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मेनका गांधी सपा नेता के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचीं, कहा- 'इनकी सांसदी रद्द हो, मुझे जीता घोषित किया जाए'

पूर्व केंद्रीय मंत्री और BJP नेता मेनका गांधी ने सुल्तानपुर से सपा सांसद रामभुआल निषाद की सांसदी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने निषाद पर चुनाव आयोग से कुछ 'अहम जानकारी' छिपाने का आरोप लगाया है. कोर्ट से मेनका ने कहा क्या है?

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28 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 28 जुलाई 2024, 12:08 PM IST)
Menka gandhi varun gandhi rambhual nishad sp bjp
मेनका गांधी (बाएं) ने रामभुआल निषाद (दाएं) के निर्वाचन को चुनौती दी है. (फाइल फोटो, इंडिया टुडे)
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पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने यूपी के सुल्तानपुर से सांसद रामभुआल निषाद के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने रामभुआल निषाद पर आपराधिक इतिहास छिपाने का आरोप लगाया है. और कोर्ट से उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है. रामभुआल निषाद सुलतानपुर लोकसभा सीट से SP के टिकट पर मेनका गांधी को हराकर सांसद बने हैं.

आजतक से जुड़े समर्थ श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, मेनका गांधी की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रशांत सिंह अटल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक याचिका दायर की है. याचिका के मुताबिक रामभुआल निषाद पर 12 मुकदमें दर्ज हैं, लेकिन उन्होंने चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में केवल 8 मुकदमों की जानकारी दी है. उन पर गोरखपुर के पिपराइच थाने के दो और बड़हलगंज थाने में दर्ज तीन आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है. याचिका में रामभुआल निषाद का निर्वाचन रद्द करके मेनका गांधी को निर्वाचित घोषित करने की मांग की गई है. याचिका पर 30 जुलाई को सुनवाई होने की उम्मीद है.

2024 लोकसभा चुनावों में सुल्तानपुर लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी मेनका गांधी अपनी सीट बचाने में असफल रहीं. समाजवादी पार्टी के रामभुआल निषाद ने उनको 43174 वोटों से शिकस्त दी.

कौन हैं रामभुआल निषाद?

रामभुआल निषाद गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र के दवनडीह गांव के रहने वाले हैं. अपने 28 साल के राजनीतिक करियर में वे बसपा, सपा और बीजेपी में लगातार आवाजाही करते रहे हैं.  रामभुआल निषाद ने अपना पहला चुनाव 1996 में गोरखपुर के चिल्लूपार विधानसभा सीट से निर्दलीय लड़ा था. यहां उनका मुकाबला बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी से था. इस चुनाव में रामभुआल निषाद को 6983 वोट मिले थे. रामभुआल निषाद 2024 लोकसभा चुनाव से पहले सात विधानसभा और दो लोकसभा चुनाव लड़ चुके थे. जिसमें उन्हें सिर्फ दो बार सफलता मिली. वे 2002 विधानसभा चुनाव और 2006 विधानसभा उपचुनाव में गोरखपुर के कौड़ीराम विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. 2007 की बसपा सरकार में उनको मत्स्य राज्य मंत्री बनाया गया था.

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योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में रामभुआल निषाद गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं. इस चुनाव में वे तीसरे स्थान पर रहे थे. 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद रामभुआल निषाद भाजपा में शामिल हो गए. उन्हें उम्मीद थी कि 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर ग्रामीण या चौरीचैरा से भाजपा का टिकट मिलेगा, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला. नाराज हो उन्होंने भाजपा छोड़ दी और सपा में शामिल हो गए.

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