. सूत्रों के हवाले से CBI का दावा है कि इस अवैध फोन टैपिंग की अनुमति देने में रवि नारायण की भी भूमिका थी.

जांच के दौरान सामने आया कि इन बड़े अधिकारियों ने संजय पांडे की iSec Services के फेवर में कई एग्रीमेंट भी किए. बाकायदा फोन टैपिंग की मशीनें लगाई गईं ताकि NSE के कर्मचारियों पर नजर रखी जा सके. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के तहत फोन टैप करने के लिए सक्षम अधिकारियों से अनुमति लेना जरूरी है. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि ऐसी कोई परमिशन नहीं ली गई थी.

कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज 

इस पूरे मामले में कंपनी से जुड़े दूसरे बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है. इस लिस्ट में संतोष पांडे, आनंद नारायण, अरमान पांडे, मनीष मित्तल, नमन चतुर्वेदी जैसे बड़े नाम शामिल हैं. फोन टैपिंग कांड के वक्त ये सभी लोग कंपनी में बड़े पदों पर थे. ईडी ने CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर ही मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी.

देखें वीडियो- सरकारें किन नियम-कायदों के तहत करवाती है फोन टैप?

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