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किरेन रिजिजू को कानून मंत्रालय से हटाया गया, सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ लगातार बोल रहे थे

उनकी जगह अर्जुन राम मेघवाल बने कानून मंत्री

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Kiren Rijiju Shifted Out Of Law Ministry, Arjun Ram Meghwal Replaces Him
किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कई बयान दिए थे | फाइल फोटो: आजतक
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अभय शर्मा
18 मई 2023 (Updated: 19 मई 2023, 12:14 PM IST)
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केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू को उनके पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्री बनाया गया है. बताया जाता है कि पीएम नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंत्रिमंडल में बदलाव को मंजूरी दी है. अब किरेन रिजिजू को कानून मंत्रालय से बदलकर भू विज्ञान मंत्रालय सौंपा गया है. वहीं, अर्जुन राम मेघवाल को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा कानून और न्याय मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है.

सबसे बड़े कोर्ट पर सवाल उठा रहे थे रिजिजू

बीते साल जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच काफी समय तक खींचतान मची रही थी. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि उसने जिन जजों के नाम नियुक्ति के लिए केंद्र को भेजे थे. केंद्र उनकी नियुक्ति को ह्री झड़ी नहीं दिखा रहा.

इस मामले पर किरेन रिजिजू ने देश के सबसे बड़े कोर्ट के खिलाफ कई टिप्पणियां की थीं. उन्होंने कई बार जजों की नियुक्ति करने वाले कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाए थे. रिजिजू ने इसे गैर-संवैधानिक तक बता दिया था.

अक्टूबर 2022 में अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जजों और जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर जमकर सवाल उठाए थे. केंद्रीय मंत्री ने साफ तौर पर कहा था कि उन्होंने महसूस किया है कि जज आधा समय नियुक्तियों की पेचीदगियों में ही व्यस्त रहते हैं, इसकी वजह से न्याय देने की उनकी मुख्य जिम्मेदारी पर असर पड़ता है.

उन्होंने कहा था,

'मैं जानता हूं कि देश के लोग जजों को नियुक्त करने के लिए बने कॉलेजियम सिस्टम से खुश नहीं हैं. संविधान की आत्मा के अनुसार जजों को नियुक्त करने की जिम्मेदारी सरकार की है.'

बोले- 'जज अपने भाई को नियुक्त करते हैं'

किरेन रिजिजू ने जजों पर अपने करीबियों को नियुक्त करने का भी आरोप लगाया था. उनका कहना था,

‘अगर हम संविधान की भावना से चलते हैं तो जजों की नियुक्ति करना सरकार का काम है. दूसरी बात ये है कि भारत को छोड़कर दुनिया में कहीं भी ये प्रथा नहीं है कि न्यायाधीश अपने भाइयों को न्यायाधीश नियुक्त करते हैं.’

'न्यायपालिका के अंदर राजनीति होती है' 

अहमदाबाद के कार्यक्रम के दौरान ही केंद्रीय कानून मंत्री ने न्यायपालिका के अंदर चल रही राजनीति पर भी खुलकर बातचीत की थी.

उन्होंने कहा था,

‘ये प्रक्रिया इतनी जटिल है कि मुझे ऐसा कहते हुए खेद है कि इससे ग्रुपिज्म विकसित होता है. नेताओं के बीच राजनीति तो लोग देख सकते हैं. लेकिन, न्यायपालिका के अंदर चल रही राजनीति को नहीं जानते... एक न्यायाधीश आलोचना से तभी ऊपर होगा, अगर वो दूसरे न्यायाधीश के चयन में शामिल नहीं है. लेकिन अगर वो प्रशासनिक कार्यों में शामिल है, तो वह आलोचना से ऊपर नहीं है.’

'रिटायर्ड जजों पर भयानक टिप्पणी कर दी'

मार्च 2023 में इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में किरेन रिजिजू ने पूर्व जजों पर भी बड़ी टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था,

“कुछ रिटायर्ड जज हैं शायद तीन या चार, जोकि एंटी इंडिया ग्रुप का हिस्सा बन गए हैं. ये लोग कोशिश कर रहे हैं कि भारतीय न्यायपालिका विपक्ष की भूमिका निभाए. देश के खिलाफ काम करने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी.”

इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि देश के बाहर और भीतर भारत विरोधी ताकतें एक ही भाषा का इस्तेमाल करती हैं कि लोकतंत्र खतरे में है. इंडिया में ह्यूमन राइट्स का अस्तित्व नहीं है. एंटी इंडिया ग्रुप जो कहता है, वही भाषा राहुल गांधी भी विदेश जाकर इस्तेमाल करते हैं. इससे भारत की छवि खराब होती है.

Union Minister of Law and Justice Kiren Rijiju at India Today Conclave

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले 350 से ज्यादा वकीलों ने कानून मंत्री किरण रिजिजू के इस बयान की निंदा की थी. इस बयान पर वकीलों के ग्रुप ने एक स्टेटमेंट जारी किया था. उनका कहना था कि केंद्रीय मंत्री को इस तरह बयान देना शोभा नहीं देता है. मंत्री ने ऐसा कर संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है.

अरुणाचल से आते हैं किरेन रिजिजू

किरेन रिजिजू अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले से आते हैं. वो अरुणाचल पश्चिम लोकसभा सीट से BJP सांसद हैं. उनके पास दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री है. उन्होंने 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. लेकिन, वह 2009 के लोकसभा चुनाव में हार गए. 2014 के चुनाव में रिजिजू ने फिर से जीत हासिल की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में गृह राज्य मंत्री बनाए गए. इसके बाद वे मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल यानी 2019 में खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए थे. जुलाई 2021 में जब कैबिनेट विस्तार के दौरान उन्हें कानून मंत्री बनाया गया. उन्होंने रविशंकर प्रसाद की जगह ये जिम्मेदारी संभाली थी.

कौन हैं अर्जुन राम मेघवाल?

अर्जुन राम मेघवाल 2009 से राजस्थान के बीकानेर से सांसद हैं. मेघवाल का जन्म बीकानेर के किस्मिदेसर गांव में हुआ था. उन्होंने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से बीए और एलएलबी की. इसके बाद इसी कॉलेज से मास्टर्स की डिग्री ली. इसके बाद फिलीपींस विश्वविद्यालय से एमबीए किया. वो राजस्थान कैडर के एक आईएएस अधिकारी रहे हैं और उन्हें राजस्थान में अनुसूचित जाति के चेहरे के रूप में देखा जाता है.

कोरोना पॉजिटिव पाए गए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, AIIMS में भर्ती -  union minister arjun meghwal tested corona positive admitted to aiims today  - AajTak
अर्जुन राम मेघवाल | फ़ाइल फोटो: आजतक

मेघवाल 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीकानेर से बीजेपी के टिकट पर सांसद चुने गए. उन्हें 2013 में सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से नवाजा गया था. अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान वो लोकसभा में BJP के मुख्य सचेतक थे. मई 2019 में मेघवाल संसदीय मामलों, भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री बने थे. इस मंत्रालय के साथ अब उन्हें कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ेगी.

वीडियो: CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने कानून मंत्री किरेन रिजूजू की किस बात पर कहा था- मेरे विचार उनसे अलग हैं

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