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ज्ञानवापी के बाद ईदगाह मस्जिद का होगा सर्वे? मथुरा कोर्ट का बड़ा फैसला आया

ईदगाह मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर विवाद में मथुरा कोर्ट में 10 मामले दर्ज हैं. लेकिन, ईदगाह मस्जिद पक्ष के वकील सर्वे की मांग को जरूरी नहीं मानते हैं.

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13 मई 2022 (अपडेटेड: 13 मई 2022, 06:12 PM IST)
Mathura Idgah Masjid
मथुरा स्थित ईदगाह मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर (फाइल फोटो- आज तक)
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देश में मंदिर और मस्जिद को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. वाराणसी (Varanasi) की ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) के बाद अब मथुरा (Mathura) में शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) में सर्वे कराने की मांग वाली याचिका स्वीकार कर ली गई है. याचिकाकर्ता मनीष यादव ने कोर्ट कमिश्नर के जरिये सर्वे कराने की मांग की थी जिसे मथुरा कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. इस मामले की सुनवाई 1 जुलाई तय की गई है. ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) मथुरा (Mathura) के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के ठीक बगल में है.

याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

आजतक से जुड़े मदन गोपाल शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता मनीष यादव के वकील देवकीनंदन ने कहा,

"ईदगाह के अंदर जो शिलालेख हैं, उन्हें दूसरे पक्ष के द्वारा हटाया जा सकता है और सबूतों को नष्ट किया जा सकता है. दोनों पक्षों की मौजूदगी में वहां की वीडियोग्राफी कराई जाए."

वहीं एक और याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले इस मामले में 24 फरवरी 2021 को एक प्रार्थना पत्र कोर्ट में दिया था. इसमें वीडियोग्राफी कराने के लिए कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की मांग की थी. उन्होंने कहा कि प्लेस ऑफ बर्थ (वर्शिप) एक्ट के कारण उस पर कोई फैसला नहीं हो पाया. जिसके बाद उन्होंने 9 मई, 2022 को एक और प्रार्थना पत्र दिया. मनीष यादव और महेंद्र प्रताप सिंह के अलावा दिनेश शर्मा ने भी एक याचिका दाखिल की थी. जिसमें भी सर्वे के लिए ईदगाह मस्जिद की वीडियोग्राफी कराने की मांग की गई थी.

'वीडियोग्राफी की जरूरत नहीं'

ईदगाह मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर विवाद में मथुरा कोर्ट में 10 मामले दर्ज हैं. लेकिन, ईदगाह मस्जिद पक्ष के वकील सर्वे की मांग को जरूरी नहीं मानते हैं. उन्होंने आजतक से बातचीत में बताया,

"याचिकाकर्ता पिछले 2 सालों में अलग-अलग तरह के प्रार्थना पत्र देते रहे हैं. उन्हें पता ही नहीं है कि वह आखिर कहना क्या चाहते हैं. मथुरा में दोनों समुदाय के धर्मस्थल अलग-अलग हैं. इसलिए वीडियोग्राफी की कोई जरूरत नहीं है."

Mathura Mandir
मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर (फाइल फोटो- पीटीआई)

 

इससे पहले गुरुवार, 12 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा कोर्ट को ईदगाह मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े सभी मामलों को चार महीने के भीतर निपटाने का आदेश दिया था. हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह भी कहा कि अगर सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड या दूसरे पक्षकार शामिल नहीं होते हैं, तो कोर्ट एकपक्षीय आदेश जारी कर सकता है. हाई कोर्ट ने ये आदेश भी मनीष यादव की याचिका पर दिया था. मनीष यादव ने मामले की जल्द सुनवाई के लिए मथुरा कोर्ट को निर्देश देने की मांग की थी.

शाही ईदगाह मस्जिद पर 19 मई को आएगा फैसला?

लखनऊ की रहने वाली रंजना अग्निहोत्री ने मथुरा सेशन्स कोर्ट में श्री कृष्ण जन्मभूमि के पास 13.37 एकड़ ज़मीन के मालिकाना हक को लेकर याचिका लगाई थी. उन्होंने कोर्ट से मांग करते हुए कहा कि शाही ईदगाह मस्जिद को हटाया जाए क्योंकि मस्जिद की जगह केशव देव मंदिर था, जिसे बाद में गिरा दिया गया था. याचिका में ये भी कहा गया कि इसी 13.37 एकड़ परिसर में मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर मस्जिद बनाई गई थी. इस मामले में 6 मई को सुनवाई पूरी हो चुकी है. 19 मई को फैसला भी आने वाला है. सेशन्स कोर्ट के जज राजीव भारती इस मामले में फैसला सुनाएंगे.

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