पानी बचाने की लड़ाई में जुड़े 'मसान' वाले नीरज घेवान और वरुण ग्रोवर
युवा फिल्मकारों ने अपनी नेशनल अवार्ड में मिली पुरस्कार राशि को डोनेट किया था. अब मदद के ब्लूप्रिंट के साथ सामने आए
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फोटो - thelallantop
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आपको याद होगा. फिल्म 'मसान' के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले युवा निर्देशक नीरज घेवान और नेशनल अवार्ड जीतने वाले गीतकार और लेखक वरुण ग्रोवर ने अपने पुरस्कार में मिली राशि (दोनों की ओर से 50 हजार) को महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों की मदद के लिए देने का फैसला किया था.
इससे जुड़ी पूरी खबर यहाँ है.
अच्छी बात ये हुई कि इस फैसले को पब्लिक करने के बाद नीरज और वरुण के साथ और कई मददगार हाथ आ जुड़े. गायिका सोना मोहपात्रा, संगीतकार राम संपत, स्टैंडअप कॉमेडी ग्रुप एआईबी, प्रेसेंटर और अभिनेता गौरव कपूर, घंटा पुरस्कार टीम जैसे कई लोग साथ आए. कितने ही अनजान लोगों ने कहा कि वे भी मदद करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें कोई सही रास्ता नहीं पता. बहुत सारे लोगों ने सोशल मीडिया के ज़रिये उनसे ये भी पूछा कि वो कैसे मदद कर सकते हैं? सही जगह और सही हाथों तक मदद पहुंचे तो वे भी इस समस्या से लड़ने में साथ हैं.
नीरज और वरुण ने इस बारे में अपनी सर्च की. अब वरुण और नीरज ने एक ब्लॉग पोस्ट के ज़रिये उन संस्थाओं और व्यक्तियों के कामों के बारे में बताया है, जिनके काम को देखकर वे प्रभावित हुए और जिनके ज़रिये उन्होंने आगे मदद का हाथ बढ़ाने का फैसला किया है.
वरुण ने ब्लॉग पोस्ट में लिखा,
'हम उन लोगों और संस्थाओं को खोज रहे थे जो प्रभावित इलाकों में वैज्ञानिक दृष्टि से लम्बे समय तक बना रहने वाला और स्थायी किस्म का काम कर रहे हैं. परेशानी में फंसे किसानों की सीधे मदद करना भी बहुत ज़रूरी काम है, (जैसा मकरंद अनसपुरे और नाना पाटेकर का 'नाम' तथा कुछ अन्य लोग पर रहे हैं) लेकिन हम ऐसे प्रयासों का समर्थन करना चाहते थे जो समस्या की जड़ तक जाए. क्योंकि जैसा पी साईनाथ इतने सालों से बताते रहे हैं - यह अकाल दरअसल खुद इंसान का बनाया हुआ है. अगर सही तरह से पानी बचाने और उसके संरक्षण का काम हो, तो हम सूखे के असर को काफी हद तक कम कर सकते हैं.'वरुण ने नीरज की पोस्ट भी साथ शेयर की है, और 'पानी फाउंडेशन' के काम का ज़िक्र किया है. पानी फाउंडेशन सत्यजित भटकल की शुरू की संस्था है, जो अकाल पीड़ित तीन तालुकाओं के 115 गावों में जल संरक्षण का काम कर रही है. नीरज खुद सतारा जाकर इनका काम और उत्साह देखकर आए हैं और उन्होंने अपनी पोस्ट में इसके बारे में विस्तार से बताया है. अच्छी बात ये है कि ये सारे गांव अकाल की दशा से स्थाई रूप से बाहर निकलने के लिए पानी को लेकर आत्मनिर्भर बनने की कोशिशों में लगे हैं. अगर एक भी गांव में ऐसी कोशिश सच साबित हो जाए, तो यह कमाल की बात होगी. वरुण की पोस्ट में अभिनेता राजश्री देशपांडे ने बीड के पास पंधेरी गांव में जो काम किया है, उसका भी जिक्र है. देशपांडे वहां सूखी नदी को वापस ज़िंदा करने में लगी हैं, जिससे जब मानसून में बारिश आये, तो नदी गांव को वापस ज़रुरत का पानी दे और इलाका आत्मनिर्भर बने. जो अन्य लोग मदद के लिए इच्छुक हैं, वरुण ने उनके लिए दोनों संस्थाओं का पता ठिकाना भी लिख भेजा है. लेकिन साथ ही फेसबुक पर उन्होंने ये भी लिखा है कि पैसे से मदद करने के बजाए अगर हम खुद ज़मीन पर जाकर काम कर पाएं, तो वो सबसे अच्छा होगा. अगर हम किसी सूखा प्रभावित गांव में जाकर कुछ दिन बिताएं और मदद के काम में शामिल हों, तो हमें खुद बहुत कुछ सीखने को मिलेगा. और हम शहरी लोगों को अगर काम, नौकरियां इसकी इजाज़त ना दें तो कम से कम हमें अपने शहरी जीवन में तो पानी और पर्यावरण बचाने को लेकर सचेत हो जाना चाहिए. आज से ज्यादा ये कभी सच नहीं था कि 'हर बूंद कीमती है'. वरुण की फेसबुक पोस्ट यहां - [facebook_embedded_post href="https://www.facebook.com/vidushak/posts/10153620213388519"] बूंद-बूंद से घड़ा भर रहा है.

