The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Kanwar Yatra route up order Yogi govt replies to supreme court to maintain peace

"कांवड़ियों की भावनाएं आहत ना हों, इसलिए...", कांवड़ यात्रा वाले निर्देश पर यूपी सरकार का SC में तर्क

राज्य सरकार ने हलफनामे में दलील दी कि दुकानों और ढाबों के नाम में कन्फ्यूजन के कारण कांवड़ियों ने शिकायत की थी. इसलिए इस तरह का आदेश दिया गया.

Advertisement
Yogi Adityanath
अब इस मामले पर 5 अगस्त को सुनवाई होगी. (फाइल फोटो)
pic
साकेत आनंद
26 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 07:50 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के उस फैसले पर अंतिरम रोक जारी रखा है, जिसमें कांवड़ रूट पर पड़ने वाले दुकानदारों को नेमप्लेट लगाने का आदेश दिया गया था. कोर्ट के आदेश पर यूपी सरकार ने जवाब भी दाखिल किया है. राज्य सरकार ने हलफनामे में कहा है कि कांवड़ रूट पर दुकान मालिकों के नाम लगाने का आदेश इसलिए दिया गया ताकि कांवड़ियों की धार्मिक भावनाएं “अनजाने में भी” आहत ना हों. इसके अलावा सरकार ने इस आदेश के पीछे "शांति व्यवस्था" बनाए रखने की दलील दी.

इंडिया टुडे से जुड़ीं सृष्टि ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने हलफनामे में एक और दलील दी. ये कि दुकानों और ढाबों के नाम में कन्फ्यूजन के कारण कांवड़ियों ने शिकायत की थी. इसलिए इस तरह का आदेश दिया गया. सरकार ने बताया कि पुरानी घटनाएं बताती हैं कि दुकानों में खाने-पीने की चीजों में कन्फ्यूजन को लेकर तनाव और विवाद की स्थिति बनी. ऐसी स्थिति को रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं.

रिपोर्ट बताती है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जुलाई की रात साढ़े 10 बजे कोर्ट में जवाब दाखिल किया. सरकार ने ये भी दलील दी कि आदेश के जरिये दुकानदारों और स्थानीय विक्रेताओं के कारोबार पर कोई बैन नहीं लगाया गया है. सिर्फ मांसाहार खाना बेचने पर प्रतिबंध है. दुकानदार बाकी बिजनेस पहले की तरह कर सकते हैं.

राज्य सरकार ने जवाब में आगे लिखा है, 

Embed

यूपी और उत्तराखंड सरकार के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. कोर्ट में गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद और लेखक आकार पटेल ने याचिकाएं दायर की थीं. इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी थी. कोर्ट ने राज्य सरकारों से जवाब भी मांगा था.

अब शुक्रवार, 26 जुलाई को जस्टिस ऋषिकेष रॉय और एसवीएन भट्टी की बेंच ने सुनवाई की. बेंच ने कहा कि खाने की जगहों पर नाम लिखने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता है. ये भी कहा कि अगर कोई खुद से ऐसा करना चाहता है तो किसी तरह की रोक नहीं है.

ये भी पढ़ें- बिहार के MLC ने नीतीश कुमार की नकल कर ऐसी बात कह दी कि बर्खास्त ही हो गए!

याचिकाकर्ताओं की तरफ से कोर्ट में पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें समय चाहिए. इसलिए कोर्ट ने अंतरिम रोक को बढ़ाने का फैसला लिया. अब मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी.

वीडियो: सीएम योगी के विभाग की जानकारी मांगी केशव प्रसाद मौर्य ने , चिट्ठी हुई तेजी से वायरल

Advertisement

Advertisement

()