कंगना रनौत आज कल सुर्ख़ियों में हैं. सिर्फ़ कंट्रोवर्सी की वजह से ही नहीं, उन्हेंनेशनल अवॉर्ड भी मिला है. तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के लिए. कुल मिला के तीन नेशनलअवॉर्ड. शबाना आज़मी के बाद एकमात्र ऐक्ट्रेस जिसे 2 लगातार नेशनल अवॉर्ड मिले हैं.उनका एक इंटरव्यू किया इंडिया टुडे ने. राहुल कंवल से उनकी आध घंटे की बातचीत चली.जानते हैं कि उन्होंने किस बारे में क्या कहा.--------------------------------------------------------------------------------अपने सफ़र के बारे में: मैंने अपने दिल की सुनी और अपने मन की करती गयी. हर चीज कापॉजिटिव रिज़ल्ट मिला. वैसे मेरी ज़िन्दगी परियों की कहानी नहीं रही है. काफी उतारचढ़ाव देखे हैं. मेरे फ़ादर मेरी चॉइस के काफ़ी खिलाफ़ रहे जिसने मुझे और कठोर बनादिया. बाद में जब मैं सफ़ल हुई तो उन्हें मेरी चॉइस ठीक प्रूव हो जाने पर खुद पर हीशक होने लगा.--------------------------------------------------------------------------------अपने बाग़ी होने के बारे में: मैं बाग़ी थी. मगर इसलिए नहीं कि मुझे सभी को ग़लत प्रूवकरना था. मैं खुद को सही ठहराना चाहती थी. मेरे फ़ादर अपनी जगह सही थे. पर वो उनकानजरिया था. वो मेरी जगह आकर नहीं सोच रहे थे. नियमों को तोड़ने तक जो नियम बने थे,ऐसा नहीं है कि वो गलत थे, लेकिन मुझे उन्हें बस तोड़ना था.--------------------------------------------------------------------------------बाहर कहीं जाने के बारे में: मैं बाहर के दर्शकों के लिए भी काम करना चाहती हूं.लेकिन वो सिर्फ हॉलीवुड तक ही सीमित नहीं रहेगा. आज के समय में चीन का सिनेमाहॉलीवुड से ज़्यादा तरक्की कर रहा है. इंडिया भी फॉलो करेगा. हॉलीवुड का ग्राफ़ नीचेगिर रहा है.--------------------------------------------------------------------------------बॉलीवुड में खान हुकूमत के बारे में: गांव में जैसे डॉक्टर की बीवी खुद ब खुदडॉक्टरनी बन जाती है, टीचर की बीवी खुद ही टीचरनी बन जाती है, वैसे जी आप भले ही नएहों, सुपर स्टार के साथ काम करके आप सुपर स्टारनी बन सकती हैं. मुझे ये सब करने कामौका नहीं मिला. जब मुझे काम चाहिए था, तब मेरे साथ कोई भी काम करने को तैयार नहींथा. आज जब अपने सेट पर मैं खुद ही हीरो हूं तो मैं दूसरे हीरो के साथ काम करने कारास्ता क्यूं देखूं? मुझे लगता है कि फ़िल्म इंडस्ट्री के खान लोग केस स्टडीज़ हैं.मैं उनसे खुद को कम्पेयर नहीं कर सकती. लेकिन मैं अपने साथ काम कर रहे मेल ऐक्टर्सके बराबर पैसे कमाने की पूरी कोशिश करती हूं.--------------------------------------------------------------------------------फेमिनिस्ट कहलाये जाने पर: मुझे जब फेमिनिस्ट कहा जाता है तो बहुत बड़ा बोझ सा लगताहै. क्यूंकि पहले मैं एक आर्टिस्ट हूं. काश कि मैं खुद को पूरी तरह से एक फेमिनिस्टके रूप में स्थापित कर पाती. मैं बाई चांस फेमिनिस्ट बन गयी. मैं इसे बदलना चाहतीहूं. मैं अपने काम से फेमिनिस्ट बनना चाहती हूं. साथ ही मैं जान बूझ कर मर्दों कोनिशाना नहीं बनाती. मैं बस खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं. मुझे लगता है किइंडस्ट्री में काफी सेक्सिज्म है. यहां बेस्ट ऐक्टर और बेस्ट ऐक्ट्रेस के अवार्ड तोहोते हैं लेकिन बेस्ट डायरेक्टर का एक ही अवार्ड होता है. उसमें बेस्ट मेल और फ़ीमेलडायरेक्टर क्यूं नहीं होता?--------------------------------------------------------------------------------बॉलीवुड के साथ अपने रिश्ते पर: मैंने बॉलीवुड को अपना लिया है. बॉलीवुड ने मुझेअपनाया है या नहीं, मुझे फ़र्क नहीं पड़ता. मैं अपनाए जाने की चाहत नहीं रखती.--------------------------------------------------------------------------------अपने साथ जुड़ी कंट्रोवर्सी पर: क्यूं किसी को मेरे साथ खड़ा होना चाहिए? मैं येअकेले ही कर लूंगी. मेरे बारे में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे मुझे शर्म आये. मैंअपने आस-पास की हर एक चीज़ से इंस्पायर होती हूं. मेरी लाइफ में हाल ही में जो कुछभी घटा है उसने मुझे भी शॉक किया है. ये सब कुछ बहुत ही ज़्यादा है. मैं इन सब केलिए तैयार नहीं थी. मुझे नहीं मालूम की क्यूं किसी दिमागी बीमारी से जूझ रहे इंसानको शेम किया जाता है और उसके हालातों के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. इस देशमें मेरे पीरियड्स को लेके बातें हो रही हैं. उसे घिनौना बताया जा रहा है.--------------------------------------------------------------------------------मेरे पीरियड्स कोई कॉकटेल नहीं हैं.--------------------------------------------------------------------------------उनमें घिनौना क्या हो सकता है? किसी के भी पीरियड्स घिनौने कैसे हो सकते हैं? अगरकिसी मर्द के बॉडी फ्लुइड्स घिनौने नहीं हो सकते तो औरतों के क्यूं? उसी से तो इसदुनिया में नए बच्चे आते हैं. और बच्चे घिनौने नहीं होते. तो पीरियड्स में बहनेवाला खून क्यूं? हम सोसाइटी के तौर पे कहीं भी नहीं खड़े होते. हमारे यहां लड़कियोंकी कोई इज्ज़त नहीं होती. अगर मुझे नहीं लगता की मैंने कुछ ग़लत किया है तो मुझे उसकाकोई गम नहीं होता. फिर जितना मर्जी मुझे डायन (witch) बुलाया जाए. जब मैं छोटी थीतो मुझे एक डर लगता था. मुझे ऐसा लगता था कि अगर मैं एक औरत के तौर पर फ़ेल हो गयीतो मुझे रंडी, डायन, पागल या शायद ड्रग अडिक्ट भी कहा जाएगा. देश के बेहद अंदरूनीजगहों से ज़्यादा ऊंची सोसाइटी में लोग ज़लील हैं. मैं अक्सर अकेले में रोती हूं.लेकिन ऐसा है कि अब मेरे सामने सिवाय लड़ने के सिवाय दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है. कंगनारनौत आज कल सुर्ख़ियों में हैं. सिर्फ़ कंट्रोवर्सी की वजह से ही नहीं, उन्हें नेशनलअवॉर्ड भी मिला है. तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के लिए. कुल मिला के तीन नेशनल अवॉर्ड.शबाना आज़मी के बाद एकमात्र ऐक्ट्रेस जिसे 2 लगातार नेशनल अवॉर्ड मिले हैं. उनका एकइंटरव्यू किया इंडिया टुडे ने. राहुल कंवल से उनकी आध घंटे की बातचीत चली. जानतेहैं कि उन्होंने किस बारे में क्या कहा.--------------------------------------------------------------------------------अपने सफ़र के बारे में: मैंने अपने दिल की सुनी और अपने मन की करती गयी. हर चीज कापॉजिटिव रिज़ल्ट मिला. वैसे मेरी ज़िन्दगी परियों की कहानी नहीं रही है. काफी उतारचढ़ाव देखे हैं. मेरे फ़ादर मेरी चॉइस के काफ़ी खिलाफ़ रहे जिसने मुझे और कठोर बनादिया. बाद में जब मैं सफ़ल हुई तो उन्हें मेरी चॉइस ठीक प्रूव हो जाने पर खुद पर हीशक होने लगा.--------------------------------------------------------------------------------अपने बाग़ी होने के बारे में: मैं बाग़ी थी. मगर इसलिए नहीं कि मुझे सभी को ग़लत प्रूवकरना था. मैं खुद को सही ठहराना चाहती थी. मेरे फ़ादर अपनी जगह सही थे. पर वो उनकानजरिया था. वो मेरी जगह आकर नहीं सोच रहे थे. नियमों को तोड़ने तक जो नियम बने थे,ऐसा नहीं है कि वो गलत थे, लेकिन मुझे उन्हें बस तोड़ना था.--------------------------------------------------------------------------------बाहर कहीं जाने के बारे में: मैं बाहर के दर्शकों के लिए भी काम करना चाहती हूं.लेकिन वो सिर्फ हॉलीवुड तक ही सीमित नहीं रहेगा. आज के समय में चीन का सिनेमाहॉलीवुड से ज़्यादा तरक्की कर रहा है. इंडिया भी फॉलो करेगा. हॉलीवुड का ग्राफ़ नीचेगिर रहा है.--------------------------------------------------------------------------------बॉलीवुड में खान हुकूमत के बारे में: गांव में जैसे डॉक्टर की बीवी खुद ब खुदडॉक्टरनी बन जाती है, टीचर की बीवी खुद ही टीचरनी बन जाती है, वैसे जी आप भले ही नएहों, सुपर स्टार के साथ काम करके आप सुपर स्टारनी बन सकती हैं. मुझे ये सब करने कामौका नहीं मिला. जब मुझे काम चाहिए था, तब मेरे साथ कोई भी काम करने को तैयार नहींथा. आज जब अपने सेट पर मैं खुद ही हीरो हूं तो मैं दूसरे हीरो के साथ काम करने कारास्ता क्यूं देखूं? मुझे लगता है कि फ़िल्म इंडस्ट्री के खान लोग केस स्टडीज़ हैं.मैं उनसे खुद को कम्पेयर नहीं कर सकती. लेकिन मैं अपने साथ काम कर रहे मेल ऐक्टर्सके बराबर पैसे कमाने की पूरी कोशिश करती हूं.--------------------------------------------------------------------------------फेमिनिस्ट कहलाये जाने पर: मुझे जब फेमिनिस्ट कहा जाता है तो बहुत बड़ा बोझ सा लगताहै. क्यूंकि पहले मैं एक आर्टिस्ट हूं. काश कि मैं खुद को पूरी तरह से एक फेमिनिस्टके रूप में स्थापित कर पाती. मैं बाई चांस फेमिनिस्ट बन गयी. मैं इसे बदलना चाहतीहूं. मैं अपने काम से फेमिनिस्ट बनना चाहती हूं. साथ ही मैं जान बूझ कर मर्दों कोनिशाना नहीं बनाती. मैं बस खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं. मुझे लगता है किइंडस्ट्री में काफी सेक्सिज्म है. यहां बेस्ट ऐक्टर और बेस्ट ऐक्ट्रेस के अवार्ड तोहोते हैं लेकिन बेस्ट डायरेक्टर का एक ही अवार्ड होता है. उसमें बेस्ट मेल और फ़ीमेलडायरेक्टर क्यूं नहीं होता?--------------------------------------------------------------------------------बॉलीवुड के साथ अपने रिश्ते पर: मैंने बॉलीवुड को अपना लिया है. बॉलीवुड ने मुझेअपनाया है या नहीं, मुझे फ़र्क नहीं पड़ता. मैं अपनाए जाने की चाहत नहीं रखती.--------------------------------------------------------------------------------अपने साथ जुड़ी कंट्रोवर्सी पर: क्यूं किसी को मेरे साथ खड़ा होना चाहिए? मैं येअकेले ही कर लूंगी. मेरे बारे में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे मुझे शर्म आये. मैंअपने आस-पास की हर एक चीज़ से इंस्पायर होती हूं. मेरी लाइफ में हाल ही में जो कुछभी घटा है उसने मुझे भी शॉक किया है. ये सब कुछ बहुत ही ज़्यादा है. मैं इन सब केलिए तैयार नहीं थी. मुझे नहीं मालूम की क्यूं किसी दिमागी बीमारी से जूझ रहे इंसानको शेम किया जाता है और उसके हालातों के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. इस देशमें मेरे पीरियड्स को लेके बातें हो रही हैं. उसे घिनौना बताया जा रहा है.--------------------------------------------------------------------------------मेरे पीरियड्स कोई कॉकटेल नहीं हैं.--------------------------------------------------------------------------------उनमें घिनौना क्या हो सकता है? किसी के भी पीरियड्स घिनौने कैसे हो सकते हैं? अगरकिसी मर्द के बॉडी फ्लुइड्स घिनौने नहीं हो सकते तो औरतों के क्यूं? उसी से तो इसदुनिया में नए बच्चे आते हैं. और बच्चे घिनौने नहीं होते. तो पीरियड्स में बहनेवाला खून क्यूं? हम सोसाइटी के तौर पे कहीं भी नहीं खड़े होते. हमारे यहां लड़कियोंकी कोई इज्ज़त नहीं होती. अगर मुझे नहीं लगता की मैंने कुछ ग़लत किया है तो मुझे उसकाकोई गम नहीं होता. फिर जितना मर्जी मुझे डायन (witch) बुलाया जाए. जब मैं छोटी थीतो मुझे एक डर लगता था. मुझे ऐसा लगता था कि अगर मैं एक औरत के तौर पर फ़ेल हो गयीतो मुझे रंडी, डायन, पागल या शायद ड्रग अडिक्ट भी कहा जाएगा. देश के बेहद अंदरूनीजगहों से ज़्यादा ऊंची सोसाइटी में लोग ज़लील हैं. मैं अक्सर अकेले में रोती हूं.लेकिन ऐसा है कि अब मेरे सामने सिवाय लड़ने के सिवाय दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है.-------------------------------------------------------------------------------- यहां देखें इंटरव्यू:-------------------------------------------------------------------------------- यहां देखें इंटरव्यू: