मायावती ने 27 साल पहले की कहानी दुहराई, इस ऐलान ने सबको चौंकाया
मायावती ने कहा कि BSP को अकाली दल पर पूरा भरोसा है.

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर राजनीतिक दलों ने गुणा-भाग शुरू कर दिया है. एनडीए के खिलाफ विपक्षी दलों के नेता राष्ट्रीय मोर्चा बनाने की तैयारी में जुटे हैं. दूसरी तरफ, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने पहले ही पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है. 2 फरवरी को BSP प्रमुख मायावती और अकाली दल चीफ सुखबीर सिंह बादल ने पार्टी नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक की. इसके बाद इस गठबंधन की घोषणा की गई. दोनों पार्टी 2022 का विधानसभा चुनाव भी साथ लड़ चुकी है.
गठबंधन की घोषणा करते हुए BSP प्रमुख मायावती ने कहा कि आम लोग कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी से नाराज हैं. मायावती ने ट्विटर पर लिखा,
"अकाली दल और बीएसपी गठबंधन भरोसेमंद, जिसकी ओर जनता की नजर. लोकसभा में इसके अच्छे रिजल्ट से देश की राजनीति में बेहतर तब्दीली संभव. पहले कांग्रेस और अब AAP पार्टी सरकार के कार्यकलापों और वादाखिलाफी आदि से जनता दुखी. भाजपा की जुगाड़ वाली निगेटिव राजनीति भी लोगों को नापसंद."
बहुजन समाज पार्टी ने अपने बयान में कहा कि लोकसभा चुनाव में यूपी में गठबंधन को लेकर अभी से भ्रम फैलाया जा रहा है. ये भी कहा गया है कि राज्य स्तर पर अभी तक पार्टी ने जो भी चुनावी गठबंधन किया, उससे सिर्फ पंजाब को छोड़कर पार्टी को नुकसान ही हुआ है.
मायावती ने बैठक के बाद की एक तस्वीर भी शेयर की. इसमें उनके साथ सुखबीर सिंह बादल और बठिंडा से लोकसभा सांसद हरसिमरत कौर बादल भी हैं. सुखबीर बादल फिरोजपुर से सांसद भी हैं. साल 2019 के चुनाव में अकाली दल को सिर्फ इन्हीं दो सीटों पर जीत मिली थी. बठिंडा और फिरोजपुर. पंजाब में कुल 13 लोकसभा सीटें हैं. पिछले चुनाव में कांग्रेस के आठ, बीजेपी के दो सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचे थे.
1996 लोकसभा चुनाव में दोनों दलों का जलवाइससे पहले 1996 में बसपा और अकाली दल दोनों ने साथ में लोकसभा चुनाव लड़ा और संयुक्त रूप से 13 में से 11 सीटों पर जीत हासिल की थी. 27 साल पहले उस चुनाव में BSP सभी तीन सीटों और अकाली दल 10 में से आठ सीटें जीती थी. इसके बाद दोनों पार्टियां पिछले विधानसभा चुनाव में साथ आईं थी.

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने पंजाब से ही अपनी राजनीति शुरू की थी. राज्य में दलित समुदाय के वोटों की संख्या करीब 33 फीसदी है. बीएसपी पंजाब में पिछले 27 सालों से विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव लड़ती रही है, लेकिन पार्टी को राज्य में कभी बड़ी जीत हासिल नहीं हुई. पिछला विधानसभा चुनाव साथ लड़ने के बावजूद BSP को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी. वहीं अकाली दल भी सिर्फ तीन सीट जीत पाई थी.
अकाली दल ने साल 2020 में बीजेपी से नाता तोड़ लिया था. अकाली दल ने तीन नए कृषि कानूनों का विरोध किया था. 26 सितंबर 2020 को पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने एनडीए से अलग होने का ऐलान किया था. हरसिमरत कौर बादल ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.
वीडियो: नेतानगरी: 2024 के लोकसभा चुनावों में किसको कितनी सीटें मिलेंगी?

