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अंडे बेचे, टिफिन डिलीवर किए, मजदूरी की, अब बन गये विधायक!

कमलेश्वर डोडियार के पास रहने के लिए पक्का घर भी नहीं है. एक झोपड़ी है, जिसपर बारिश में तिरपाल डालना पड़ता है. विधानसभा में दस्तावेज़ जमा करने मोटरसाइकिल पर बैठकर रतलाम से भोपाल गए.

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6 दिसंबर 2023 (पब्लिश्ड: 12:44 AM IST)
Kamleshwar Dodiyar who fought all odds is set to become mla now
कमलेश्वर डोडियार के पास रहने के लिए घर भी नहीं है. वो झोपड़ी में रहते हैं. (फोटो- ट्विटर)
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फॉर्च्यूनर जैसी महंगी गाड़ी. आलीशान मकान. अगल-बगल चलते गार्ड्स. देश में किसी भी छुटभैये नेता के पास कम से कम इतनी ‘बरकत’ तो आपको मिल ही जाएगी. और विधायकी के बाद तो नेताओं के लाव लश्कर आसमान पर होते हैं. पर मध्य प्रदेश के कमलेश्वर डोडियार (Kamleshwar Dodiyar) के साथ ऐसा नहीं है. कमलेश्वर हालिया विधानसभा चुनाव में रतलाम की सैलाना सीट से जीते हैं. चुनाव से पहले वो बाइक से प्रचार-प्रसार करते रहे. इतना ही नहीं, विधायक जी जीतने के बाद अपने डॉक्यूमेंट्स जमा करने राजधानी भोपाल पहुंचे. वो भी अपनी बाइक से.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक डोडियार ने बताया,

“मेरी पार्टी के सहयोगियों ने मेरा समर्थन किया. उन्होंने खाली पेट मेरे लिए प्रचार किया. यहां तक ​​कि अपनी जेब से पैसे भी खर्च किए. मुझे दस्तावेज जमा करने के लिए तत्काल भोपाल विधानसभा जाना पड़ा. कोई चार पहिया वाहन उपलब्ध नहीं था, इसलिए मैं मोटरसाइकिल पर निकल गया.”

भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने रतलाम जिले की सैलाना सीट जीतकर मध्य प्रदेश में अपनी पहली जीत दर्ज की है. पार्टी ने कमलेश्वर डोडियार को अपना कैंडिडेट बनाया था. डोडियार ने कांग्रेस उम्मीदवार हर्ष विजय गहलोत को 4 हजार 618 वोटों के अंतर से हराया. डोडियार को 71 हजार 219 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के हर्ष विजय को 66 हजार 601 वोट मिले. सीट पर बीजेपी कैंडिडेट संगीता चारेल तीसरे नंबर पर रहीं. उन्हें 41 हजार 584 वोट मिले.

डोडियार ने पहली बार चुनाव 2018 में लड़ा था. तब वो हार गए थे. इसके बाद 2019 लोक सभा चुनाव में भी वो उतरे. लेकिन निराशा हाथ लगी. डोडियार ने हार नहीं मानी. और इस बार विधायकी सुनिश्चित की. बता दें कि मध्य प्रदेश की सैलाना सीट पर सबसे अधिक मतदान हुआ था. यहां पर 90.08 प्रतिशत वोटिंग हुई.

मां ने एक समय अंडे बेचे

डोडियार आदिवासी समुदाय से आते हैं. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक डोडियार की मां ने बताया कि एक समय उन्होंने गांव में अंडे तक बेचे. डोडियार की पढ़ाई के लिए मां ने गुजरात और राजस्थान में मजदूरी तक की. इतना ही नहीं डोडियार ने भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए खुद मजदूरी की. साथ ही दिल्ली में टिफिन डिलीवरी की. डोडियार ने दिल्ली से LLB की पढ़ाई पूरी की है.

कमलेश्वर डोडियार के पास रहने को घर नहीं

कमलेश्वर डोडियार के पास रहने के लिए पक्का घर भी नहीं है. वो मिट्टी की झोपड़ी में रहते हैं और बारिश के समय उस पर तिरपाल डालकर उनका परिवार पानी से बचने की कोशिश करता है.

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