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रिटायर होने के बाद इस जज ने जो किया उससे सारे नेताओं को सबक लेना चाहिए

थोड़ी सी शर्म भी आ जाए तो और बढ़िया.

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22 जून 2018 (अपडेटेड: 22 जून 2018, 09:19 AM IST)
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बात बस अखिलेश यादव की नहीं है. मायावती और ऐसे तमाम नेताओं की है. जो सरकारी बंगले पर दखल देकर बैठे रहते हैं. खाली करने को कहे जाने पर भी महीनों तक टालते रहते हैं. अखिलेश यादव पिछले दिनों सबसे ज्यादा किसी वजह से खबर में रहे, तो पूर्व मुख्यमंत्री के अपने पुराने बंगले की वजह से ही रहे. तमाम तस्वीरें आ रही हैं. कि जब उन्होंने बंगला खाली किया, तो कैसे इसे तोड़-फोड़ कर गए. ऐसे तमाम नेताओं को जस्टिस चेलमेश्वर जैसे लोगों के बारे में पढ़कर थोड़ी शर्म करनी चाहिए.
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दीपक मिश्रा. भारत के चीफ जस्टिस. मुख्य न्यायाधीश. सिनयॉरिटी में उनसे बस एक पायदान छोटे थे जस्टिस जे चेलमेश्वर. वो रिटायर हो गए. 22 जून, 2018 को. सुप्रीम कोर्ट के जज थे. सो नई दिल्ली में सरकारी बंगला मिला हुआ था. रिटायरमेंट वाले दिन से पहले ही उनका सारा सामान पैक हो चुका था. 22 जून की सुबह 5 पांच बजे जस्टिस चेलमेश्वर और उनकी पत्नी, दोनों अपना बैग उठाए सरकारी बंगले से विदा हो गए. एकदम सादगी से. कोई वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं. छह साल से ये बंगला उन्हें मिला हुआ था. छह साल पहले बंगला जिस हाल में था, ठीक उसी हालत में जस्टिस चेलमेश्वर इसे छोड़ गए हैं. यहां से अपने गांव के लिए रवाना हो चुके हैं. जब आप ये खबर पढ़ेंगे, तब शायद वो गांव पहुंचने भी वाले होंगे. रिटायरमेंट वाले दिन बंगला खाली करने की कोई ज़बरदस्ती नहीं होती. कुछ दिनों का वक्त मिलता है इसके लिए. लेकिन जस्टिस चेलमेश्वर ने कोई समय नहीं लिया. वक्त हुआ और निकल गए. क्या मजाल कि हमारे नेताओं को रत्तीभर शर्म आ जाए एक जस्टिस चेलमेश्वर हैं. और एक हमारे नेता. जो सरकारी घर को अपनी जागीर समझते हैं. जब तक रहते हैं, सरकारी खजाने के पैसों से उसे और आलीशान बनाते रहते हैं. फिर जब जाने का वक्त आता है, तो हर मुमकिन कोशिश करते हैं. ताकि किसी तरह घर खाली करने से बच जाएं. फिर जब जाते हैं, तो पूरी तोड़-फोड़ मचाकर जाते हैं. सरकारी सामान भी साथ ले जाते हैं. पिछला याद करने में क्या मेहनत खपाएंगे आप. अभी उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगला खाली करने वाला मामला ही याद कर लीजिए. अखिलेश यादव गए, तो टाइल्स तक उखड़वा दी. पूरा तबाह कर दिया. राजनाथ सिंह के बंगले से टीन की छत गायब होने की खबर थी. मायावती जब सारे जतन करके हार गईं, तो बंगला बचाने के लिए कांशीराम के नाम का इस्तेमाल कर दिया. ऐसे तमाम नेता हैं. और उनसे जुड़े किस्से हैं.
सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें चल रही हैं. ये सब अखिलेश यादव के बंगले की बताई जा रही हैं.
सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें चल रही हैं. ये सब अखिलेश यादव के बंगले की बताई जा रही हैं. लिखा जा रहा है कि उन्होंने अपने बंगले में जो साइकल ट्रैक बनाया हुआ था, वो तक खुदवा दिया.

कौन हैं जस्टिस चेलमेश्वर? अच्छा, जस्टिस चेलमेश्वर की खबर पढ़कर आपको उनके बारे में कुछ याद आया? ये सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल थे, जिन्होंने भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. 12 जनवरी, 2018 को. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जे. चेलमेश्वर के अलावा जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे. पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ थी. इसमें जस्टिस मिश्रा की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाया गया था. चारों जजों ने एक आवाज में कहा था. कि अगर सुप्रीम कोर्ट को नहीं बचाया गया, तो पूरा लोकतंत्र नाकाम हो जाएगा. इन्होंने CJI दीपक मिश्रा को छह पन्नों की चिट्ठी भेजी थी. इसमें लिखा था कि केंद्र सरकार न्यायपालिका में हस्तक्षेप कर रही है. ऐसा काम कर रही है कि न्यायपालिका की आजादी खत्म हो जाएगी. लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा. न्यायपालिका के कमजोर पड़ने पर लोकतंत्र कैसी बेहोशी में जाता है, ये हिंदुस्तान को याद होना चाहिए. इंदिरा गांधी और उनके आपातकाल के किस्से इसकी खुराक हैं. जब-जब ये लगे कि अदालतों के कमजोर होने से क्या आफत आ जाएगी, तब इमरजेंसी का टाइम याद कर लिया जाना चाहिए. हमने इसके ऊपर ब्योरे से खबर की थी. आप पढ़ना चाहें, तो यहां पढ़ लीजिए-
सुप्रीम कोर्ट के जज ने जो कहा है, उससे सवाल उठता है कि क्या सरकार कोर्ट पर कब्जा चाहती है?

सुप्रीम कोर्ट के कुछ वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके कामकाज पर गंभीर सवाल उठे हैं. विपक्ष उनके खिलाफ महाभियोग चलाना चाहता है. मगर वेंकैया नायडू ने ये कहकर इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि विपक्ष के आरोपों में वजन नहीं है. कि उनकी पुष्टी नहीं होती. कई जानकार सवाल कर रहे हैं कि बिना जांच कराए कैसे कहा जा सकता है कि आरोप बेबुनियाद हैं.
सुप्रीम कोर्ट के कुछ वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए. उनके कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए. विपक्ष भी उनके खिलाफ महाभियोग चलाना चाहता था. वेंकैया नायडू ने ये कहकर विपक्ष के प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि आरोपों में वजन नहीं है. कि उनकी पुष्टी नहीं होती. कई जानकारों ने सवाल उठाया कि बिना जांच कराए कैसे कहा जा सकता है कि आरोप बेबुनियाद हैं. बीते कई सालों में शायद ही कोई CJI इतना विवादित रहा हो, जितने दीपक मिश्रा रहे हैं.

मौजूदा CJI दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर होंगे दीपक मिश्रा रिटायर होंगे, तो सिनयॉरिटी के हिसाब से रंजन गोगोई को चीफ जस्टिस बनना चाहिए. मगर अभी इसके ऊपर भी विवाद चल रहा है. ऐसी खबरें आ रही हैं कि शायद बगावत करने वाले जस्टिस रंजन गोगोई को किसी बहाने किनारे कर दिया जाएगा. और उनकी जगह किसी और को CJI बनाया जाएगा. हालांकि रविशंकर प्रसाद ऐसे सवालों पर बिफर पड़े थे. उन्होंने कहा कि अदालतों के मामले में टांग अड़ाने का जैसा रेकॉर्ड कांग्रेस का है, उससे तो बहुत अच्छा ही रेकॉर्ड मोदी सरकार का है. मगर जब CJI के नाम का ऐलान करने की बारी आएगी, तब चीजें ज्यादा साफ दिखेंगी. वैसे मौजूदा CJI दीपक मिश्रा के रिटायरमेंट की तारीख 2 अक्टूबर है. क्या खूब दिन रिटायर हो रहे हैं वो!


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