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फर्जी डिग्री से गजटेड अफसर वाली नौकरी की, रिटायर होते ही पकड़े गए, जानते हैं फिर क्या हुआ?

फर्जी डिग्री पर बढ़िया साहब वाली नौकरी, गजटेड ऑफिसर वाली नौकरी कर डाली

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17 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 17 फ़रवरी 2023, 09:15 PM IST)
MP Ex-fire officer gets four years in jail over fake degree
30 साल नौकरी कर ली थी, फिर पकड़ा गया | प्रतीकात्मक फोटो: आजतक
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फर्जी डिग्री ली, उसपर नौकरी कर ली, वो भी बढ़िया साहब वाली नौकरी, गजटेड ऑफिसर वाली. 30 साल तक करते रहे, किसी को भनक नहीं लगी, फिर रिटायर भी हो गए. पेंशन के मजे ले रहे थे, तभी कुछ ऐसा हुआ कि पूरा राज खुल गया, लेने के देने पड़ गए.

मामला मध्य प्रदेश का है. यहां की एक स्थानीय अदालत ने फायर डिपार्टमेंट के एक पूर्व मुख्य अधीक्षक को 4 साल कारावास की सजा सुनाई है. इस पूर्व अधिकारी पर फर्जी डिग्री जमा कर करीब 30 साल तक गजटेड ऑफिसर की नौकरी करने का आरोप लगा था. जिसमें अब दोषी पाए गए. अभियोजन पक्ष के एक अधिकारी ने शुक्रवार, 17 फरवरी को मीडिया को इस मामले की जानकारी दी.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अधिकारी ने बताया कि एडिशनल सेशन जज संजय गुप्ता ने गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाया. अधिकारी के मुताबिक फायर डिपार्टमेंट के पूर्व मुख्य अधीक्षक 70 साल के बीएस तोंगर को IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सजा सुनाई गई. साथ ही उनपर करीब 12,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. सजा सुनाए जाने के बाद बीएस तोंगर को सीधे जेल भेज दिया गया.

कैसे हुआ ये खुलासा? 

इस मामले में एक अधिकारी ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि पिछले दिनों पुलिस के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने फायर डिपार्टमेंट के निरीक्षक की शिकायत पर तोंगर के खिलाफ मामला दर्ज किया था. तोंगर शुरू में दिल्ली सरकार की एक बिजली आपूर्ति इकाई में लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) के रूप में तैनात थे. इसके बाद वो मध्य प्रदेश के अग्निशमन विभाग में डेपुटेशन पर आए.

जांच में पता चला कि बीएस तोंगर ने दिल्ली सरकार के अपने पुराने सेवा रिकॉर्ड को मिटा दिया था. और मध्य प्रदेश सरकार को नागपुर स्थित एक कॉलेज की फायर इंजीनियरिंग की फर्जी डिग्री दे दी. इसके बाद वो फायर डिपार्टमेंट के मुख्य अधीक्षक बन गए. जबकि वो इस पद के लिए अयोग्य थे, क्योंकि उन्होंने केवल 10वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी.

पीटीआई के मुताबिक फर्जी डिग्री के आधार पर 30 साल नौकरी करने के बाद तोंगर 2013 में रिटायर हो गए. उसी साल उनके खिलाफ एक शिकायत आई, जिससे फर्जी डिग्री का खुलासा हुआ. अदालती कार्रवाई शुरू हुई, इस मामले में बीएस तोंगर के खिलाफ अदालत में 30 लोगों ने गवाही दी.

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