मणिपुर हिंसा पर अमित शाह के बयान से ITLF नाराज, कहा- 'उन्हें और कोई वजह नहीं मिली'
'हमें यकीन नहीं हो रहा कि गृह मंत्री अभी भी मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को डिफेंड कर रहे हैं.'

मणिपुर के ट्राइबल संगठन इंडीजीनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा में दिए भाषण पर निराशा जाहिर की है. बुधवार, 9 अगस्त को मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने राज्य की मौजूदा स्थिति को 2021 में म्यांमार में हुए तख्तापलट से जोड़ दिया था. उन्होंने कहा था कि तख्तापलट के चलते कुकी शरणार्थी भारी संख्या में भारत आए थे और मणिपुर की घाटियों के जंगल में बस गए थे. इससे वहां की डेमोग्राफ़ी बदलने का डर पैदा हो गया. इसी वजह से वहां हिंसा हुई. अब ITLF ने अमित शाह के इस बयान पर निराशा व्यक्त करते हुए हिंसा के लिए सीधे-सीधे सीएम बीरेन सिंह को जिम्मेदार ठहराया है.
क्या बोले थे अमित शाह?लोकसभा में दिए अपने लंबे भाषण में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था,
'कुकी डेमोक्रेटिक फ्रंट ने म्यांमार में आंदोलन शुरू किया तो सैन्य शासकों ने उन पर कार्रवाई शुरू कर दी. चूंकि भारत के साथ उनकी सीमा पर कोई बाड़ नहीं लगी है, इसलिए बड़ी संख्या में कुकी शरणार्थी के रूप में मणिपुर और मिज़ोरम में आए.'
गृह मंत्री की इस बात से ITLF खुश नहीं है. उसका कहना है कि तीन महीने से ज्यादा हो गए हैं, हिंसा ख़त्म नहीं हुई है. लेकिन गृहमंत्री को म्यांमार से आए शरणार्थी छोड़ और कोई वजह नहीं मिली. इंडिया टुडे से जुड़े इंद्रजीत की रिपोर्ट के मुताबिक शाह के बयान पर जारी की प्रेस रिलीज में ITLF ने कहा,
'गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में मणिपुर में हो रहे जातीय हिंसा पर जो बयान दिया है, उससे ITLF और कुकी-ज़ो ट्राइबल लोग निराश हैं. तीन महीने से ज्यादा वक्त से चल रही इस हिंसा में 130 से ज्यादा कुकी-ज़ो ट्राइबल्स मारे जा चुके हैं. 41,425 ट्राइबल्स को विस्थापित होना पड़ा है. मैतेई और ट्राइबल्स पूरी तरह से एक-दूसरे के खिलाफ हो गए हैं. ये सब होने के बाद भी गृह मंत्री को म्यांमार से आए शरणार्थी छोड़ और कोई वजह नहीं मिली?'
ITLF ने ये कहने के बाद आगे अपना तर्क भी रखा. कहा,
'म्यांमार से आए 40,000 से ज्यादा शरणार्थी मिज़ोरम में बसे हैं. मणिपुर से विस्थापित लोग भी वहीं हैं. इसके बावजूद वो भारत का सबसे शांतिपूर्ण राज्य है.'
ITLF ने आगे अपने बयान में हो रही हिंसा की वजह पर अपनी राय दी. बताया,
'मैतेई समुदाय, जो यहां बहुसंख्यक है, उसने अनुसूचित जनजाति माने जाने की मांग की है. सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर फॉरेस्ट रिजर्व्स को जमीन लौटाने की बात कही. इससे ट्राइबल्स के घर उजड़ जाएंगे, जो इन जमीनों पर बसे हुए हैं. साथ ही सीएम और मैतेई समुदाय के बौद्धिक लोगों ने ट्राइबल्स को गलत तरीके से दर्शाया है. इन्हीं वजहों से ये हिंसा हुई है. शरणार्थियों को इस पैमाने की हिंसा का ज़िम्मेदार ठहराना गलत है. वो किसी भी समाज के सबसे वंचित और असहाय वर्ग होते हैं.'
ITLF ने आगे मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह पर निशाना साधा और साफ-सीधे शब्दों में उन्हें इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया. संगठन ने कहा,
'हमें यकीन नहीं हो रहा कि गृह मंत्री अभी भी मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को डिफेंड कर रहे हैं. हमारा मानना है कि हिंसा भड़काने में उनका किरदार मुख्य रहा है. उनकी निगरानी में कितने निर्दोष लोग मारे जा चुके हैं. तीन महीने से ज्यादा वक्त हो गया है, हिंसा अब भी हो रही है. उनके मंत्रियों ने खुद केंद्र सरकार को बताया है कि मणिपुर में कानून व्यवस्था ढह चुकी है. इसके बावजूद केंद्र सरकार उन्हें हटाने की जगह उन्हें बचा रही है. हम गृह मंत्री से अनुरोध करते हैं कि वो पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर मणिपुर में हो रही हिंसा पर कार्रवाई करें.'

भाषण में अमित शाह ने बीरेन सिंह को सीएम पद से हटाकर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लाने की मांग पर कहा था,
ITLF की शाह से मुलाकात'विपक्ष कहता है कि राज्य में आर्टिकल 356 (राष्ट्रपति शासन) क्यों नहीं लगाया. यह तब लगता है जब हिंसा के वक्त राज्य सरकार सहयोग ना करे. हमने डीजीपी बदला, उन्होंने स्वीकार किया. हमने चीफ सेक्रेटरी बदला, उन्होंने स्वीकार कर लिया. सीएम तब बदलना पड़ता है जब सहयोग ना करे, वहां के सीएम सहयोग कर रहे हैं.'
गुरुवार की प्रेस रिलीज से पहले ITLF के प्रतिनिधियों ने बुधवार को अमित शाह से मुलाकात की थी. दिल्ली में हुई इस मीटिंग में ITLF के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री के सामने अपनी मांगें और समस्याएं रखीं. वहीं अमित शाह ने ITLF को मदद का भरोसा भी दिया था.गृह मंत्री ने ITLF से अपील की थी कि वो हिंसा से दूर रहें. लेकिन अब उनके संसद में दिए बयान से संगठन नाराज दिख रहा है.
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