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तिरुपति विवाद के बीच कर्नाटक सरकार का आदेश- 'सभी 34,000 मंदिरों में नंदिनी घी इस्तेमाल होगा'

तिरुपति मंदिर के 'प्रसादम' में कथित तौर पर जानवरों की चर्बी मिलाने वाले विवाद के बीच कर्नाटक सरकार का नया आदेश सामने आया है. इसमें कहा गया है कि राज्य के मंदिर मैनेजमेंट बॉडी के अंतर्गत आने वाले सभी 34,000 मंदिरों में नंदिनी ब्रांड के घी इस्तेमाल हों.

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21 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 08:12 PM IST)
animal fat in ghee at the Tirupati temple
कर्नाटक सरकार के नए आदेश में क्या-क्या? (फ़ोटो - इंडिया टुडे)
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आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में तिरुपति मंदिर के 'प्रसादम' में कथित तौर पर जानवरों की चर्बी मिलाने का विवाद जारी है. इस बीच, कर्नाटक सरकार ने एक निर्देश जारी कर राज्य के मंदिर मैनेजमेंट बॉडी के अंतर्गत आने वाले सभी 34,000 मंदिरों में नंदिनी ब्रांड के घी (Nandini Brand Ghee) के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है. सरकार का कहना है कि सभी मंदिरों को मंदिर के अनुष्ठानों, मसलन- दीपक जलाना, प्रसाद तैयार करना, और 'दसोहा भवन' (जहां भक्तों को भोजन परोसा जाता है) में सिर्फ़ नंदिनी घी का इस्तेमाल किया जाए. इसे कर्नाटक दुग्ध संघ (KMF) तैयार करता है.

NDTV की ख़बर के मुताबिक़, ऑफ़िशियल सर्कुलर में जोर दिया गया है कि मंदिर के कर्मचारियों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि 'प्रसाद' की गुणवत्ता से कभी समझौता न किया जाए.

नंदिनी घी पर भरोसा

माना जाता है कि दक्षिण भारत, ख़ासकर कर्नाटक में डेयरी उत्पादों के लिए 'नंदिनी' सबसे विश्वसनीय नाम है. नंदिनी दूध और घी अपनी हाई क्वालिटी के लिए प्रसिद्ध हैं. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के लिए भी नंदिनी सालों तक पहली पसंद रही. नंदिनी ब्रांड के घी ने 2013 से 2018 के बीच TTD को क़रीब 4,000 मीट्रिक टन घी की आपूर्ति की थी. 2019 में भी लगभग 1,170 टन आपूर्ति की गई. हालांकि, 2020 से नंदिनी ने तिरुपति देवस्थानम को घी की आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी. बताया गया कि नंदिनी अन्य प्रतिस्पर्धियों की कम क़ीमतों से मेल नहीं खा सकी. इसके चलते ठेका किसी और को मिल गया था.

मामले में कर्नाटक मिल्क फ़ेडरेशन के अधिकारियों भी अच्छी गुणवत्ता का दावा किया है. आजतक की ख़बर के मुताबिक़, एक अधिकारी ने बताया,

नंदिनी में मिलावट या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की कोई संभावना नहीं है. बीते कुछ सालों में हमने स्पष्ट कहा कि हम अपने उत्पाद सस्ती दरों पर नहीं दे सकते. ऐसे में हम उस समय टेंडर नहीं मिला. लेकिन अब हमें फिर से घी की आपूर्ति का ठेका मिल गया है. गुणवत्ता से कोई लापरवाही ना हो, इसके लिए नंदिनी ने घी ले जाने वाले टैंकरों में GPS और इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम लगाने की योजना बनाई गई है. ये तकनीक सुनिश्चित करेगी कि घी की सप्लाई के दौरान किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो.

ये भी पढ़ें - तिरुपति मंदिर के प्रसाद में 'जानवरों की चर्बी' विवाद की कहानी

मुख्यमंत्री के आरोप

सरकार का ये निर्देश तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में लड्डू बनाने में घी में जानवर का वसा (फैट) के कथित इस्तेमाल को हो रहे विवाद के बाद आया है. इसका मैनेजमेंट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) करती है. ये विवाद सबसे पहले तब शुरू हुआ, जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने मंदिर में इस्तेमाल किए जाने वाले घी की गुणवत्ता पर चिंता जताई. उन्होंने दावा किया कि नमूनों में चर्बी और अन्य पशु वसा की मिले. 

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: लड्डू का घी सप्लाई करने वाला कौन, लैब रिपोर्ट का सच सामने आया?

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