लव मैरिज करना चाह रही थी बेटी, जज बाप की करतूत पर हाई कोर्ट के जज भी हैरान हो गए
हाई कोर्ट के जजों ने कहा कि हम शर्मिंदा हैं कि आपके जैसे लोग जज हैं.
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खगड़िया के जिला जज सुभाष चंद्र चौरसिया ने अपनी ही बेटी को बंधक बना लिया, क्योंकि वो किसी और जाति के लड़के से प्यार करती है.
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बिहार में एक जिला है खगड़िया. जस्टिस सुभाष चंद्र चौरसिया इस जिले के डिस्ट्रिक्ट जज हैं. एक वेबसाइट पर खबर छपी कि डिस्ट्रिक्ट जज सुभाष चंद्र चौरसिया ने अपनी 24 साल की बेटी यशस्विनी को अपने घर में बंधक बना रखा है. खबर छपने के बाद पटना हाई कोर्ट ने 25 जून को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया. पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा-

पटना हाई कोर्ट ने लड़की को पिता से अलग रहने का आदेश दिया है.
इसके बाद पटना हाई कोर्ट ने पटना के एसएसपी मनु महाराज को आदेश दिया कि वो 26 जून को पटना के चीफ जस्टिस के चैंबर में यशस्विनी को पेश करें. कोर्ट ने कहा कि एसएसपी अपने साथ दो महिला पुलिसकर्मियों को लेकर खगड़िया जाएं और लड़की को अपने साथ लेकर आएं. इसके साथ ही कोर्ट ने वकील अनुकृति जयपुरियार को एमिकस क्यूरी भी नियुक्त कर दिया.
कोर्ट के फैसले को देखते हुए एसएसपी मनुमहाराज खगड़िया पहुंचे और वहां जज सुभाष चंद्र चौरसिया के घर से उनकी बेटी यशस्विनी को लेकर 26 जून की दोपहर में पटना हाई कोर्ट पहुंचे. वहां यशस्विनी ने कोर्ट के सामने कहा कि वो बालिग है और उसकी जन्मतिथि 28 सितंबर 1993 है. यशस्विनी ने कहा कि वो कोर्ट में ही सिद्धार्थ बंसल से शादी करने के लिए तैयार है. इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को कहा कि वो यशस्विनी को लॉ यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में रखे और उसे पुलिस सुरक्षा दी जाए. कोर्ट ने यशस्विनी को किसी से भी मिलने की छूट भी दी है.
डीजीपी से मिल चुके थे सिद्धार्थ, नहीं हुई कोई कार्रवाई

सिद्धार्थ बंसल ने बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी (दाएं) से मिलकर पूरा वाकया बताया था.
सिद्धार्थ बंसल के मुताबिक यशस्विनी को बंधक बनाए जाने के मामले में उन्होंने बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी से भी मुलाकात की थी और लड़की को जज पिता की कैद से छुड़ाने की गुहार लगाई थी. डीजीपी ने मामला खगड़िया एसपी मीनू कुमारी को सौंप दिया, लेकिन जज के दवाब में एसपी ने कोई कार्रवाई नहीं की. सिद्धार्थ के मुताबिक बंधक बनाए रखने के दौरान यशस्विनी को आंख में चोट लग गई थी, जिसे देखने के लिए खगड़िया की पुलिस अधिकारी मीनू कुमारी जज सुभाष चंद्र चौरसिया के घर पहुंची थी. वहां उन्होंने कोई कार्रवाई करने के बजाय उल्टे यशस्विनी को आंख पर बर्फ लगाने की सलाह दे डाली, जिससे काले निशान मिट जाएं. सिद्धार्थ के मुताबिक वो अपने एक सीनियर साथी के साथ जज सुभाष चंद्र चौरसिया के घर शादी का प्रस्ताव लेकर गए थे, लेकिन जाति अलग होने की वजह से सुभाष चंद्र चौरसिया ने शादी करने से मना कर दिया. रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि जज सुभाष चौरसिया ने सिद्धार्थ से कहा कि पहले तुम या तो सिविल सेवा की परीक्षा पास कर लो या फिर जज बन जाओ, तब हम यशस्विनी की शादी तुमसे करेंगे.
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'हम शर्मिंदा हैं कि आप जैसे ज्यूडिशियल ऑफिसर हमारे अंदर काम कर रहे हैं.'यशस्विनी पटना के चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट हैं. पढ़ाई के दौरान 2012 में उसे सिद्धार्थ बंसल नाम के एक वकील से प्यार हो गया, जो दिल्ली का रहने वाला है. जज पिता को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने खगड़िया में अपने सरकारी घर में अपनी ही बेटी को बंधक बना लिया.

पटना हाई कोर्ट ने लड़की को पिता से अलग रहने का आदेश दिया है.
इसके बाद पटना हाई कोर्ट ने पटना के एसएसपी मनु महाराज को आदेश दिया कि वो 26 जून को पटना के चीफ जस्टिस के चैंबर में यशस्विनी को पेश करें. कोर्ट ने कहा कि एसएसपी अपने साथ दो महिला पुलिसकर्मियों को लेकर खगड़िया जाएं और लड़की को अपने साथ लेकर आएं. इसके साथ ही कोर्ट ने वकील अनुकृति जयपुरियार को एमिकस क्यूरी भी नियुक्त कर दिया.
कोर्ट के फैसले को देखते हुए एसएसपी मनुमहाराज खगड़िया पहुंचे और वहां जज सुभाष चंद्र चौरसिया के घर से उनकी बेटी यशस्विनी को लेकर 26 जून की दोपहर में पटना हाई कोर्ट पहुंचे. वहां यशस्विनी ने कोर्ट के सामने कहा कि वो बालिग है और उसकी जन्मतिथि 28 सितंबर 1993 है. यशस्विनी ने कहा कि वो कोर्ट में ही सिद्धार्थ बंसल से शादी करने के लिए तैयार है. इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को कहा कि वो यशस्विनी को लॉ यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में रखे और उसे पुलिस सुरक्षा दी जाए. कोर्ट ने यशस्विनी को किसी से भी मिलने की छूट भी दी है.
डीजीपी से मिल चुके थे सिद्धार्थ, नहीं हुई कोई कार्रवाई

सिद्धार्थ बंसल ने बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी (दाएं) से मिलकर पूरा वाकया बताया था.
सिद्धार्थ बंसल के मुताबिक यशस्विनी को बंधक बनाए जाने के मामले में उन्होंने बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी से भी मुलाकात की थी और लड़की को जज पिता की कैद से छुड़ाने की गुहार लगाई थी. डीजीपी ने मामला खगड़िया एसपी मीनू कुमारी को सौंप दिया, लेकिन जज के दवाब में एसपी ने कोई कार्रवाई नहीं की. सिद्धार्थ के मुताबिक बंधक बनाए रखने के दौरान यशस्विनी को आंख में चोट लग गई थी, जिसे देखने के लिए खगड़िया की पुलिस अधिकारी मीनू कुमारी जज सुभाष चंद्र चौरसिया के घर पहुंची थी. वहां उन्होंने कोई कार्रवाई करने के बजाय उल्टे यशस्विनी को आंख पर बर्फ लगाने की सलाह दे डाली, जिससे काले निशान मिट जाएं. सिद्धार्थ के मुताबिक वो अपने एक सीनियर साथी के साथ जज सुभाष चंद्र चौरसिया के घर शादी का प्रस्ताव लेकर गए थे, लेकिन जाति अलग होने की वजह से सुभाष चंद्र चौरसिया ने शादी करने से मना कर दिया. रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि जज सुभाष चौरसिया ने सिद्धार्थ से कहा कि पहले तुम या तो सिविल सेवा की परीक्षा पास कर लो या फिर जज बन जाओ, तब हम यशस्विनी की शादी तुमसे करेंगे.
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