दिवाली पार्टी में हिरण का शिकार करने निकले थे, गोली दोस्त को लगी, मौत
शव को चुपचाप दफनाने की कोशिश भी हुई थी.

हिरण का शिकार करना भारत में प्रतिबंधित है. लेकिन जनता सुनती कहां है. शिकार होता है, और जमकर होता है. इस चक्कर में तमिलनाडु में एक दोस्त के हाथ से दोस्त की जान चली गई. तिरुवन्नामलई ज़िले में 3 दोस्त - शक्तिवेल, प्रकाश और शक्तिवासन दिवाली की ‘पार्टी’ के लिए हिरण का शिकार करने निकले. प्लान था कि दिवाली की दावत में हिरण का मांस ही खाएंगे. हिरण दिखा तो शक्तिवासन ने बंदूक का ट्रिगर दबा दिया. पर यहां गड़बड़ हो गई. गोली हिरण की जगह उसके दोस्त शक्तिवेल को लगी. शक्तिवेल की तुरंत मौत हो गई और प्रकाश के चेहरे पर चोट आई है.
चुप-चाप शव दफनाने की कोशिश की
तमिल नाडु का तिरुवन्नामलई जंगल से लगा है. अक्सर यहां से हाथियों के उत्पात के खबरें आती रहती हैं. इंडिया टुडे से जुड़े प्रमोद माधव की रिपोर्ट के मुताबिक शक्तिवेल के परिवार वालों ने कथित तौर पर बिना पुलिस या फॅारेस्ट विभाग को बताए उसकी डेडबॅाडी को दफनाने की कोशिश की. हालांकि जमुनामरतूर पुलिस ने बॅाडी को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
क्या कहता है कानून
भारत में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते गेम हंटिंग पर प्रतिबंध लग गया था. माने आप मज़े के लिए किसी जानवर की हत्या (शिकार) नहीं कर सकते. आप तभी किसी जानवर की जान ले सकते हैं, जब वो आत्मरक्षा के लिए ज़रूरी हो. किसी दूसरे कारण से जानवर या जानवरों को मारने की ज़रूरत पड़े, मसलन आबादी पर काबू पाना या फिर फसलों की रक्षा आदि, तो इसके लिए विधिवत अनुमति की ज़रूरत पड़ती है. ये सारे नियम आए जब साल 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित हुआ था. इससे वन्यजीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार को कानूनी रूप से अपराध की संज्ञा दे दी गई. इसे वर्ष 2003 में संशोधित किया गया. तब इसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा गया.
तिरुवन्नामलई वाले मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है. तीसरे व्यक्ति की तलाश जारी है.
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