The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Narco Test of Aftab to be done later, Polygraph test scheduled first

अभी नहीं होगा आफताब का नारको टेस्ट, क्यों?

आफताब के नारको टेस्ट के लिए कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी.

Advertisement
Narco test to be conducted later on Aftab, Polygraph test to be conducted earlier.
आफताब और श्रद्धा. (फाइल फोटो)
pic
प्रशांत सिंह
21 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 21 नवंबर 2022, 11:16 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

श्रद्धा वालकर मर्डर केस (Shraddha Murder Case) के आरोपी आफताब पूनावाला (Aftab Poonawala) का नारको टेस्ट (Narco test) आज नहीं किया जाएगा. नारको टेस्ट से पहले आफताब का पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph test) किया जाएगा. पॉलीग्राफ टेस्ट नारको टेस्ट का ही एक हिस्सा है. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को इसके लिए कोर्ट से इजाजत लेनी होगी. आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेस्ट के सात दिन के अंदर नारको टेस्ट किया जाता है. इसलिए आफताब का नारको टेस्ट होने में समय लगेगा.  

आफताब के नारको टेस्ट के लिए दिल्ली के एक कोर्ट ने 16 नवंबर के दिन पुलिस को मंजूरी दी थी. दिल्ली पुलिस ने 15 नवंबर को आफ़ताब अमीन पूनावाला का नारको टेस्ट कराने के लिए कोर्ट से मंजूरी मांगी थी. क्या है ये नारको टेस्ट और इससे क्या रिजल्ट आते हैं, सब विस्तार से बताते हैं.

क्या और क्यों होता है नारको टेस्ट?

नारको टेस्ट, एक ऐसा टेस्ट होता है, जिससे किसी इंसान को नींद या बेहोशी की स्थिति में लाया जाता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, इस टेस्ट के लिए कुछ दवाएं इंजेक्ट की जाती हैं. जैसे, सोडियम पेंटोथल, स्कोपोलामाइन और सोडियम अमायटल. इससे इंसान की सोचने की क्षमता या कल्पना बेअसर हो सकती है और उससे सही जानकारी निकाली जा सकती है.

इन दवाओं को ट्रुथ ड्रग (Truth Drug) के नाम से भी जाना जाता है. ये दवाएं किसी भी इंसान को आधा बेहोश कर देती हैं. इसी अवस्था में ही वो बोलता चला जाता है. साइकोलॉजी कहती है कि ऐसी हालत में इंसान झूठ नहीं बोल पाते हैं. क्योंकि झूठ बोलने के लिए दिमाग का इस्तेमाल करना पड़ता है, या सोचना पड़ता है, या कुछ बातें छिपानी होती हैं या कुछ कहानियां बनानी होती हैं. ये सब करने के लिए इंसान को दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ता है. लेकिन इन ट्रुथ ड्रग्स की वजह से इंसान ऐसा नहीं कर पाता है.

कैसे किया जाता है नारको टेस्ट?

रिपोर्ट्स के अनुसार, नारको टेस्ट करने के लिए कुछ चीजों का ध्यान रखा जाता है. नारको टेस्ट करने से पहले जो भी आरोपी व्यक्ति है उसका पूरा फिजिकल टेस्ट किया जाता है. ये टेस्ट इसलिए किया जाता है ताकि ये पता चल सके कि वो फिजिकली और मेंटली इस टेस्ट के लिए फिट है भी या नहीं. अगर वो फिट नहीं है, तो उसका नारको टेस्ट नहीं हो सकता है. इसके अलावा बच्चों, बुजुर्गों और स्पेशली एबल्ड लोगों का नारकोटेस्ट नहीं किया जा सकता है.

नारको टेस्ट शुरू करने से पहले हाथ की उंगलियों को पॉलीग्राफ मशीन से कनेक्ट किया जाता है. टेस्ट से पहले ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, ब्रीथिंग स्पीड और हार्ट रेट की रीडिंग ली जाती है. फिर इन सब के आधार पर ये फैसला लिया जाता है कि उसे दवाओं का कितना डोज देना है. शुरुआत में आसान सवाल पूछे जाते हैं. जैसे उसका नाम क्या है, परिवार के लोगों का नाम क्या है, उसके घर का पता क्या है, वो कहां काम करता है? वगैरह, वगैरह.

फिर बारी आती है कुछ झूठे सवालों की. ऐसे सवाल जिनके जवाब वो 'ना' में दे. जैसे अगर उसकी शादी नहीं हुई है, तो उससे पूछा जाएगा कि क्या वो शादीशुदा है? ऐसे सवाल पूछ कर ये जानने की कोशिश की जाती है कि व्यक्ति का शरीर जब कोई झूठ सुनता है, तो कैसी प्रतिक्रिया देता है? अगर वो सही जवाब दे रहा है तो उस समय उसकी बॉडी लैंग्वेज कैसी थी, ये देखा जाता है.

इसके बाद सख्त सवाल पूछे जाते हैं और उसके फिजिकल और मेंटल रिएक्शन्स का पता लगाया जाता है. हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं कि नारको टेस्ट से सच जाना ही जा सके. अगर आरोपी को कोई भी मेंटल या फिजिकल दिक्कत है, उसकी बॉडी शिवर करती है यानी कांपती है या दिल तेज धड़कता है, तो मशीन गलत डेटा भी बता सकती है.

वीडियो- CJI चंद्रचूड़ और कानून मंत्री ने बताया यंग दिखने में कौन किससे आगे?

Advertisement

Advertisement

()