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झारखंड सिपाही भर्ती के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत, बाबूलाल मरांडी का हेमंत सोरेन पर आरोप

Jharkhand Excise Constable recruitment: 11 अभ्यर्थियों की मौत के बाद पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. BJP नेता Babulal Marandi ने इन अभ्यर्थियों की मौत के लिए Hemant Soren सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.

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2 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 2 सितंबर 2024, 12:02 PM IST)
Jharkhand Execise constable physical test babulal marandi hemant soren
झारखंड एक्साइज कांस्टेबल के 583 पदों के लिए भर्ती निकाली. (इंडिया टुडे)
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हिंदुस्तान में गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सरकारी नौकरी सबसे बड़ी नेमत है. सरकारी नौकरी के लिए देश के लाखों युवा क्या कुछ नहीं करते. सालों की पढ़ाई, रतजगे और फिर सुबह उठ कर भाग-दौड़. ताकि एक अदद नौकरी मिल सके. जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन संवर सके. लेकिन झारखंड में पुलिस भर्ती परीक्षा (Jharkhand constable exam) के फिजिकल टेस्ट के साथ कुछ ऐसा हुआ है जिसका यकीन करना मुश्किल है. यहां जिंदगी संवरने के बजाय उनकी जिंदगी की डोर थम गई. भर्ती परीक्षा के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत हो गई.

इंडिया टुडे के मुताबिक, झारखंड एक्साइज कांस्टेबल के 583 पदों के लिए भर्ती निकाली थी. जिसके लिए 4.5 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. IG ऑपरेशन अमोल वी होमकर ने बताया कि एक्साइज भर्ती के लिए 22 अगस्त से रांची, गिरीडीह, हजारीबाग, पलामू, पूर्वी सिंहभूम और साहेबगंज जिलों के सात केंद्रों पर अभ्यर्थियों के फिजिकल टेस्ट शुरू हुए थे. टेस्ट के दौरान अब तक 11 उम्मीदवारों की मौत हुई है.

उन्होंने आगे बताया कि पलामू में चार, गिरीडीह और हजारीबाग में दो-दो अभ्यर्थियों की मौत हुई है. वहीं रांची, पूर्वी सिंहभूम और साहेबगंज में एक-एक अभ्यर्थियों की मौत हो गई. अभ्यर्थियों की मौत मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. झारखंड बीजेपी की यूथ विंग ने इस मामले में अधिकारियों पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया है. IG ऑपरेशन अमोल वी होमकर ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि सभी केंद्रों पर मेडिकल टीम, दवा, एंबुलेंस, मोबाइल टॉयलेट और पीने के पानी सहित पर्याप्त व्यवस्था की गई थी.

झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने फिजिकल टेस्ट को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पर लिखा, 

जिस तरह से सरकार अभ्यर्थियों की दौड़ (फिजिकल टेस्ट) करा रही है, वैसे नहीं होता है. अभ्यर्थियों को 3 महीने पहले सूचित किया जाना चाहिए कि उन्हें कब दौड़ना है ताकि वे प्रैक्टिस कर सकें. अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड मिलने के पंद्रह दिन के भीतर ही दौड़ के लिए बुला लिया गया. कल मैंने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से बात की. उन्होंने बताया कि एक सेंटर में 6 हजार बच्चों को दौड़ाया जाता है. रात 12 बजे से लाइन लगती है और उनका नंबर दिन के 12 बजे तक आता है. इसलिए उन्हें नींद नहीं आती. हेमंत सोरेन बच्चों को नौकरी नहीं मौत दे रहे हैं.

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BJP के आरोप पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का बयान भी सामने आया है. उनका कहना है कि मौत का कारण स्टेरॉयड या कोरोना इफेक्ट भी हो सकता है.

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