मुर्शिदाबाद के दंगों में पिता-पुत्र की मौत हुई थी, अब इस सीट पर TMC कैंडिडेट का क्या हाल हुआ?
मुर्शिदाबाद मुस्लिम-बहुल क्षेत्र होने के बावजूद हिंदू वोटरों में ध्रुवीकरण और सुरक्षा के मुद्दे ने भाजपा को फायदा पहुंचाया है. इस सीट की राजनीति को समझने के लिए अप्रैल 2025 के वक्फ संशोधन कानून विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुए दंगों का जिक्र जरूरी है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में प्रदेश की 293 सीटों पर गिनती जारी है. अप्रैल 2025 में हुए दंगों में पिता-पुत्र की मौत के बाद चर्चा में आई मुर्शिदाबाद विधानसभा की तस्वीर कुछ साफ होती दिख रही है. ताजा रुझान अगर कायम रहे तो BJP प्रत्याशी Gouri Sankar Ghosh इस सीट पर एक बड़ी जीत दर्ज कर सकते हैं.
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के ताजा अपडेट के मुताबिक इस सीट पर 22 में 14 राउंड की काउंटिंग हो चुकी है. BJP प्रत्याशी गौरी शंकर घोष 44 हजार 213 वोटों से आगे हैं. दूसरे नंबर पर AITC (तृणमूल कांग्रेस) कैंडिडेट Shaoni Singha Roy हैं.
गौरी शंकर घोष को 14 राउंड के बाद 89 हजार 177 वोट मिले हैं. वहीं, शाओनी सिंघा रॉय को अभी तक 44 हजार 964 वोट मिले हैं. सीट पर तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अली सिद्दीकी हैं. उन्हें मात्र 6 हजार 410 वोट मिले हैं.
पिता-पुत्र की मॉब लिंचिंगमुर्शिदाबाद मुस्लिम-बहुल क्षेत्र होने के बावजूद हिंदू वोटरों में ध्रुवीकरण और सुरक्षा के मुद्दे ने भाजपा को फायदा पहुंचाया है. इस सीट की राजनीति को समझने के लिए अप्रैल 2025 के वक्फ संशोधन कानून विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुए दंगों का जिक्र जरूरी है. मुर्शिदाबाद का समसेरगंज क्षेत्र. यहां के जाफराबाद इलाके में हिंसक भीड़ ने हिंदू परिवार पर हमला किया. 72 वर्षीय हरगोबिंद दास पिता और उनके 42 वर्षीय बेटे चंदन दास को घर से घसीटकर बाहर निकाला गया और क्रूरता से हथियारों से काटकर मार डाला गया.
ये घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी. भीड़ ने न सिर्फ जान ली, बल्कि परिवार की महिलाओं के सामने ये सब किया. जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया.
दिसंबर 2025 में जंगीपुर कोर्ट ने इस मामले में 13 आरोपियों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई. लेकिन पीड़ित परिवार के लिए न्याय के साथ-साथ सरकारी मदद और सुरक्षा की कमी सबसे बड़ी शिकायत रही. चंदन दास की विधवा परुल दास ने खुलकर कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके घर तक आने की तकलीफ नहीं की. उन्होंने सुरक्षा, मुआवजे और सहानुभूति की उम्मीद में भाजपा का साथ देने का फैसला किया. परुल दास का कहना था, “मेरे सबसे बुरे वक्त में कोई नहीं आया, सिर्फ भाजपा वाले आए.” इस बयान ने स्थानीय हिंदू वोटरों में राज्य सरकार के लिए गुस्सा और भाजपा के लिए समर्थन और बढ़ा दिया.
पिछले नतीजे2021 में बीजेपी के गौरी शंकर घोष ने शैओनी सिंघा रॉय को महज 2491 वोटों (लगभग 1%) के अंतर से हराया था. तब भी ये सीट BJP के लिए ब्रेकथ्रू थी. 2026 में वक्फ दंगे, कानून-व्यवस्था की नाकामी और हिंदू सुरक्षा का मुद्दा BJP के पक्ष में वोट लाया. जाफराबाद जैसे हिंदू पॉकेट्स में ध्रुवीकरण साफ दिखा. भाजपा ने पूरे चुनाव में ममता सरकार पर हिंदुओं की उपेक्षा का आरोप लगाया. वहीं TMC ने विकास और अल्पसंख्यक कल्याण का मुद्दा उठाया. लेकिन दंगे की यादें भारी पड़ती दिख रही हैं.
वीडियो: बांग्लादेशी घुसपैठियों ने BJP को जिताया पश्चिम बंगाल?

