40 लाख फर्जी यूजर बनाकर कंपनी बेची, अमेरिका के सबसे बड़े बैंक को 'उल्लू' बना दिया
"फर्जी अकाउंट बनाने के लिए एक डेटा साइंस प्रोफेसर की मदद ली गई."

अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन चेज़ (JP Morgan) के साथ बड़ा ‘प्रैंक’ हो गया है. यह प्रैंक हुआ है फायनेंशियल प्लानिंग वेबसाइट 'Frank' के कारण. यह वेबसाइट जेपी मॉर्गन की ही है. साल 2021 में कंपनी ने इस वेबसाइट को 1423 करोड़ रुपये में खरीदा था. अब पता चला है कि Frank के करीब 40 लाख कस्टमर अकाउंट फर्जी हैं. जेपी मॉर्गन ने इस वेबसाइट को फिलहाल बंद कर दिया है. साथ ही Frank की फाउंडर चार्ली जेविस के खिलाफ केस भी किया है.
संपत्ति के लिहाज से जेपी मॉर्गन अमेरिका का सबसे बड़ा बैंक है. Frank एक स्टार्टअप वेबसाइट है, जो कॉलेज छात्रों को एजुकेशन लोन लेने में मदद करती है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, चार्ली जेविस और Frank के चीफ ग्रोथ ऑफिसर ओलिवियर आमर ने डील के दौरान कहा था कि उनकी वेबसाइट पर 42 लाख से ज्यादा छात्रों ने अकाउंट बनाए हैं. लेकिन असल में उस दौरान सिर्फ तीन लाख यूजर थे. बैंक ने आरोप लगाया कि बाकी के यूजर्स स्टार्टअप को बेचने के लिए बनाए गए था.
"फर्जी डेटा के लिए प्रोफेसर की हायरिंग"जेपी मॉर्गन ने पिछले महीने Frank की फाउंडर चार्ली जेविस के खिलाफ डेलावेयर कोर्ट में केस दाखिल किया था. कंपनी ने आरोप लगाया कि जेविस ने वेबसाइट की सफलता को लेकर भी झूठ बोला. जेविस ने यूजर के नाम, पता, जन्मदिम और दूसरी निजी जानकारियों का भी फर्जी आंकड़ा दिया. शिकायत में ये भी कहा गया है कि जेविस ने 'प्राइवेसी' का हवाला देते हुए शुरुआत में कस्टमर की जानकारियों को शेयर करने से भी इनकार किया था. लेकिन जब कंपनी ने जोर दिया तो जेविस ने लाखों फर्जी यूजर्स का डेटा शेयर किया.
एक और बड़ा आरोप लगा है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जेपी मॉर्गन का कहना है कि फर्जी अकाउंट बनाने के लिए एक डेटा साइंस प्रोफेसर की मदद ली गई. न्यूयॉर्क में एक कॉलेज के प्रोफेसर ने फर्जी यूजर बनाने के लिए 'सिंथेटिक डेटा' तकनीक का इस्तेमाल किया. और इसके लिए 14 लाख से ज्यादा रुपये लिए. शिकायत में एक मार्केटिंग फर्म ASL मार्केटिंग का भी नाम है.
जेविस का जेपी मॉर्गन पर आरोपहालांकि चार्ली जेविस के वकील ने आरोपों से इनकार किया है. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, जेविस ने भी कुछ दिन पहले जेपी मॉर्गन के खिलाफ केस किया था. आरोप लगाया कि बैंक ने उन्हें "गलत तरीके से" नवंबर 2022 में नौकरी से निकाल दिया. ये इसलिए किया गया ताकि उन्हें 228 करोड़ रुपये का भुगतान ना करना पड़े.
एजुकेशन लोन में मदद के लिए इस स्टार्टअप की शुरुआत 2017 में हुई थी. चार्ली जेविस ने इस स्टार्ट अप को 'हायर एजुकेशन का अमेजॉन' बताया था. लेकिन इस ‘प्रैंक’ के बाद 12 जनवरी को वेबसाइट बंद हो गई.
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