इस्लामिक स्टेट की 'महारानी' जेल कैसे पहुंची?
इस्लामिक स्टेट में रिक्रूटमेंट का प्रोसेस क्या है?

अमेरिका की एक महिला, जो कभी स्कूल में बच्चों को ज़िंदगी की बारीकियां सिखाया करती थी, एक दिन अचानक मिडिल-ईस्ट पहुंची और किशोर लड़कियों को ज़िंदगी छीनने की तरक़ीबें बताने लगी. एलिसन फ़्लूक-एकरेन इस नई भूमिका में इतनी मशहूर हुई कि उसे ‘इस्लामिक स्टेट की महारानी’ के नाम से जाना जाने लगा.
आज हम एलिसन की चर्चा क्यों कर रहे हैं?दरअसल, अमेरिका की एक अदालत ने एलिसन के गुनाह की सज़ा तय कर दी है. 20 साल. तो हम जानेंगे एलिसन फ्लूक-एकरेन की कहानी. वो कैसे IS के संपर्क में आई और कैसे जेल तक पहुंची.
एलिसन अमेरिका के लॉरेंस में पली बढ़ी. परिवार के पास काफी पैसा था. 81 एकड़ का फ़ार्म भी था. 1996 में एलिसन की पहली शादी हुई. बाद में दो बच्चे हुए. लेकिन शादी ज़्यादा चली नहीं. बच्चों के जन्म के कुछ समय बाद ही तलाक हो गया.
एलिसन की ज़िंदगी में बड़ा मोड़ आया साल 2002 में. उन समय वो यूनिवर्सिटी ऑफ़ कंसास में ग्रैजुएशन कर रही थी. वहां उसने इस्लाम धर्म अपना लिया. पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात तुर्की के एक स्टूडेंट वोल्कन एक्रिन से हुई. बाद में दोनों ने शादी कर ली. उनके 5 बच्चे हुए. लेकिन इस बीच एलिसन का धार्मिक रुख बदलने लगा था. वो कट्टर होती जा रही थी.
2008 में वो अपने दूसरे पति के साथ मिस्र की राजधानी काहिरा में बस गई. लेकिन उसका अमेरिका आना-जाना लगा रहा. इस बीच पति लीबिया चला गया. वहां उसने एक आतंकी संगठन अल-शरिया जॉइन कर लिया. इसी संगठन में रहते हुए वोल्कन की मौत हो गई. पति की मौत के बाद एलिसन का अमेरिका आना-जाना बंद हो गया. 2012 में उसे तस्करी कर सीरिया लाया गया. यहां उसने इस्लामिक स्टेट की सदस्यता ले ली. कहा जाता है कि उसने कई दूसरे आतंकवादियों से भी शादी की. उनमें से एक बांग्लादेश का था, जो ड्रोन हथियारों का विशेषज्ञ था. बाद में वो भी एक हमले में मारा गया.
करीब चार साल बाद एलिसन ने ‘खतीबा नुसायबा’ नाम का संगठन जॉइन किया. ये इस्लामिक स्टेट का ही हिस्सा है. इसमें केवल महिलाएं जुड़ सकती थीं. धीरे-धीरे एलिसन की इस संगठन में भूमिका बढ़ती गई. कुछ ही महीनों में वो संगठन की लीडर बन गई. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ये संगठन IS के महिला दस्ते की तरह काम करता था. यहां एलिसन ने महिलाओं को मिलिट्री ट्रेनिंग दी.
एलिसन सीरिया में अपनी बेटी लैला को भी साथ लाई थी. उसकी शादी भी एक IS लड़ाके से हुई जो एक हवाई हमले में मारा गया था. लैला अपनी मां एलिसन से दूर रहने लगी थी. लेकिन पति की मौत के बाद उसने मां से संपर्क करने की कोशिश की. एक वीडियो संदेश जारी किया और अपनी मां से मदद की गुहार लगाई. अमेरिकी अधिकारियों को इसकी ख़बर मिली तो वे चौकन्ने हुए.
एलिसन अपनी बेटी का वीडियो संदेश देख चुकी थी. लेकिन FBI के डर से उसे संपर्क करने में डर रही थी. हालांकि 2020 में उसने एक मेसेजिंग ऐप के जरिये लैला से संपर्क किया.
पिछले साल सीरिया में एलिसन की गिरफ्तारी हुई. जनवरी 2022 में FBI ने उससे पूछताछ शुरू की. बाद में अमेरिकी अदालत में ट्रायल हुआ. अब उसे 20 साल की सज़ा सुनाई गई है. इस दौरान एलिसन के बारे में काफी कुछ सामने आया. उसके 12 बच्चों में से दो ने अदालत को पत्र लिखकर अपनी मां पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. एजेंसियों ने ये दावा भी किया है कि एलिसन ने अमेरिका में आतंकी हमलों की साज़िश रची थी.
ये थी एलिसन की कहानी. लेकिन एलिसन जैसी कितनी ही महिलाएं हैं जो आतंकी संगठनों के झांसे में आकर अपना सब कुछ खो बैठती हैं. जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च में सामने आया है कि अब तक करीब तीन सौ लोगों ने अमेरिका से IS में जाने की कोशिश की है. लेकिन ये लोग IS के संपर्क में कैसे आते हैं? IS लोगों को रिक्रूट कैसे करता है?
सोशल मीडिया IS की भर्ती का सबसे बड़ा हथियार रहा है. 2007 में सऊदी सरब सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें बताया गया था कि सऊदी अरब से जिहादी गुटों में शामिल होने वाले 80 फीसदी लोग इंटरनेट के ज़रिए झांसे में आए थे.
IS रेडिकल भाषणों का इस्तेमाल कर लोगों को भड़काता है. वो कई तरह के स्पीच कैंपेन चलाता है. इस बात की आड़ भी लेता है कि वो बिना लीडर का आंदोलन है. इसके अलावा IS रेडियो, मैगजीन का इस्तेमाल कर अपना एजेंडा फैलाता है. IS की मैगज़ीन्स दुनिया भर में अलग-अलग भाषाओं में निकाली जाती हैं. इनमें भड़काऊ कंटेट होता है.
IS वीडियो गेम्स के ज़रिए भी अपना प्रोपगैंडा फैलाता है. इनमें हिंसा के इस्तेमाल को सही ठहराता है. गेम्स में दुश्मन देशों के राजनेताओं के कैरेक्टर बनाए जाते हैं, जिन्हें मारने पर रिवॉर्ड मिलते हैं. जब इन सब झांसों में कोई व्यक्ति आता है तो उसको इराक़, सीरिया और IS के दबदबे वाले दूसरे इलाकों में बुलाने का बंदोबस्त किया जाता है. उन्हें नजदीकी देशों की सीमाओं से गैरक़ानूनी ढंग से लाया जाता है.
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