चुनावी हलफनामे से गायब एक बिछिया के चक्कर में मार दिए गए RTI कार्यकर्ता मुकेश दुबे?
'प्रोफेशनल कंप्लेनेंट' बताए जा रहे मुकेश ने 64 पंचायतों से जुड़ी कई जानकारियां RTI के ज़रिए निकलवाई थीं.
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मुकेश दुबे की लाश मंगलवार सुबह मुरैना के एक गांव में मिली थी
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मध्यप्रदेश का एक ज़िला है मुरैना. लोग इस ज़िले का नाम भिंड के साथ जोड़कर भिंड-मुरैना कहते हैं. इस पूरे इलाके के लोगों का खून कुछ गरम समझा जाता है. 'इज़्ज़त' पर बन आए तो लोग जान लेने-देने से गुरेज़ नहीं करते. पुलिस के मुताबिक इसी इलाके में एक बिछिया (शादीशुदा औरतें पैरों की उंगलियों में अंगूठी की तरह पहनती हैं) को लेकर शुरू हुई अदावत ने एक आरटीआई कार्यकर्ता की जान ले ली है.
27 सितंबर को मध्यप्रदेश पुलिस ने आरटीआई कार्यकर्ता मुकेश दुबे मर्डर केस को सुलझा लेने का दावा किया. मुकेश की लाश 26 सितंबर, 2017 को मुरैना के मटकोरा गांव के पास खेतों में मिली थी. मुरैना पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केस से जुड़ी जानकारी मीडिया को बताई.

मुकेश दुबे मुरैना के 64 गांवों से जुड़े मामलों के लिए लगातार RTI के ज़रिए जानकारी जुटा रहे थे.
कौन थे मुकेश दूबे?
मुकेश उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से थे. तकरीबन 20 साल से वो मुरैना ज़िले में पड़ने वाले गांव सुमावली में रह रहे थे. मुकेश के चाचा मध्यप्रदेश पुलिस से रिटायर हुए हैं. रिटायर होने से पहले उनकी पोस्टिंग मुरैना में रही थी. मुकेश अपने चाचा के सुमावली वाले घर में ही रहते थे. मुकेश ने मुरैना शहर के विक्रम नगर में एक घर भी किराए पर ले रखा था.
एक आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर मुकेश एक अरसे से मुरैना की जौरा तहसील में पड़ने वाली 64 पंचायतों से जुड़ी जानकारी प्रशासन से जुटाते रहते थे. अपनी इकट्ठा की जानकारी के आधार पर उन्होंने कई शिकायतें ज़िला पंचायत प्रशासन, मध्यप्रदेश लोकायुक्त और मध्यप्रदेश पुलिस को की थीं जिनके बाद कई मामलों में कार्रवाई भी हुई. मुकेश अपने काम को लगातार सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते थे.

22 सितंबर, 2017 को भी मुकेश ने एक फेसबुक पोस्ट में सुमावली सरपंच पर आरोप लगाए थे.
पुलिस के मुताबिक मुकेश दुबे ने मुरैना ज़िले में पड़ने वाले सुमावली गांव की सरपंच उपासना गुर्जर के कामों को लेकर कई आरटीआई दायर की थीं. ज़्यादातर आरटीआई एप्लीकेशन पंचायत में होने वाले भ्रष्टाचार से जुड़ी थीं. लेकिन एक आरटीआई चुनाव से पहले दिए उपासना गुर्जर के घोषणापत्र से जुड़ी भी थी. इसमें ये सामने आया कि उपासना ने अपने गहनों की जानकारी देते हुए अपनी बिछिया का ज़िक्र नहीं किया था. मुकेश ने ये जानकारी सोशल मीडिया पर एक सवाल के साथ शेयर की. उन्होंने लिखा कि बिछिया के बिना उपासना मनोज गुर्जर (उपासना के पति) की बीवी कैसे हैं? और अगर बिछिया है, तो वो सुमावली की सरपंच नहीं हैं.

मुकेश की हत्या के आरोपियों को पकड़ने के बाद मुरैना पुलिस ने 27 सितंबर को एक प्रेसनोट जारी किया
इन पोस्ट्स को बाद में मुकेश ने डिलीट भी कर दिया, लेकिन उपासना का परिवार इसे भूल नहीं पाया. पुलिस की आरंभिक जांच के मुताबिक 25 सितंबर, 2017 की रात को मुकेश मुरैना में एसएएफ पेट्रोल पम्प के पास खड़े थे. तभी उपासना गुर्जर का बेटा विक्रम सिंह गुर्जर अपने दो रिश्तेदारों के साथ बोलेरो लेकर पहुंचा. तीनों मुकेश को अगवाकर के मटकोरा गांव के पास खेतों में ले गए और बेस बॉल के डंडो से पीट-पीटकर हत्या कर दी. इसके बाद मुकेश की लाश वहीं छोड़कर भाग गए, जिसे अगले दिन लोगों ने देखा. इसके बाद पुलिस की जांच शुरू हुई.
ब्लैकमेलर थे मुकेश?
मुकेश की हत्या की खबर सामने आने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 'पुलिस के हवाले' से ये कहा गया कि मुकेश आरटीआई से जुटाई जानकारी के आधार पर लोगों को ब्लैकमेल करते थे. शायद इसलिए कि उनका अपना रिकॉर्ड बेदाग नहीं था. उन पर एक दर्जन आपराधिक मामले (क्रिमिनल केस) फ्रॉड, मारपीट और आर्म्स एक्ट की धाराओं में दर्ज थे.

मुरैना पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस. पुलिस का दावा है कि मुकेश दूबे मर्डर केस सुलझा लिया गया है
ब्लैकमेलिंग के इल्ज़ाम को लेकर मुरैना एसपी ने कहा,
पत्रकार गौरी लंकेश और फिर केजे सिंह की हत्या के बाद मुकेश का मामला सामने आया है. इसलिए इस केस में लोगों की दिलचस्पी रही. पुलिस कह रही है कि जांच फिलहाल चल रही है लेकिन शुरुआती जांच में मामला आपसी रंजिश का बताया जा रहा है. इस हिसाब से मध्यप्रदेश में किसी आरटीआई कार्यकर्ता या पत्रकार की हत्या के बाद वजह उसे पेशे से इतर बताए जाने का ये तीसरा मामला बन जाता है.

शेहला मसूद ने अपनी मौत से पहले अपनी जान का खतरा बताया था
अगस्त 2011 में चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या हो गई थी. सीबीआई जांच के बाद ये कहा गया कि उनकी हत्या भाजपा विधायक ध्रुव नारायण सिंह से उनके संबंधों के चलते हुई थी. शेहला ने मध्यप्रदेश में हीरा खदानों और पर्यावरण से जुड़े दूसरे मामलों को लेकर लगभग 200 आरटीआई फाइल की थीं और अपनी मौत से पहले आउटलुक मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कहा भी था कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है.
फरवरी 2012 में उमरिया ज़िले में पत्रकार चंद्रिका राय और उनके परिवार की हत्या के बाद भी सीबीआई ने मामला लूट का बताया था. चंद्रिका ने कोयला माफिया को लेकर बहुत काम किया था और कहा जा रहा था कि वो जल्द ही कोई बड़ा खुलासा करने वाले थे.
*तस्वीरें और जानकारी - गिर्राज राजौरिया
पत्रकार गौरी लंकेश के मारे जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी मौत का जश्न मनाते लोगों पर लल्लनटॉप टिप्पणीः
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27 सितंबर को मध्यप्रदेश पुलिस ने आरटीआई कार्यकर्ता मुकेश दुबे मर्डर केस को सुलझा लेने का दावा किया. मुकेश की लाश 26 सितंबर, 2017 को मुरैना के मटकोरा गांव के पास खेतों में मिली थी. मुरैना पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केस से जुड़ी जानकारी मीडिया को बताई.

मुकेश दुबे मुरैना के 64 गांवों से जुड़े मामलों के लिए लगातार RTI के ज़रिए जानकारी जुटा रहे थे.
कौन थे मुकेश दूबे?
मुकेश उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से थे. तकरीबन 20 साल से वो मुरैना ज़िले में पड़ने वाले गांव सुमावली में रह रहे थे. मुकेश के चाचा मध्यप्रदेश पुलिस से रिटायर हुए हैं. रिटायर होने से पहले उनकी पोस्टिंग मुरैना में रही थी. मुकेश अपने चाचा के सुमावली वाले घर में ही रहते थे. मुकेश ने मुरैना शहर के विक्रम नगर में एक घर भी किराए पर ले रखा था.
एक आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर मुकेश एक अरसे से मुरैना की जौरा तहसील में पड़ने वाली 64 पंचायतों से जुड़ी जानकारी प्रशासन से जुटाते रहते थे. अपनी इकट्ठा की जानकारी के आधार पर उन्होंने कई शिकायतें ज़िला पंचायत प्रशासन, मध्यप्रदेश लोकायुक्त और मध्यप्रदेश पुलिस को की थीं जिनके बाद कई मामलों में कार्रवाई भी हुई. मुकेश अपने काम को लगातार सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते थे.

22 सितंबर, 2017 को भी मुकेश ने एक फेसबुक पोस्ट में सुमावली सरपंच पर आरोप लगाए थे.
'दी लल्लनटॉप' से बातचीत में मुरैना एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने माना कि मुकेश की शिकायत के बाद सुमावली थाना इंचार्ज रहे एनके सिंह के खिलाफ कार्रवाई हुई थी. एनके सिंह के रहते उनके इलाके में चलने वाले जुए को लेकर मुकेश ने मध्यप्रदेश लोकायुक्त में भी शिकायत की थी.मुकेश की हत्या के पीछे वजह क्या थी?
पुलिस के मुताबिक मुकेश दुबे ने मुरैना ज़िले में पड़ने वाले सुमावली गांव की सरपंच उपासना गुर्जर के कामों को लेकर कई आरटीआई दायर की थीं. ज़्यादातर आरटीआई एप्लीकेशन पंचायत में होने वाले भ्रष्टाचार से जुड़ी थीं. लेकिन एक आरटीआई चुनाव से पहले दिए उपासना गुर्जर के घोषणापत्र से जुड़ी भी थी. इसमें ये सामने आया कि उपासना ने अपने गहनों की जानकारी देते हुए अपनी बिछिया का ज़िक्र नहीं किया था. मुकेश ने ये जानकारी सोशल मीडिया पर एक सवाल के साथ शेयर की. उन्होंने लिखा कि बिछिया के बिना उपासना मनोज गुर्जर (उपासना के पति) की बीवी कैसे हैं? और अगर बिछिया है, तो वो सुमावली की सरपंच नहीं हैं.

मुकेश की हत्या के आरोपियों को पकड़ने के बाद मुरैना पुलिस ने 27 सितंबर को एक प्रेसनोट जारी किया
इन पोस्ट्स को बाद में मुकेश ने डिलीट भी कर दिया, लेकिन उपासना का परिवार इसे भूल नहीं पाया. पुलिस की आरंभिक जांच के मुताबिक 25 सितंबर, 2017 की रात को मुकेश मुरैना में एसएएफ पेट्रोल पम्प के पास खड़े थे. तभी उपासना गुर्जर का बेटा विक्रम सिंह गुर्जर अपने दो रिश्तेदारों के साथ बोलेरो लेकर पहुंचा. तीनों मुकेश को अगवाकर के मटकोरा गांव के पास खेतों में ले गए और बेस बॉल के डंडो से पीट-पीटकर हत्या कर दी. इसके बाद मुकेश की लाश वहीं छोड़कर भाग गए, जिसे अगले दिन लोगों ने देखा. इसके बाद पुलिस की जांच शुरू हुई.
ब्लैकमेलर थे मुकेश?
मुकेश की हत्या की खबर सामने आने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 'पुलिस के हवाले' से ये कहा गया कि मुकेश आरटीआई से जुटाई जानकारी के आधार पर लोगों को ब्लैकमेल करते थे. शायद इसलिए कि उनका अपना रिकॉर्ड बेदाग नहीं था. उन पर एक दर्जन आपराधिक मामले (क्रिमिनल केस) फ्रॉड, मारपीट और आर्म्स एक्ट की धाराओं में दर्ज थे.

मुरैना पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस. पुलिस का दावा है कि मुकेश दूबे मर्डर केस सुलझा लिया गया है
ब्लैकमेलिंग के इल्ज़ाम को लेकर मुरैना एसपी ने कहा,
'मुकेश को आप प्रोफेशनल कंप्लेनेंट कह सकते हैं. वो लगातार अलग-अलग विभागों में अलग-अलग मसलों पर आरटीआई और शिकायतें दायर करता रहता था. इसलिए उसके कई दुश्मन थे और इलाके में उसके ब्लैकमेलर होने को लेकर बातें होती थीं लेकिन पुलिस को अपनी जांच में अब तक इस बात का कोई सुबूत नहीं मिला है कि मुकेश ने कभी किसी को ब्लैकमेल किया हो. उनकी शिकायतों में जब दम रहा है, तब पुलिस विभाग ने एक्शन लिया है. ऐसा ही ज़िला पंचायत से जुड़े मामलों में भी है.'ये एक अजीब पैटर्न है
पत्रकार गौरी लंकेश और फिर केजे सिंह की हत्या के बाद मुकेश का मामला सामने आया है. इसलिए इस केस में लोगों की दिलचस्पी रही. पुलिस कह रही है कि जांच फिलहाल चल रही है लेकिन शुरुआती जांच में मामला आपसी रंजिश का बताया जा रहा है. इस हिसाब से मध्यप्रदेश में किसी आरटीआई कार्यकर्ता या पत्रकार की हत्या के बाद वजह उसे पेशे से इतर बताए जाने का ये तीसरा मामला बन जाता है.

शेहला मसूद ने अपनी मौत से पहले अपनी जान का खतरा बताया था
अगस्त 2011 में चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या हो गई थी. सीबीआई जांच के बाद ये कहा गया कि उनकी हत्या भाजपा विधायक ध्रुव नारायण सिंह से उनके संबंधों के चलते हुई थी. शेहला ने मध्यप्रदेश में हीरा खदानों और पर्यावरण से जुड़े दूसरे मामलों को लेकर लगभग 200 आरटीआई फाइल की थीं और अपनी मौत से पहले आउटलुक मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कहा भी था कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है.
फरवरी 2012 में उमरिया ज़िले में पत्रकार चंद्रिका राय और उनके परिवार की हत्या के बाद भी सीबीआई ने मामला लूट का बताया था. चंद्रिका ने कोयला माफिया को लेकर बहुत काम किया था और कहा जा रहा था कि वो जल्द ही कोई बड़ा खुलासा करने वाले थे.
*तस्वीरें और जानकारी - गिर्राज राजौरिया
पत्रकार गौरी लंकेश के मारे जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी मौत का जश्न मनाते लोगों पर लल्लनटॉप टिप्पणीः
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