'MCD ने ही दिए दुकान चलाने के पेपर, अब बिना बताए गिरा दी'
जहांगीरपुरी में जिस जगह पर एमसीडी की कार्रवाई हुई, उसी जगह हनुमान जयंती के मौके पर 16 अप्रैल को हिंसा हुई थी. रहीमा का कहना है कि जहांगीरपुरी में सभी जगह पर इसी तरह दुकानें हैं.

दिल्ली के जहांगीरपुरी के लोगों के लिए 20 अप्रैल की सुबह खलबली लेकर आई. उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की. कई 'अवैध' दुकानों और ढांचों को गिरा दिया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस कार्रवाई पर रोक लगी. स्थानीय लोग इस पर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं. आरोप है कि इस कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया. कई लोगों का ये भी आरोप है कि उनके पास दुकान के लीगल पेपर थे, इसके बावजूद दुकानों को गिरा दिया गया.
ऐसी ही एक महिला हैं रहीमा. जहांगीरपुरी के कुशल चौक के पास उनकी छोटी-सी दुकान थी. रहीमा का आरोप है कि एमसीडी ने उन्हें पिछले साल ही वेंडिंग सर्टिफिकेट दिया था, इसके बावजूद दुकान को ढाह दिया गया. रहीमा ने दी लल्लनटॉप को वो वेंडिंग सर्टिफिकेट भी दिखाया. इसमें स्ट्रीट वेंडर के रूप में उनके पति अकबर का नाम लिखा है. वेंडर सर्टिफिकेट जारी करने की तारीख 13 नवंबर 2021 है. इसमें लिखा है कि रजिस्ट्रेशन की वैधता जारी होने की तारीख से 5 साल तक मान्य रहेगी. अकबर ने बताया कि उनकी दुकान 2006 से ही है.
'क्या दुकान की वजह से हुआ झगड़ा'रहीमा ने दी लल्लनटॉप के रिपोर्टर अभिनव पाण्डेय को बताया कि उन्हें दुकान गिराए जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी. उन्होंने बताया,
जहांगीरपुरी में जिस जगह पर एमसीडी की कार्रवाई हुई, उसी जगह हनुमान जयंती के मौके पर 16 अप्रैल को हिंसा हुई थी. रहीमा का कहना है कि जहांगीरपुरी में सभी जगह पर इसी तरह दुकानें हैं. उन्होंने भावुक होकर कहा,
रहीमा के पति अकबर से जब हमने पूछा कि क्या वो किसी से इसकी शिकायत करेंगे. तो उन्होंने कहा कि 'गरीब की कौन सुनता है, गरीब को मरना पड़ेगा.' रहीमा और अकबर की दुकान तोड़े जाने पर हमने एमसीडी से भी संपर्क किया. उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल सिंह ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है, वे इसको चेक करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बुलडोजर को रोकतीं सीपीएम नेता बृंदा करात (फोटो- ट्विटर/@vijayprashad)
दुकान गिराने के और भी ऐसे मामलेएक और मामला गणेश कुमार गुप्ता का है. जहांगीरपुरी में जूस की दुकान चलाते हैं. बुलडोजर से उनकी दुकान के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया गया. हालांकि गणेश गुप्ता का कहना है कि उनके पास दुकान के सभी पेपर हैं. उन्होंने ये भी कहा कि इसके खिलाफ वे कोर्ट जाएंगे. इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा,
इसी तरह रमन झा नाम के व्यक्ति ने भी आरोप लगाया कि उन्हें कोई सूचना नहीं मिली थी. आरोप के मुताबिक, रमन को अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि उनकी दुकान पर तोड़फोड़ नहीं होगी. लेकिन जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, सबसे पहले उनकी दुकान ही बुलडोजर का शिकार बन गई. रमन झा ने आजतक से कहा कि वो 1985 से ही जहांगीरपुरी में पान की दुकान चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि दुकान से वो महीने का 5000 रुपये कमा लेते थे लेकिन अब वो भी बंद हो गया.
एमसीडी की इस बुलडोजर वाली कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस कार्रवाई पर थोड़ी देरी से रोक लगी. नगर निगम का कहना था कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मिलता, कार्रवाई जारी रहेगी. इस अभियान के खिलाफ दाखिल याचिका पर 21 अप्रैल को दोबारा सुनवाई होने वाली है.
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