एमपी में एक दिग्विजय सिंह थे. मुख्यमंत्री रहे. कोई अच्छा या बुरा नहीं होता. मतलबहम कैसे तय कर सकते हैं कि कोई आदमी अच्छा है या बुरा? लेकिन दिग्विजय सिंह बहुतबुरे सीएम थे, ये आंकड़ों में नहीं है. जनता के मन में है. एमपी की जनता दिग्विजयसिंह से नफरत करने लगी थी, कांग्रेस आज भी एमपी में खड़ी नहीं हो पा रही इसके पीछेसबसे बड़ी वजह दिग्विजय सिंह हैं. कांग्रेस जब एमपी में हारी तब दिग्विजय सिंह नेराजनैतिक वनवास सा ले लिया. उन्हें भी पता था उन्होंने जो किया है, उसके बाद ज्यादाकुछ बचा नहीं है उनके लिए पॉलिटिक्स में. 'उमा भारती संत हैं, दिग्गी तेरा अंत है'के नारे के साथ 2003 में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं, हटीं. बाबूलाल गौरमुख्यमंत्री बने, हटे. 29 नवंबर, 2005 को एमपी को अपना नया सीएम मिला. शिवराज सिंहचौहान. वही शिवराज जो दिग्विजय सिंह से 2003 में राघोगढ़ का चुनाव हार गए थे. 12 सालहो गए हैं, ये आदमी सीएम बना तो सीएम है. ये बाद के दिनों में इतने मजबूत हुए किदिग्विजय सिंह ने खुद 2013 के चुनावों के वक़्त माना था कि उन्हें मध्यप्रदेश मेंशिवराज सिंह चौहान के खिलाफ उतारने के लिए मुकाबले का कैंडिडेट तक नहीं मिला.व्यापमं आया, गया. डंपर घोटाला आया, गया. भोपाल जेल एनकाउंटर का हल्ला मचा, लोग भूलगए. एमपी की जनता शिवराज सिंह चौहान के साथ कंफर्टेबल हो चुकी है. विपक्ष उनका कुछकर नहीं पा रहा. एक बुद्धिमान आदमी ने बहुत पहले कहा था, एमपी में शिवराज को खतरासिर्फ शिवराज से है. और शिवराज ही शिवराज का नाम डुबाने में लगे हैं. ये बात तब कहीगई थी, जब शिवराज सिंह ने पन्ना में अपने गार्ड्स की गोद में चढ़ गए. डर था जूते नभीग जाएं. लेकिन हम बताते हैं, शिवराज का संकट वो खुद हैं. और उनका जूता है. शिवराजने फिर वही किया. उज्जैन में बुधवार को भाजपा का प्रशिक्षण टाइप्स कुछ चल रहा था.तपोभूमि क्षेत्र में चल रहा था, शिवराज गए जैन मुनि प्रज्ञा सागर से आशीर्वाद लेने.यहां जूते बाहर उतारे. प्रज्ञा सागर से आशीर्वाद लिया और प्रशिक्षण वर्ग की ओर बढ़चले. इस बीच उनके सुरक्षाकर्मी ने उनका जूता उठा लिया. वीडियो बन गया वायरल हो गया.शिवराज मोजा पहने दिखते हैं. जूता उनके गार्ड के हाथ में. अब बाहर बात आई तो ऐसेजैसे शिवराज ने खुद जूता उठवाया हो. शिवराज की लंतरानी हो रही है. शिवराज ने एक बारजो किया, एक बार जिस चीज के लिए कोसे गए. वही फिर हो गया. मतलब ऐसा क्या ऑब्सेशन हैशिवराज सिंह के जूते से? उनको इतना मोह है? शिवराज सिंह के जूते में पन्ना की किसीखदान के हीरे मढ़े हैं? कह के रखा है कि हमारे जूते को आंच नहीं आनी चाहिए. मतलब हैक्या? काहे उसके पीछे सब खपे रहते हैं.