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'इस्लाम कुबूल कर लो, नहीं तो हाथ और टांग काट दी जाएगी'

अब इस राइटर ने ऐसा क्या लिख दिया, जो धमकी मिली है

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22 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 22 जुलाई 2017, 07:30 AM IST)
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टी जे जोसफ को 2010 में मुहम्मद साहब का कथित अपमान करने की बात पर हाथ पैर काट दिया गया था.
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धर्म के नाम पर जितना बवाल हो रहा है. उससे ऐसा लगता है कि वो लोगों की शांति के लिए नहीं बल्कि भावनाएं आहत करने के लिए और लोगों के झगड़े के लिए है. धर्म के नाम पर लोगों का दिमाग शून्य हो जाता है. कोई अगर अच्छी बात भी कहे तो उन्मादी उसे ऐसे तोड़ मरोड़कर पेश करते हैं कि हंगामा बरपा हो जाए. अब धर्म आधार बनाकर दो लोगों को धमकाया गया है. और दोनों मामले केरल के हैं. मलयालम के राइटर केपी रमनउन्नी ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर कुछ लेख लिखे तो इस बात पर उन्हें कहा जा रहा कि वह इस्लाम कबूल लें या फिर अंजाम भुगतने को तैयार रहें. 6 महीने के अंदर इस्लाम नहीं कुबूल किया तो हाथ-पैर काट दिए जाएंगे.
दूसरा मामला एक महिला प्रोफेसर का है. इस महिला ने चित्रकार एम एफ हुसैन की सरस्वती वाली विवादित पेंटिंग को सही ठहराया था. अब उन्हें सोशल मीडिया पर एसिड अटैक तक की धमकियां मिल रही हैं.
पुलिस ने दोनों ही मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. लेकिन पुलिस को ऐसे मामलों में जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी एक्शन लेना चाहिए. ताकि धर्म के नाम पर बवाल मचाने वालों की उनकी उचित जगह यानी सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके.
राइटर के पी रामउन्नी
राइटर के पी रमनउन्नी.

राइटर केपी रमनउन्नी को धमकी भरा एक पत्र मिला है. पत्र में लिखा है,
'हम तुम्हें 6 महीने का टाइम दे रहे हैं. इस्लाम कुबूल कर लो, वरना तुम लंबे वक्त तक छिपे नहीं रह पाओगे, इसलिए जल्दी पांच वक्त की नमाज पढ़नी और रोजा रखने के लिए तैयार हो जाओ. नहीं तो तुम्हें वही सजा मिलेगी जो कि इस्लाम को न मानने वाले को दी जाती है. क्योंकि तुम्हारे लेख पढ़कर लोग भटक गए हैं.'
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कोझिकोड इलाके में रहने वाले रमनउन्नी ने रमजान के दिनों में लिखा था कि हिंदू मुस्लिमों के दुश्मन नहीं हैं. रमनउन्नी का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि रमजान के दिनों में उनके आर्टिकल की खूब तारीफ हुई. अचानक अब ऐसा क्या हो गया, जो इस तरह की धमकी मिल रही है.
रमनउन्नी को इस्लाम कुबूल न करने पर प्रोफेसर टी जी जोसफ की तरह अंजाम भुगतने को बोला गया है. 2010 में कथित रूप से मुहम्मद साहब का अपमान करने के लिए प्रोफेसर जोसफ का एक हाथ और एक पैर काट दिया गया था. ये हमला उनपर तब हुआ था जब वो चर्च से घर आ रहे थे.
रमनउन्नी ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. बताया कि उन्हें धमकी दी जा रही है कि अगर 6 महीने के अंदर इस्लाम नहीं अपनाया तो सीधा हाथ और बायीं टांग काट दी जाएगी. रमनउन्नी का कहना है कि इस लेटर को भेजना वाला कौन है, उन्हें नहीं मालूम. लेटर मलप्पुरम जिले के मंजेरी इलाके से पोस्ट किया गया है.
रमनउन्नी नॉवेलिस्ट और शॉर्ट स्टोरी राइटर हैं. जिन्हें केरला साहित्य अकादमी अवॉर्ड मिल चुका है. उनके 'सूफी परंजा कथा' नॉवेल पर फिल्म भी बन चुकी है. इसमें एक मुस्लिम आदमी और हिंदू औरत की लव स्टोरी को दिखाया गया है.
इसी तरह की धमकी केरल की वर्मा कॉलेज की प्रोफेसर दीपा निसांथ को भी दी गई है. दीपा ने छात्र संगठन एसएफआई के उस पोस्टर का समर्थन किया था, जिसमें एमएफ हुसैन की सरस्वती वाली पेंटिंग का इस्तेमाल किया गया था. इस पेंटिंग पर हिंदूवादी संगठनों का कहना था कि सरस्वती को नग्न अवस्था में दिखाकर हुसैन ने हिंदू धर्म का अपमान किया है.
केरल की वर्मा कॉलेज की प्रोफेसर दीपा निसांथ. (Photo: Facebook Wall)
केरल की वर्मा कॉलेज की प्रोफेसर दीपा निसांथ. (Photo: Facebook Wall)

दीपा का कहना है कि फोटोशॉप की हुई उनकी तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर डाली जा रही हैं. जिपर लिखा जा रहा है, 'पेंटिंग की मॉडल इसको होना चाहिए था.' दीपा का कहना है कि कुछ संगठन से धमकी मिल रही है कि प्रोफेसर टी जे जोसफ की तरह हाल कर दिया जाएगा.
सीएम पिनाराई विजयन ने इस मामले को लेकर फेसबुक पोस्ट लिखा है.
जिसमें सीएम ने कहा है कि सरकार इन मामलों से गंभीरता से निपटेगी. लेखकों और सांस्कृतिक कार्यकर्ता के साथ ऐसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.मूर्खों की ये धमकियां माहौल को ख़राब करने की कोशिश है. इस तरह की शिकायत पर सख्ती से निपटा जाएगा.
फेसबुक पर सीएम की लिखी पोस्ट.
फेसबुक पर मलयालम में सीएम की लिखी पोस्ट.

सीएम ने जो बातें कहीं हैं अगर उनको लागू किया जाए तो समाज के लिए बेहतर है. कुछ मूर्खों की वजह से धर्म को ढाल बनाकर समाज का चैन सुकून छीन लिया जाता है. वो नहीं जानते कि जब कहीं आग लगती है तो उसकी तपिश आसपास की चीज़ों को भी पिघला देती है. धमकी किसने दी. कौन लोग हैं इसके पीछे. क्या सच में इसके पीछे कोई मुस्लिम संगठन है. अगर ऐसा है तो जबरदस्ती इस्लाम कबूल कराने वालों को समझना चाहिए कि इस्लाम को नुकसान उन्हीं से है. अगर जबरन इस्लाम कुबूल कराना है तो फिर कल को कोई कहे कि इस्लाम तलवार के दम पर फैला तो उस बात का बुरा मानकर भावनाएं आहत न करना. क्योंकि 'तलवार के दम पर फैला' इस बात को साबित करने पर तुम खुद ही तुले हुए हो.


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