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पीएम मोदी को मिली जापानी गुड़िया का भारत कनेक्शन क्या है? कितना ही गिराओ फिर खड़ी हो जाती है

जापान के एक बौद्ध मंदिर के पुजारी ने पीएम मोदी को एक खास गुड़िया गिफ्ट की है. इसे दारुमा डॉल कहा जाता है, जिसे जापानी लोग सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं.

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पीएम नरेंद्र मोदी को जापान में खास गुड़िया गिफ्ट मिली है. (तस्वीर- पीटीआई)
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राघवेंद्र शुक्ला
29 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 29 अगस्त 2025, 08:13 PM IST)
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भारत और जापान के बीच साझा सांस्कृतिक संबंध के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दारुमा गुडि़या उपहार के तौर पर दी गई है. ताकासाकी गुन्मा में शोरिनजान दारुमा मंदिर के मुख्य पुजारी रेवरेंड सेशी हिरोसे ने ये गुड़िया पीएम मोदी को भेंट की है, जिसका संबंध भारत से भी जुड़ता है. पहली बात तो यही कि दारुमा को संस्कृत शब्द ‘धर्म’ से उपजा माना जाता है. दूसरा, यह एक बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म से संबंधित है, जो भारत के कांचीपुरम के रहने वाले थे. जापान में उन्हें ‘दारुमा दैशी’ कहा जाता था.

पीएम मोदी को मिली जापानी गुड़िया की कहानी

जापानी संस्कृति में काफी अहम मानी जाने वाली दारुमा गुड़िया आमतौर पर पेपर-माशी यानी कागज की लुगदी से बनाई जाती है. बोधिधर्म से मिलते-जुलते रूप के कारण इसका नाम दारूमी पड़ा होगा. जापान के लोग इस गुड़िया को धैर्य और सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं. यहां जब कोई अपना लक्ष्य तय करता है तो इस गुड़िया की एक आंख रंग देता है. लक्ष्य पूरा हो जाता है तो इसकी दूसरी आंख भी रंग दी जाती है. कुल मिलाकर इस गुड़िया से जापानी लोग सीखते हैं कि कभी हार नहीं माननी चाहिए और लक्ष्य चाहे कितने ही बड़े हों, वो पूरे होते हैं.

हार न मानने का संदेश इस गुड़िया की बनावट भी देती है. यह गोलाकार गुड़िया इस तरह बनाई जाती है कि अगर आप इसे गिराएं तो वह फिर से खड़ी हो जाती है. जापान में गुड़िया की इस खासियत को एक कहावत से जोड़ा जाता है कि 'सात बार गिरो. 8वीं बार उठ जाओ.'

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भारत से भी कनेक्शन

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दारूमा शब्द संस्कृत के ‘धर्म’ शब्द से निकला है. इस शब्द का चीनी या जापानी में सीधा अनुवाद न करके इसे थोड़ा सा बदलकर ‘दारुमा’ के तौर पर यूज किया जाने लगा. दारुमा गुड़िया बोधिधर्म के ‘स्थिर ध्यान’ का प्रतीक है. भारत के कांचीपुरम में जन्मे बोधिधर्म नाम के बौद्ध भिक्षु को जापान में दारुमा दैशी कहा जाता है. मान्यता है कि दारुमा दैशी ने चीन के हेनान प्रांत की एक गुफा में दीवार की ओर मुंह करके और हाथ-पैर मोड़कर लगातार 9 साल तक ध्यान किया था. इसीलिए दारुमा गुड़िया के हाथ और पैर नहीं होते.

बोधिधर्म ने चीन में बौद्ध धर्म की स्थापना की थी. इसी को जापान में जेन बौद्ध धर्म कहते हैं.

जापान के ताकासाकी शहर में शोरिन्जान दारुमाजी मंदिर है, जिसे 1697 में बनाया गया था. कहते हैं कि दारुमा डॉल पहली बार यहीं बनाई गई थी. इस मंदिर में हजारों की तादाद में दारुमा गुड़िया रखी होती है. ताकासाकी दारुमा डॉल बनाने का सबसे बड़ा केंद्र है.

शोरिन्जान दारुमाजी मंदिर का जापान में महत्व ऐसा है कि पुराने जमाने में जापान के सम्राट आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते थे. आज भी स्टूडेंट्स एग्जाम से और बिजनेसमैन कारोबार शुरू करने से पहले इस मंदिर में जाते हैं.

मोदी को गुड़िया देने वाले कौन हैं?
पीएम मोदी को ये गुड़िया देने वाले पुजारी सेइशी हिरोसे 1981 से ताकासाकी के दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी हैं. उन्होंने कोमाजावा यूनिवर्सिटी से बौद्ध धर्म की पढ़ाई की है और क्योटो के मन्पुकुजी मंदिर में जेन साधना की ट्रेनिंग ली है. 40 साल पहले वह भारत भी आए थे. 

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