मोरबी हादसे का एक साल: गोद लिए बच्चों को दे रहे अपने मृत बच्चों का नाम
बच्चों को खोने का दुख तो कोई नहीं भूल सकता. अब परिवार बच्चे गोद ले रहे हैं. मुआवज़े के पैसों से IVF करवा रहे हैं.

2022 में 30 अक्टूबर के ही रोज़ गुजरात के मोरबी शहर में मच्छू नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज गिर गया था (Morbi bridge collapse). 135 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 55 बच्चे थे. एक हादसे पर ज़िंदगी ठहर तो नहीं सकती, लेकिन मां-बाप अपने बच्चे को भुलाते तो कैसे. इंडियन एक्सप्रेस के लिए सोहिनी घोष ने मोरबी से एक रिपोर्ट की है, जो बताती है कि कैसे लोग फिर मां-बाप बन रहे हैं. और इन बच्चों को अपने मृत बच्चों का नाम दे रहे हैं.
मुआवज़े के पैसों से IVF करवायाइस हादसे में कांताबेन मुछड़िया के 20, 18 और 16 साल के तीन बेटों की मौत हो गई थी. कांताबेन की उम्र 40 साल है और उनके पति की उम्र 42 साल. इस उम्र में फिर से माता-पिता बनने के लिए उन्होंने आईवीएफ (In vitro fertilization) का रास्ता चुना. आईवीएफ से उन्हें एक बेटा हुआ जिसका नाम उन्होंने अपने एक मृत बेटे के नाम पर रखा.
गुजरात सरकार और केंद्र सरकार ने साझा रूप से पीड़ित परिवारों को मुआवजे में 10 लाख रूपए दिए थे. कांताबेन ने इन पैसों से आईवीएफ कराया.
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बच्चों को गोद लिया, दूसरी शादी कीइस हादसे में मीरा परिवार ने अपनी 20 साल की बेटी नफीसा को खो दिया. बाद में उन्होंने एक बच्ची को गोद लिया. कांताबेन की ही तरह मीरा परिवार ने भी बच्ची का नाम नफीसा के नाम पर रखा.
वाकानेर के दो भाइयों का इस हादसे में सब कुछ लुट गया. प्रद्युम्न सिंह जाड़ेजा और प्रताप सिंह जाड़ेजा भाई हैं. मोरबी में जब ‘झूलतो पुल’ गिरा, तो दोनों भाइयों की मां, पत्नियों और सारे बच्चों की मौत हो गई. पूरी तरह उजड़ चुके भाइयों ने ज़िंदगी में नई शुरुआत के लिए फिर शादी की है. लेकिन दोनों कहते हैं कि उनका मन अब मोरबी में नहीं लगता. क्योंकि घर खाली खाली लगता है.
क्या हुआ था एक साल पहले?
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुल गिरने के 12 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज की गई थी. इस एफआईआर के आधार पर 10 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था. इनमें से 5 जमानत पर बाहर आ गए हैं. इस पूरे मामले की सुनवाई मोरबी के सेशन कोर्ट में चल रही है.
इस दुर्घटना की जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी ने 10 अक्टूबर, 2023 को गुजरात हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट के मुताबिक बहुत ज्यादा वजन होने के कारण पुल गिर गया था. पुल के 49 में से 22 केबल जंग लगने के कारण टूट गए थे. उनकी मरम्मत नहीं की गई थी.
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