माफिया मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा
मुख़्तार अंसारी फ़िलहाल यूपी की बांदा जेल में बंद है.

माफिया और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) को गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई है. गाजीपुर की MP-MLA कोर्ट ने कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद दर्ज हुए गैंगस्टर एक्ट में यह फैसला सुनाया है. अंसारी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा है. बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में मुख्तार और उसका भाई अफ़ज़ाल दोनों बरी हो चुके हैं. कृष्णानंद राय की हत्या 29 नवंबर 2005 को हुई थी. दो साल बाद इसी मामले में मुख्तार के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का भी केस दर्ज हुआ था.
क्या है पूरा मामला?कृष्णानंद राय बीजेपी के विधायक थे. गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा से 2002 में विधायक बने थे. 29 नवंबर, 2005 को कृष्णानंद राय करीमुद्दीनपुर इलाके के सोनाड़ी गांव में एक क्रिकेट मैच के उद्धाटन में पहुंचे थे. बारिश का मौसम था, तो उन्होंने अपनी बुलेट प्रुफ कार छोड़ दी थी और साथियों को लेकर सामान्य गाड़ी से चले गए थे. क्रिकेट मैच का उद्घघाटन करने के बाद शाम के करीब 4 बजे वो अपने गांव गोडउर लौट रहे थे. रास्ते में बसनियां चट्टी के पास उनके काफिले को कुछ लोगों ने घेर लिया और एके 47 से फायरिंग कर दी. गाड़ी बुलेट फ्रुफ नहीं थी, जिससे कृष्णानंद राय और छह और लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.
पुलिस ने बताया था कि करीब 400 राउंड फायरिंग हुई थी. हत्याकांड के बाद पूर्वांचल में खूब हंगामा हुआ था. तब राज्य में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी. कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने मऊ के तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी, उनके भाई और सांसद अफजाल अंसारी के साथ कुख्यात शूटर मुन्ना बजरंगी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवाया था. जुलाई 2019 में सीबीआई कोर्ट ने दोनों भाई को बरी कर दिया था.
हालांकि 2007 में कृष्णानंद राय हत्याकांड में दर्ज हुए केस में मुख़्तार और उसके भाई के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का केस भी दर्ज हुआ था. गैंग चार्ट में मुख़्तार अंसारी पर कृष्णानंद राय मामले के साथ वाराणसी के कोयला व्यापारी नन्द किशोर रुंगटा के अपहरण मामले में भी नामजद किया गया था. वहीं अफ़ज़ाल अंसारी के खिलाफ सिर्फ कृष्णानंद राय हत्याकांड में दर्ज FIR के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई हुई थी.
मुख्तार अंसारी के अपराधमुख्तार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत 5 मामले दर्ज थे. दो वाराणसी, दो गाजीपुर और एक मामला चंदौली में दर्ज हुआ था. इन मामलों में- वाराणसी में दर्ज कृष्णानंद राय हत्याकांड और राजेंद्र सिंह हत्याकांड, गाजीपुर में वशिष्ठ तिवारी हत्याकांड और पुलिसकर्मियों पर हमला और चंदौली में कॉन्स्टेबल रघुवंश सिंह हत्याकांड शामिल हैं. पिछले साल दिसंबर में, 1996 के एक मामले में इसी एक्ट के तहत उसे 10 साल की सजा हुई थी.
यूपी में मुख्तार अंसारी के खिलाफ 61 केस दर्ज हैं. मऊ से पांच बार विधायक रहा अंसारी 15 साल से ज्यादा समय से जेल में है. हालांकि, पिछले साल ही उसे पहली बार दो मामलों में दोषी ठहराया गया. शुरू में प्रॉपर्टी बिजनेस और ठेकेदारी से जुड़े अंसारी ने 90 के दशक के आसपास अपराध की दुनिया में कदम रखा. 1988 में पहली बार हत्या के एक मामले में मुख्तार का नाम आया था. हालांकि पुलिस उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई थी. लेकिन इस मामले की वजह से मुख्तार चर्चा में आ गया था.
मुख़्तार अंसारी के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार ने जम कर कार्रवाई की है. 2017 से लेकर अबतक न सिर्फ मुख़्तार अंसारी से जुड़े मामलों में कानूनी सक्रियता बढ़ाई गई बल्कि मुख़्तार को आर्थिक चोट भी लगी. सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति या तो जब्त हुई या ध्वस्त कर दी गई. उसके विधायक बेटे अब्बास अंसारी पर हथियारों को लेकर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई. वहीं परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी मामले दर्ज हैं.
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