The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Kareena Kapoor lashes out on media about her maternity break news

हीरोइन प्रेग्नेंट हो जाती है तो बवाल क्यों कट जाता है? - करीना

कृपया मुझे मेरा काम करने दें. बच्चे पैदा करना इस दुनिया का सबसे सामान्य काम है. कोई राष्ट्रीय आपदा नहीं - करीना कपूर खान

Advertisement
pic
18 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 18 जुलाई 2016, 12:12 PM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more

'मैं प्रेग्नेंट हूं, कोई लाश नहीं. अौर ये क्या मैटर्निटी ब्रेक की चर्चा चलने लगी है? बच्चा पैदा करना इस दुनिया का सबसे सामान्य काम है. अच्छा हो कि मीडिया निजी मसले में अपनी नाक घुसाना बन्द करे अौर मुझे वैसे ही ट्रीट करे जैसे करता आया है. अौर जिसे फर्क पड़ता हो वे मेरे साथ काम करने की ज़हमत ना उठाए.. मेरा काम तो वैसे ही चलेगा जैसा चलता आया है. इसे राष्ट्रीय आपदा बनाना बन्द करें. हम 2016 में हैं, 18वीं शताब्दी में नहीं. वैसे उस दौर में भी लोग इससे तो ज़्यादा तमीज़ से ही बिहेव करते होंगे, मुकाबले इसके कि जिस तरह अंदाज़े लगाने का काम आज का मीडिया कर रहा हैं.'

करीना कपूर खान ने जब हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए अपने ताज़ा इंटरव्यू में यह बात कही तो इसमें गुस्सा अौर खीज दोनों साफ़ पढ़ा जा सकता है. करीना कपूर खान आज हिन्दी सिनेमा की मौजूदा पीढ़ी की सबसे प्रमुख अभिनेताअों में से एक हैं. लेकिन अगर आप सैफ़ अली खान के साथ उनकी शादी के बाद मीडिया में आई उनसे जुड़ी खबरें पढ़ें तो उनमें करीना की फिल्मों की अौर अभिनय की बात कम ही मिलेगी. पहले तो मीडिया का एक हिस्सा इस तथ्य की जांच के पीछे किसी खोजी अभियान के तहत पड़ा रहा कि करीना प्रेग्नेंट हैं या नहीं. इतनी अति थी कि 2014 में तो उनके एक ढीली टीशर्ट पहन लेने भर से मीडिया में उनके प्रेग्नेंट होने की अफ़वाहें उड़ा दी गईं. अौर फिर इस साल जुलाई की शुरुआत में जब सैफ अली खान ने उनकी प्रेग्नेंसी की खबर सबके साथ शेयर की, तो एक नया खोज अभियान शुरु हो गया, कि अब करीना के फिल्मी करियर का आगे क्या भविष्य होगा? उनके भावी सिनेमाई प्रोजेक्टों के अचानक कई 'खैरख्वाह' पैदा हो गए. सूत्रों के हवाले से खबरें आने लगीं कि करीना अब रोहित शेट्टी की सफल 'गोलमाल' सीरीज़ की अगली फिल्म नहीं कर पाएंगी अौर उनकी जगह आलिया भट्ट को कास्ट कर लिया गया है.

तयशुदा खांचों से आज़ादी ज़रूरी है

कुछ ही दिन हुए हैं जब एक अौर सफ़ल पेशेवर भारतीय महिला खिलाड़ी से नेशनल टीवी पर साक्षात्कार में पूछा गया था कि वे 'सेटल' कब हो रही हैं? 'सेटल होने' का संकेत यहां अपने खेल में विश्व नम्बर एक बनने से नहीं था (क्योंकि वो तो पहले से हैं), बल्कि 'मां' बनने से था. अौर मां भर बन जाने से आपकी ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती. मां की एक 'आदर्श छवि' बहुत तराशकर गढ़ी है हमारे समाज ने. करीना के उदाहरण से साफ़ है कि इससे ज़रा भी इधर-उधर जाने की छूट वो किसी महिला को नहीं देता. कमर्शियली सफ़ल नायिका करीना अब 'मां' बनने वाली हैं, तो उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अब 'मां' जैसा बिहेव करें.

करीना ने साक्षात्कार में उस 'आदर्श भूमिका' को निभाने से इनकार किया है. गौर कीजिए, वे मां होने के नाते किसी विशेष व्यवहार की मांग नहीं कर रही हैं. वे तो अपने साथ किए जानेवाले इसी 'विशेष व्यवहार' से खीजी हुई हैं अौर इससे मुक्ति चाहती हैं. वे अपने पेशेवर करियर पर अपना नियंत्रण चाहती हैं, अपने 'चाहनेवालों' का नहीं. वही चाहनेवाले, जिनमें से कई उनके इस साक्षात्कार के बाद सार्वजनिक टिप्पणियां कर रहे हैं कि उन्हें अपने करियर से पहले अपने बच्चे की फिक्र करनी चाहिए.

मुझे यहां भारत की अोलंपिक विजेता बॉक्सर 'मैरी कॉम' की ज़िन्दगी पर बनी प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्म याद आती है, जिसमें फिल्म एक 'मां' का नवजात बच्चे को 'अकेला' छोड़कर बॉक्सिंग के रिंग में उतरना हमें असहज बनाता है, अौर फिल्म इसे समझकर, इस जटिलता को हल करने के लिए राष्ट्रवाद में लिपटे क्लाईमैक्स का सहारा लेती है.

पहले भी रहे हैं उजले उदाहरण

वे पहली नायिका नहीं होंगी जो प्रेग्नेंसी के दौरान काम करेंगी. नंदिता दास ने प्रेग्नेंसी के दौरान अोनीर की शानदार फिल्म 'आई एम' में काम किया. जूही चावला ने भी प्रेग्नेंसी के समय म्यूज़िकल 'झंकार बीट्स' में काम किया. पुराने उदाहरणों में जया बच्चन का उदाहरण याद किया जा सकता है, कल्ट क्लासिक 'शोले' की शूटिंग के दौरान जया मां बनने वाली थीं. सफेद साड़ी के पीछे मौन खड़ी जया के शानदार अभिनय में कहीं भी उनकी प्रेग्नेंसी तो आड़े नहीं आती, 'चाहनेवाले' देख सकते हैं. लेकिन फिर यह भी सच है कि इंडस्ट्री में जितने रेयर उदाहरण शादी करने या मां बनने के बाद नायिकाअों के सफ़ल करियर के हैं, इन्हीं दो वजहों से उनके करियर के अन्त के किस्से कहीं ज़्यादा बहुतायत से बिखरे हैं.

मीडिया दोषी, लेकिन सिनेमा का क्या?

करीना का गुस्सा अौर खीज मीडिया पर निकला. लेकिन सच ये है कि खुद हमारा पॉपुलर सिनेमा ही इस धारणा को मज़बूत करनेवाला रहा है. हमारे सिनेमा में जहां नायक पचास साल की उम्र में अपनी 'जवानी' को पाते हैं अौर 'कॉलिज गोइंग यूथ' वाले रोल करते हैं, नायिकाअों के उजले करियर शादी तक, या मातृत्व तक सीमित होते रहे हैं. खुद करीना कपूर हिन्दी सिनेमा के 'पहले परिवार' से ताल्लुक रखती हैं. लेकिन ये भी सच्चाई है कि इस कपूर खानदान की महान अभिनय परंपरा घराने के पुरुषों के ज़रिए ही आगे बढ़ती रही. अभिनेत्रियां घर में आईं भी तो शादी के बाद उनके अभिनय करियर पर रोक लग गई. यह बड़ी बहन करिश्मा कपूर का संघर्ष है जिन्होंने करीना के लिए रास्ते खोले. लेकिन करीना नई लकीर बनाएंगी तो आगे अौर नई पगडंडियां खुलेंगीं.

अौर लगता है कि आज करीना भी इस ज़िम्मेदारी को समझ रही हैं. यहां करीना साक्षात्कार में सवाल पूछ रही हैं कि क्या ये 18वीं सदी है? लेकिन दूसरी अोर वे अपने काम से यह साबित भी कर रही हैं कि हम 2016 में हैं अौर परदे पर ना सही, परदे के पीछे चीज़ें बदल रही हैं. उन्होंने पिछले ही महीने अपनी नई फिल्म साइन की है 'वीर दी वेडिंग'. फिल्म की निर्माता हैं रेहा कपूर, अौर फिल्म के मुख्य कलाकारों में चार अभिनेताअों का नाम लिखा है - सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, शिखा तलसानिया अौर करीना कपूर खान. 2016 के सिनेमा का यह खूबसूरत चेहरा है.

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स

Advertisement

Advertisement

()